अरमान मलिक का सफर: 9 साल में 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' से बॉलीवुड तक
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के चर्चित गायक अरमान मलिक ने महज 9 साल की उम्र में 2006 में सिंगिंग रियलिटी शो 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' से अपनी संगीत यात्रा की शुरुआत की थी। 22 जुलाई 1995 को मुंबई में जन्मे अरमान आज रोमांटिक और पॉप म्यूजिक के क्षेत्र में एक स्थापित नाम हैं। उनकी यह यात्रा एक संगीत-समृद्ध परिवार की विरासत और बचपन की अदम्य प्रतिभा का परिणाम है।
संगीत की विरासत और बचपन की तैयारी
अरमान मलिक संगीत की गहरी जड़ों वाले परिवार से आते हैं। उनके दादा सरदार मलिक हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित संगीतकार रहे हैं, पिता डब्बू मलिक भी संगीत जगत से जुड़े हैं, और चाचा अनु मलिक बॉलीवुड के जाने-माने म्यूजिक डायरेक्टर हैं। जब अरमान केवल 4 साल के थे, तभी उनके माता-पिता ने उनकी संगीत प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत ट्रेनिंग दिलाई। स्कूल के म्यूजिक कॉम्पिटिशन में भी वह नियमित रूप से भाग लेते थे।
रियलिटी शो से मिली पहली पहचान
2006 में प्रसारित 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' वह मंच बना जहाँ अरमान की आवाज ने पहली बार राष्ट्रीय दर्शकों का ध्यान खींचा। उस वक्त उनकी उम्र महज 9 साल थी, फिर भी उनके आत्मविश्वास और सुर-साधना ने जजों और दर्शकों को प्रभावित किया। हालाँकि वह शो के विजेता नहीं बन पाए, लेकिन टॉप 7 प्रतिभागियों में जगह बनाकर उन्होंने अपनी क्षमता का लोहा मनवाया। यही शो उनके बॉलीवुड करियर की नींव साबित हुआ।
चाइल्ड सिंगर से प्लेबैक स्टार तक
शो के बाद अरमान ने बतौर चाइल्ड सिंगर बॉलीवुड में दस्तक दी। 2007 में उन्होंने आमिर खान की फिल्म 'तारे जमीन पर' के गाने 'बम बम बोले' में आवाज दी। इसके बाद अमिताभ बच्चन की फिल्म 'भूतनाथ' के लिए भी उन्होंने गाया। डबिंग के क्षेत्र में भी उन्होंने काम किया — 'माय नेम इज खान' में एक बच्चे की हिंदी आवाज और 'स्लमडॉग मिलेनियर' के रेडियो वर्जन में सलीम के किरदार को उन्होंने अपनी आवाज दी।
बतौर प्लेबैक सिंगर बड़ी पहचान 2014 में मिली, जब सलमान खान की फिल्म 'जय हो' के गाने 'तुमको तो आना ही था' ने उन्हें मुख्यधारा में स्थापित किया। इसके बाद 'मैं रहूं या न रहूं', 'बेसब्रियां', 'चले आना', 'क्यों रब्बा' और 'ठहर जा' जैसे गानों ने उन्हें रोमांटिक गायकी का पर्याय बना दिया।
बहुभाषी पहुँच और अंतरराष्ट्रीय मंच
अरमान ने हिंदी के अलावा तेलुगु, कन्नड़, बंगाली, गुजराती, मराठी और अंग्रेजी में भी गाने गाए हैं, जो उन्हें भाषाई सीमाओं से परे एक बहुमुखी कलाकार बनाता है। वह लंदन के वेम्बली थिएटर जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाइव परफॉर्म कर चुके हैं।
पुरस्कार और उपलब्धियाँ
अरमान मलिक को फिल्मफेयर आरडी बर्मन अवॉर्ड, ग्लोबल इंडियन म्यूजिक अवॉर्ड, बिग स्टार एंटरटेनमेंट अवॉर्ड और एमटीवी यूरोप म्यूजिक अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। 22 जुलाई 2025 को अपना 30वाँ जन्मदिन मनाने जा रहे अरमान का यह सफर बताता है कि बचपन की लगन और पारिवारिक संगीत-संस्कार किस तरह एक असाधारण करियर की आधारशिला रख सकते हैं।