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कमल कपूर: कपूर खानदान का वह सितारा जिसने खलनायक बनकर जीते करोड़ों दिल

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कमल कपूर: कपूर खानदान का वह सितारा जिसने खलनायक बनकर जीते करोड़ों दिल

सारांश

कपूर खानदान में एक ऐसा सितारा भी था जिसने नायक की चमक छोड़ खलनायक की छाया चुनी — और उसी में अमर हो गया। कमल कपूर ने पाँच दशकों में करीब 600 फिल्मों में अभिनय किया और हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार खलनायकों में अपना नाम दर्ज कराया।

मुख्य बातें

कमल कपूर का जन्म 22 फरवरी 1920 को पेशावर (अब पाकिस्तान) में हुआ था।
वह पृथ्वीराज कपूर के चचेरे भाई थे और 1946 में फिल्म 'दूर चले' से करियर की शुरुआत की।
नायक के रूप में सफलता न मिलने पर उन्होंने खलनायक की भूमिकाएँ अपनाईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद किया।
पाँच दशक के करियर में लगभग 600 फिल्मों में अभिनय किया — हिंदी, पंजाबी और गुजराती सिनेमा में।
प्रमुख फिल्मों में 'डॉन' , 'मर्द' , 'पाकीजा' , 'दीवार' और 'नमक हलाल' शामिल हैं।
2 अगस्त 2010 को 90 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हुआ।

बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों में शुमार कपूर खानदान ने हिंदी सिनेमा को दशकों तक एक से बढ़कर एक नायक दिए — पृथ्वीराज कपूर, शशि कपूर, ऋषि कपूर और रणबीर कपूर जैसे सितारे जिनकी छवि हमेशा परदे के नायक की रही। लेकिन इसी खानदान में एक ऐसे अभिनेता ने भी जन्म लिया, जिन्होंने नायक की भूमिका छोड़कर खलनायक के किरदार को अपनी पहचान बनाया — वह थे कमल कपूर, जो एक प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता और फिल्म निर्माता थे।

कौन थे कमल कपूर

कमल कपूर का जन्म 22 फरवरी 1920 को पेशावर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वह मशहूर अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के चचेरे भाई थे। उन्होंने अपनी शिक्षा लाहौर के डीएवी कॉलेज से पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा और 1946 में आई फिल्म 'दूर चले' से बतौर नायक अपने अभिनय करियर की शुरुआत की।

हालाँकि नायक के रूप में उन्हें वह सफलता नहीं मिली जिसकी उन्हें उम्मीद थी। इसके बाद उन्होंने नकारात्मक किरदारों की ओर रुख किया — और यही उनकी असली पहचान बनी। दर्शकों ने परदे पर उनके खलनायक वाले किरदार को हाथों-हाथ लिया।

पाँच दशकों का शानदार सफर

कमल कपूर ने अपने पाँच दशक से भी लंबे करियर में लगभग 600 फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ पंजाबी और गुजराती फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनकी विशेषता थी उनका दमदार और यादगार खलनायक अभिनय, जो दर्शकों को रोमांचित कर देता था।

यह ऐसे समय में था जब हिंदी सिनेमा में खलनायक की भूमिका को अक्सर हाशिए पर रखा जाता था — कमल कपूर ने इस धारणा को बदला और साबित किया कि एक सशक्त नकारात्मक किरदार भी किसी फिल्म की जान हो सकता है।

यादगार फिल्में

कमल कपूर की उल्लेखनीय फिल्मों में 'डॉन', 'नारंग', 'मर्द', 'आग', 'दीवाना', 'कालीचरण', 'खेल खेल में' और 'नमक हलाल' शामिल हैं। इसके अलावा वह 'पाकीजा', 'दीवार', 'सीता और गीता' तथा 'जब तक फूल खिले' जैसी क्लासिक फिल्मों का भी हिस्सा रहे। इन फिल्मों में उनके किरदारों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार खलनायकों में स्थान दिलाया।

निजी जीवन और परिवार

कमल कपूर ने 1945 में सुमन देवी कपूर से विवाह किया। उनके पाँच बच्चे थे — तीन बेटे और दो बेटियाँ। उनकी छोटी बेटी का विवाह प्रसिद्ध फिल्म निर्माता रमेश बहल से हुआ, और वह जाने-माने निर्देशक-निर्माता गोल्डी बहल की माँ हैं — जो इस बात का प्रमाण है कि कमल कपूर का सिनेमाई योगदान अगली पीढ़ी में भी जारी रहा।

विरासत और निधन

कमल कपूर का निधन 2 अगस्त 2010 को 90 वर्ष की आयु में मुंबई में हुआ। गौरतलब है कि उन्होंने हिंदी सिनेमा में खलनायक की भूमिका को एक नई गरिमा दी — जब भी बॉलीवुड के महान खलनायकों की चर्चा होगी, कमल कपूर का नाम अग्रणी पंक्ति में रहेगा। उनकी विरासत न केवल उनकी फिल्मों में, बल्कि उनके परिवार की अगली पीढ़ियों में भी जीवित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उन्हें वह सार्वजनिक सम्मान कभी नहीं मिला। कपूर जैसे परिवार से आकर नायक की भूमिका छोड़ना उस दौर में साहसिक निर्णय था — और 600 फिल्मों का सफर बताता है कि यह दाँव कितना सही साबित हुआ। आज जब बॉलीवुड में खलनायकों के लिए अलग पुरस्कार वर्ग हैं और 'विलेन' किरदार फिल्म की यूएसपी बनते हैं, तो कमल कपूर जैसे अग्रदूतों का योगदान और भी प्रासंगिक हो जाता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमल कपूर ने अपने करियर की शुरुआत कैसे की?
कमल कपूर ने 1946 में फिल्म 'दूर चले' से बतौर नायक अभिनय करियर शुरू किया। नायक के रूप में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद उन्होंने नकारात्मक किरदारों की ओर रुख किया, जो दर्शकों को बेहद पसंद आए।
कमल कपूर की सबसे प्रसिद्ध फिल्में कौन-सी हैं?
कमल कपूर की उल्लेखनीय फिल्मों में 'डॉन', 'मर्द', 'नमक हलाल', 'कालीचरण', 'खेल खेल में', 'पाकीजा', 'दीवार' और 'सीता और गीता' शामिल हैं। इन फिल्मों में उनके खलनायक किरदारों ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई।
कमल कपूर का निधन कब और कहाँ हुआ?
कमल कपूर का निधन 2 अगस्त 2010 को मुंबई में हुआ। उस समय उनकी आयु 90 वर्ष थी।
कमल कपूर का परिवार फिल्म जगत से कैसे जुड़ा है?
कमल कपूर कपूर खानदान के सदस्य थे और पृथ्वीराज कपूर के चचेरे भाई थे। उनकी छोटी बेटी का विवाह फिल्म निर्माता रमेश बहल से हुआ, और वह निर्देशक-निर्माता गोल्डी बहल की माँ हैं — यानी उनकी सिनेमाई विरासत अगली पीढ़ी में भी जारी रही।
राष्ट्र प्रेस
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