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संगीत की जादुई यात्रा: कैसे 6 रुपए से तलत महमूद बने लाखों दिलों के सरताज

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संगीत की जादुई यात्रा: कैसे 6 रुपए से तलत महमूद बने लाखों दिलों के सरताज

सारांश

तलत महमूद की आवाज ने भारतीय फिल्म संगीत में अमिट छाप छोड़ी है। मात्र 6 रुपए से शुरू हुआ उनका सफर आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित है। जानिए उनकी अद्भुत यात्रा के बारे में।

मुख्य बातें

तलत महमूद की आवाज में गहराई और मिठास थी।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मात्र 6 रुपए से की।
उनका पहला गाना 1941 में रिकॉर्ड हुआ।
उन्हें 1992 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
तलत महमूद का निधन 1998 में हुआ, लेकिन उनकी आवाज आज भी जिंदा है।

मुंबई, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय फिल्म संगीत की दुनिया में कुछ आवाजें कभी भी पुरानी नहीं होतीं, बल्कि वे और भी गहरी होती जाती हैं। ऐसी ही एक जादुई आवाज थी तलत महमूद की। उनकी गायकी में दर्द, मिठास और शायरी की खूबसूरती का अनोखा संगम था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस आवाज ने लाखों दिलों को छू लिया, उस आवाज को अपने पहले गाने के लिए केवल छह रुपए मिले थे?

तलत महमूद का जन्म 24 फरवरी 1924 को लखनऊ में एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके परिवार में संगीत को अच्छा पेशा नहीं माना जाता था, लेकिन बचपन से ही उन्हें गाने का शौक था। वे रात-रात भर चलने वाले संगीत कार्यक्रमों में बैठकर बड़े गायकों को ध्यान से सुनते थे। कम उम्र में ही उनकी आवाज में एक अलग मिठास थी, जो आगे चलकर उनकी पहचान बनी।

सिर्फ 16 साल की उम्र में उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो, लखनऊ से गाना शुरू किया। उन्होंने मीर और दाग जैसे शायरों की गज़लें गाईं। 1941 में उनका पहला गाना रिकॉर्ड हुआ। यह गाना ग्रामोफोन कंपनी एचएफवी के लिए था और इसके बदले उन्हें मात्र 6 रुपए मेहनताना मिला था। आज के समय में यह रकम बहुत छोटी लगती है, लेकिन यही छोटे से भुगतान ने उनके बड़े सफर की शुरुआत की। उनकी आवाज इतनी पसंद की गई कि लोगों ने उनसे और गानों की मांग की।

1944 में उनका गाना 'तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी' अत्यधिक लोकप्रिय हुआ। इसके बाद वे कलकत्ता1949 में वे मुंबई आ गए और यहीं से उनका असली सुनहरा दौर शुरू हुआ। 1950 और 1960 के दशक में वे हिंदी फिल्मों के सबसे पसंदीदा गायकों में शामिल हो गए। उनके गाने 'इतना न मुझसे तू प्यार बढ़ा', 'फिर वही शाम, वही गम', 'ये हवा ये रात', 'मिलते ही आंखें दिल हुआ दिवाना' और 'तस्वीर बनाता हूं' जैसे गाने लोगों के दिलों में बसी हुई हैं।

उनकी आवाज अभिनेता दिलीप कुमार पर विशेष रूप से जंचती थी। उन्होंने दिलीप कुमार के लिए कई गानों में आवाज दी, जिनमें 'हमसे आया न गया', 'ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल', 'हम दर्द के मारों का', 'कोई नहीं मेरा इस दुनिया में', और 'सीने में सुलगते हैं अरमां' जैसे गाने शामिल हैं।

तलत महमूद की खासियत यह थी कि वे गानों के बोल को ध्यान से पढ़ते थे। अगर उन्हें शब्द अच्छे नहीं लगते थे, तो वे गाना गाने से मना कर देते थे। हालांकि, समय के साथ संगीत का रुख बदला और तेज, ऊंची आवाज वाले गीत अधिक पसंद किए जाने लगे। इससे उनका करियर थोड़ी धीमी गति से चलने लगा, लेकिन उनकी पहचान कभी कम नहीं हुई।

उन्हें 1992 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके लंबे और शानदार योगदान की पहचान था। उन्होंने लगभग चार दशकों तक गाया और सैकड़ों गीतों को अपनी आवाज दी।

9 मई 1998 को 74 वर्षरेडियो, टीवी और संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है। उनका संगीत समय के साथ और भी गहरा होता चला गया।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तलत महमूद का जन्म कब हुआ?
तलत महमूद का जन्म 24 फरवरी 1924 को लखनऊ में हुआ था।
तलत महमूद का पहला गाना कौन सा था?
उनका पहला गाना 1941 में रिकॉर्ड हुआ था और इसके लिए उन्हें 6 रुपए मिले थे।
तलत महमूद को कौन सा सम्मान मिला?
उन्हें 1992 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
तलत महमूद का निधन कब हुआ?
उनका निधन 9 मई 1998 को हुआ।
तलत महमूद के प्रमुख गाने कौन-कौन से हैं?
उनके प्रमुख गानों में 'इतना न मुझसे तू प्यार बढ़ा', 'फिर वही शाम, वही गम' आदि शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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