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मतदाता सूची SIR प्रक्रिया दशकों पुरानी परंपरा का विस्तार: CM देवेंद्र फडणवीस

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मतदाता सूची SIR प्रक्रिया दशकों पुरानी परंपरा का विस्तार: CM देवेंद्र फडणवीस

सारांश

महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने एक्स पर मतदाता सूची SIR की पूरी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रखते हुए कहा कि 1952 से लेकर 2004 तक चुनाव आयोग यह काम करता रहा है — वर्तमान प्रक्रिया उसी की अगली कड़ी है, न कोई नई बात।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने 5 अक्टूबर 2026 को एक्स पर मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का समर्थन किया।
उन्होंने बताया कि 1952 से 1956 के बीच पहली बार व्यापक पुनरीक्षण हुआ और 1957, 1961, 1965, 1966 में भी यही प्रक्रिया दोहराई गई।
1983-84, 1987-89, 1992, 1993, 1995 और 2002-2004 में भी बड़े पैमाने पर मतदाता सूचियों में संशोधन हुआ।
पिछले 20 वर्षों में शहरीकरण और पलायन के कारण सूचियों में भारी बदलाव हुए हैं।
फडणवीस ने कहा कि वर्तमान SIR उसी दशकों पुरानी परंपरा का अगला चरण है, जो चुनाव आयोग की स्थापित कार्यप्रणाली है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 5 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया का पुरज़ोर समर्थन करते हुए कहा कि यह कोई नई या विवादास्पद पहल नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग (ECI) द्वारा दशकों से अपनाई जाती रही एक स्थापित प्रशासनिक प्रक्रिया का अगला चरण है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर की गई अपनी पोस्ट में फडणवीस ने इस प्रक्रिया का विस्तृत ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री का बयान और ऐतिहासिक संदर्भ

फडणवीस ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'भारत की चुनावी व्यवस्था में मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया कई दशकों से चली आ रही है। मतदाता सूचियाँ सटीक और विश्वसनीय बनी रहें, यह सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने विभिन्न चरणों में इन सूचियों का गहन संशोधन किया है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान SIR प्रक्रिया इसी दीर्घकालिक परंपरा की अगली कड़ी है।

पुनरीक्षण का ऐतिहासिक क्रम

मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में मतदाता सूची पुनरीक्षण के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि 1952 से 1956 के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक पुनरीक्षण हुआ। इसके बाद 1957, 1961, 1965 और 1966 में भी यही प्रक्रिया दोहराई गई।

आगे 1983-84, 1987-89, 1992, 1993 और 1995 की अवधि में बड़े पैमाने पर मतदाता सूचियों में बदलाव किए गए। चुनाव आयोग ने 2002, 2003 और 2004 में पुनः व्यापक पुनरीक्षण किया। इस प्रकार, यह प्रक्रिया स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव से ही चली आ रही है।

पुनरीक्षण प्रक्रिया में क्या होता है

फडणवीस के अनुसार, व्यापक पुनरीक्षण के दौरान घर-घर जाकर मतदाताओं से जानकारी एकत्र की जाती है, मतदाता गणना फॉर्म वितरित और जमा किए जाते हैं, तथा मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाता है। इस प्रक्रिया के ज़रिए मतदाता सूचियों को नए सिरे से तैयार किया जाता है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करना और कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए — यह चुनाव आयोग के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है।

शहरीकरण और पलायन: बदलाव की असली वजह

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि तेज़ी से हो रहे शहरीकरण और नागरिकों के बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के कारण मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर परिवर्तन ज़रूरी हो जाते हैं। पिछले 20 वर्षों में सूची में बड़ी संख्या में नाम जोड़े और हटाए गए हैं।

गौरतलब है कि नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना, मृत्यु, पलायन और दोहरे पंजीकरण जैसी स्थितियाँ मतदाता सूचियों की सटीकता को प्रभावित करती हैं — इसीलिए समय-समय पर गहन सत्यापन अनिवार्य हो जाता है।

वर्तमान SIR का महत्व

फडणवीस ने अपनी पोस्ट का समापन करते हुए कहा कि वर्तमान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) उसी व्यापक और ऐतिहासिक प्रक्रिया का अगला चरण है, जो मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक प्रभावी रणनीति है। लेकिन जो बात मुख्यधारा की कवरेज नज़रअंदाज़ कर रही है, वह यह है कि 'परंपरागत प्रक्रिया' होने का तर्क यह नहीं बताता कि वर्तमान SIR की समय-सीमा, दायरा और क्रियान्वयन पिछले पुनरीक्षणों जितना ही पारदर्शी और समावेशी है या नहीं। अतीत का हवाला देना प्रक्रिया की वैधता साबित करता है, लेकिन वर्तमान क्रियान्वयन की गुणवत्ता पर सवाल अलग हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या इस पुनरीक्षण में पात्र मतदाता सूची से बाहर नहीं होते — जो चुनावी लोकतंत्र की बुनियादी कसौटी है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या होता है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसमें चुनाव आयोग घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी एकत्र करता है, फॉर्म वितरित व जमा करता है और रिकॉर्ड का सत्यापन करता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूचियों को सटीक और अद्यतन रखना है।
देवेंद्र फडणवीस ने SIR के बारे में क्या कहा?
CM देवेंद्र फडणवीस ने 5 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि 1952 से चली आ रही चुनाव आयोग की स्थापित परंपरा का अगला चरण है। उन्होंने 1952 से 2004 तक के पुनरीक्षणों का ऐतिहासिक विवरण भी दिया।
भारत में मतदाता सूची पुनरीक्षण का इतिहास क्या है?
फडणवीस के अनुसार 1952-56, 1957, 1961, 1965, 1966, 1983-84, 1987-89, 1992, 1993, 1995 और 2002-2004 में चुनाव आयोग ने देशभर में व्यापक मतदाता सूची पुनरीक्षण किया। यह प्रक्रिया स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव से ही जारी है।
मतदाता सूची में इतने बदलाव क्यों होते हैं?
तेज़ी से हो रहे शहरीकरण, नागरिकों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने, नए पात्र मतदाताओं के जुड़ने और मृत्यु या दोहरे पंजीकरण के कारण मतदाता सूचियाँ बदलती रहती हैं। CM फडणवीस के अनुसार पिछले 20 वर्षों में बड़े पैमाने पर नाम जोड़े और हटाए गए हैं।
SIR प्रक्रिया पर विवाद क्यों है?
कुछ विपक्षी दलों ने SIR की समय-सीमा और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। CM फडणवीस ने इन सवालों का जवाब ऐतिहासिक तथ्यों से देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया चुनाव आयोग की दीर्घकालिक कार्यप्रणाली का हिस्सा है और इसमें कोई असाधारण बात नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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