महाराष्ट्र में एसआईआर एक महीने टालें: कांग्रेस का मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र, वारकरी मतदाताओं के नाम कटने का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने बुधवार, 27 मई 2026 को महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम को पत्र लिखकर आग्रह किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दूसरे चरण को — जो 30 जून से 29 जुलाई 2026 के बीच निर्धारित है — कम से कम एक महीने के लिए स्थगित किया जाए। पार्टी का तर्क है कि इसी अवधि में आषाढ़ी वारी पर्व पड़ता है, जिसके दौरान लाखों वारकरी श्रद्धालु अपने घरों से दूर पंढरपुर की पदयात्रा पर होते हैं, और उनके नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटने का गंभीर खतरा है।
मुख्य घटनाक्रम
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र में बताया कि चुनाव आयोग ने 14 मई 2026 को एसआईआर कार्यक्रम की घोषणा की थी। आयोग के अनुसार, महाराष्ट्र में मानचित्रण कार्य अब तक लगभग 72 प्रतिशत पूरा हो चुका है और यह 19 जून 2026 तक जारी रहेगा। इसके बाद दूसरे चरण में 30 जून से 29 जुलाई 2026 के दौरान बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित करेंगे और एकत्र करेंगे।
वारकरी समुदाय पर असर
सपकाल ने रेखांकित किया कि महाराष्ट्र में वारकरी समुदाय की बड़ी आबादी है। पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के 20 से अधिक जिलों से लाखों वारकरी विभिन्न दिंडियों (जुलूसों) में पैदल पंढरपुर की यात्रा करते हैं। उनके अनुसार, यदि बीएलओ इस अवधि में घर-घर भ्रमण करें और श्रद्धालु घर पर न मिलें, तो उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का खतरा है — जो उनके मताधिकार के लिए सीधा खतरा होगा।
मौसम की चुनौती
सपकाल ने एक अतिरिक्त कारण भी सामने रखा: मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मुंबई महानगर क्षेत्र, कोंकण, पुणे और सतारा क्षेत्रों में जुलाई में भारी बारिश की संभावना है। इससे बीएलओ का घर-घर सर्वेक्षण व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाएगा और जनजीवन अस्त-व्यस्त रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मानसून की तीव्रता पहले से ही चर्चा का विषय बनी हुई है।
कांग्रेस की माँग
इन सभी कारकों को आधार बनाते हुए, हर्षवर्धन सपकाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से आग्रह किया है कि एसआईआर के दूसरे चरण को एक महीने के लिए स्थगित किया जाए ताकि वारकरी श्रद्धालुओं और भारी बारिश प्रभावित क्षेत्रों के मतदाताओं का नाम सूची में सुरक्षित रह सके। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह माँग किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं, बल्कि मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए की जा रही है।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम के जवाब पर टिकी हैं। यदि आयोग कांग्रेस की माँग पर विचार नहीं करता, तो पार्टी इस मुद्दे को चुनाव आयोग के उच्च स्तर तक ले जाने की संभावना से इनकार नहीं कर रही। गौरतलब है कि मतदाता सूची की शुद्धता और समावेशिता को लेकर महाराष्ट्र में पहले भी विवाद उठते रहे हैं।