मतदाता सूची SIR प्रक्रिया दशकों पुरानी परंपरा का विस्तार: CM देवेंद्र फडणवीस
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 5 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया का पुरज़ोर समर्थन करते हुए कहा कि यह कोई नई या विवादास्पद पहल नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग (ECI) द्वारा दशकों से अपनाई जाती रही एक स्थापित प्रशासनिक प्रक्रिया का अगला चरण है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर की गई अपनी पोस्ट में फडणवीस ने इस प्रक्रिया का विस्तृत ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री का बयान और ऐतिहासिक संदर्भ
फडणवीस ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'भारत की चुनावी व्यवस्था में मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया कई दशकों से चली आ रही है। मतदाता सूचियाँ सटीक और विश्वसनीय बनी रहें, यह सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने विभिन्न चरणों में इन सूचियों का गहन संशोधन किया है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान SIR प्रक्रिया इसी दीर्घकालिक परंपरा की अगली कड़ी है।
पुनरीक्षण का ऐतिहासिक क्रम
मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में मतदाता सूची पुनरीक्षण के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि 1952 से 1956 के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक पुनरीक्षण हुआ। इसके बाद 1957, 1961, 1965 और 1966 में भी यही प्रक्रिया दोहराई गई।
आगे 1983-84, 1987-89, 1992, 1993 और 1995 की अवधि में बड़े पैमाने पर मतदाता सूचियों में बदलाव किए गए। चुनाव आयोग ने 2002, 2003 और 2004 में पुनः व्यापक पुनरीक्षण किया। इस प्रकार, यह प्रक्रिया स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव से ही चली आ रही है।
पुनरीक्षण प्रक्रिया में क्या होता है
फडणवीस के अनुसार, व्यापक पुनरीक्षण के दौरान घर-घर जाकर मतदाताओं से जानकारी एकत्र की जाती है, मतदाता गणना फॉर्म वितरित और जमा किए जाते हैं, तथा मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाता है। इस प्रक्रिया के ज़रिए मतदाता सूचियों को नए सिरे से तैयार किया जाता है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करना और कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए — यह चुनाव आयोग के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है।
शहरीकरण और पलायन: बदलाव की असली वजह
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि तेज़ी से हो रहे शहरीकरण और नागरिकों के बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के कारण मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर परिवर्तन ज़रूरी हो जाते हैं। पिछले 20 वर्षों में सूची में बड़ी संख्या में नाम जोड़े और हटाए गए हैं।
गौरतलब है कि नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना, मृत्यु, पलायन और दोहरे पंजीकरण जैसी स्थितियाँ मतदाता सूचियों की सटीकता को प्रभावित करती हैं — इसीलिए समय-समय पर गहन सत्यापन अनिवार्य हो जाता है।
वर्तमान SIR का महत्व
फडणवीस ने अपनी पोस्ट का समापन करते हुए कहा कि वर्तमान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) उसी व्यापक और ऐतिहासिक प्रक्रिया का अगला चरण है, जो मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।