महाराष्ट्र मतदाता सूची: दावे-आपत्तियों की समय सीमा 26 अक्टूबर तक बढ़ी, CM फडणवीस ने दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 13 अक्टूबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के ज़रिए बताया कि चुनाव आयोग (ECI) ने राज्य की मसौदा मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियाँ दर्ज करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 26 अक्टूबर 2026 कर दी है। यह विस्तार विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत दिया गया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन बनाए रखना है।
नया शेड्यूल क्या है
मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा साझा किए गए नए कार्यक्रम के अनुसार, दावे और आपत्तियाँ दर्ज करने की अवधि 31 अगस्त से लेकर 26 अक्टूबर 2026 तक है। इन दावे-आपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया 31 अगस्त से 10 नवंबर 2026 तक चलेगी। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 16 नवंबर 2026 को किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की अपील
फडणवीस ने पात्र मतदाताओं से आग्रह किया है कि वे मसौदा सूची में अपना नाम और व्यक्तिगत विवरण तत्काल जाँच लें। यदि किसी का नाम छूट गया हो तो उसे जुड़वाने के लिए, किसी जानकारी में त्रुटि हो तो सुधार के लिए, और किसी प्रविष्टि पर आपत्ति हो तो 26 अक्टूबर से पहले आवेदन करने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि यह कदम हर पात्र नागरिक के मतदान के संवैधानिक अधिकार को सुरक्षित करने के लिए उठाया जा रहा है।
राष्ट्रीय राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर इंडिया ब्लॉक का प्रदर्शन जारी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस प्रदर्शन को 'संविधान बचाने की लड़ाई' बताया है और चुनाव आयोग पर सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी या चूक लोकतांत्रिक भागीदारी को सीधे प्रभावित करती है। समय सीमा बढ़ाए जाने से उन नागरिकों को राहत मिलती है जो किसी कारणवश पहले आवेदन नहीं कर पाए थे। महाराष्ट्र जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण राज्य में मतदाता सूची की शुद्धता का सीधा असर विधानसभा और लोकसभा चुनावों के परिणामों पर पड़ता है।
आगे क्या होगा
अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने के बाद यह तय होगा कि कितने नए मतदाता जुड़े और कितनी आपत्तियाँ स्वीकार की गईं। इस बीच, दिल्ली में जारी राजनीतिक विवाद और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल आने वाले हफ्तों में और तेज़ हो सकते हैं।