महाराष्ट्र कांग्रेस ने मतदाता सूची दावे-आपत्तियों की समयसीमा 2 माह बढ़ाने की माँग की, सीईओ को पत्र
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 29 सितंबर 2026 को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) एस. चोक्कलिंगम को पत्र लिखकर मसौदा मतदाता सूची (ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल) पर दावे और आपत्तियाँ दाखिल करने की अंतिम तिथि दो महीने बढ़ाने का आग्रह किया। कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा 12 अक्टूबर की समयसीमा अत्यंत अपर्याप्त है और इसके चलते लाखों योग्य नागरिकों के मताधिकार पर संकट आ सकता है। यह माँग ऐसे समय में उठाई गई है जब महाराष्ट्र में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) ड्राइव जारी है और जमीनी स्तर पर तकनीकी एवं प्रशासनिक अड़चनें सामने आ रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सपकाल ने सीईओ को लिखे पत्र में बताया कि एमपीसीसी का एक प्रतिनिधिमंडल पहले ही 22 सितंबर को चुनाव अधिकारियों से मिलकर जमीनी चुनौतियों से अवगत करा चुका था। इसके बावजूद चुनाव आयोग ने केवल 12 दिन का अतिरिक्त समय दिया, जिसे सपकाल ने 'नाकाफी' करार दिया।
उन्होंने राज्य के चुनावी डाटाबेस के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 'अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत/डुप्लीकेट मतदाता' (एएसडीडीओ) श्रेणी में 1.54 करोड़ मतदाता हैं और नए पंजीकरण के योग्य 40 लाख युवा हैं, लेकिन अब तक केवल 3,90,000 नागरिक ही फॉर्म-6 दाखिल कर पाए हैं।
तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें
सपकाल के अनुसार, बार-बार सर्वर डाउन होने और आधार व मोबाइल नंबर लिंक न होने से ऑनलाइन सबमिशन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, 'वोटर के नामों के मराठी और अंग्रेजी ट्रांसलिट्रेशन में अंतर भी अतिरिक्त मुश्किलें पैदा कर रहा है।'
इसके अलावा, नए फॉर्मेट वाले 'फॉर्म-6' में गलतियों की शिकायत के बावजूद संशोधित फॉर्म नहीं छापे गए हैं, जिससे नागरिक त्रुटि-रहित आवेदन की प्रति नहीं ले पा रहे। गौरतलब है कि नागपुर जिले में एक लोकसभा क्षेत्र में 25,000 से अधिक डुप्लीकेट वोटर एंट्री की सूची सीधे जिला कलेक्टर को सौंपनी पड़ी, जो चुनाव आयोग के डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर की कमियों को उजागर करता है।
बूथ लेवल अधिकारियों पर अतिरिक्त बोझ
सपकाल ने यह भी रेखांकित किया कि बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ), जिनमें अधिकांश स्कूल शिक्षक हैं, इस समय नवरात्रि उत्सव की व्यस्तताओं और स्कूल की मिड-टर्म परीक्षाओं के बीच घर-घर सर्वेक्षण और दस्तावेज़ सत्यापन का कार्यभार भी वहन कर रहे हैं। उनके अनुसार, स्टाफ पर क्षमता से ज़्यादा बोझ पड़ने से नए आवेदनों की प्रोसेसिंग पर गंभीर असर हो रहा है।
कांग्रेस की माँगें
पत्र में एमपीसीसी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से कई माँगें रखीं। पहली, दावों और आपत्तियों की समयसीमा 12 अक्टूबर से दो महीने बढ़ाई जाए। दूसरी, दिल्ली की तर्ज पर हर दिन हर निर्वाचन क्षेत्र में फॉर्म-6, 7 और 8 के तहत प्राप्त आवेदनों का डाटा सार्वजनिक किया जाए। तीसरी, ड्राफ्ट मतदाता सूची में मौजूद फर्जी और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने के लिए सभी निर्वाचन क्षेत्रों में पुनः व्यापक जाँच की जाए।
आगे क्या
सपकाल ने सीईओ से 'निष्पक्ष चुनाव के हित में' शीघ्र कार्रवाई का आग्रह किया है। फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या आयोग कांग्रेस की माँगों पर विचार करता है या 12 अक्टूबर की तिथि अपरिवर्तित रहती है, क्योंकि लाखों मतदाताओं का भविष्य इस निर्णय पर निर्भर करेगा।