10 अगस्त 2026
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किरेन रिजिजू का विपक्ष को आह्वान: छात्र आंदोलन पर चर्चा को तैयार सरकार, अमित शाह का बयान सुनें

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किरेन रिजिजू का विपक्ष को आह्वान: छात्र आंदोलन पर चर्चा को तैयार सरकार, अमित शाह का बयान सुनें

सारांश

मानसून सत्र में गतिरोध के बीच किरेन रिजिजू ने विपक्ष को खुला न्योता दिया — छात्र आंदोलन पर सदन में बात करें, लेकिन अमित शाह का बयान बिना व्यवधान के सुनें। सरकार तैयार है, शर्त एक ही है: शांति।

मुख्य बातें

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 10 अगस्त को कहा कि सरकार मानसून सत्र में छात्र आंदोलनों पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है।
रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि गृह मंत्री अमित शाह का बयान बिना किसी व्यवधान के सुना जाए।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि मौजूदा सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पेश होने की संभावना नहीं।
झारखंड में छात्र सीबीआई जाँच की माँग पर अड़े हैं; मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा सरकार ने कई माँगें मान ली हैं।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK और TMC पर एफसीआरए विधेयक पर सदन में बाधा डालने का आरोप लगाया।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 10 अगस्त को स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़ी गतिविधियों पर सदन में विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि चर्चा के दौरान सदन की कार्यवाही में कोई व्यवधान न डाला जाए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बयान शांतिपूर्वक सुना जाए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच यह बयान संसदीय कार्यवाही को पटरी पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार का स्पष्ट प्रस्ताव

रिजिजू ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'मैं यहाँ सरकार का स्पष्ट रुख रखने आया हूँ कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों और छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी गतिविधियों पर चर्चा के लिए तैयार है।' उन्होंने जोर दिया कि एक बार चर्चा शुरू होने के बाद सभी पहलुओं पर विस्तार से बात होनी चाहिए। रिजिजू ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से यह भरोसा दिलाने को कहा कि गृह मंत्री तथा सरकार की बात पूरी तरह सुनी जाएगी।

राम मंदिर और एसआईटी पर रिजिजू का रुख

रिजिजू ने राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर कहा कि एसआईटी के गठन के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कई कदम उठाए जा चुके हैं। उन्होंने इस विषय पर फिलहाल और कुछ कहने से परहेज किया। गौरतलब है कि विपक्ष इस मुद्दे पर सदन में हंगामा करता रहा है।

अन्य केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि मौजूदा संसद सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पेश होने की संभावना है। उन्होंने परिसीमन की आवश्यकता स्वीकार करते हुए कहा कि इस पर आम सहमति बनाई जानी चाहिए और इसे राजनीति से दूर रखा जाए। अठावले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सवालों पर कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी गोलीबारी और लाठीचार्ज जैसी घटनाएँ हुई थीं, इसलिए यदि राहुल गांधी सवाल उठाना चाहते हैं तो उन्हें सदन में चर्चा के माध्यम से ऐसा करना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की संसद में भूमिका पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि 'राहुल गांधी लोकसभा अध्यक्ष नहीं हैं।' उन्होंने विपक्ष पर कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की जनता सब कुछ देख रही है। गिरिराज ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को अपने विचारों के लिए राहुल गांधी के प्रमाणपत्र की कोई आवश्यकता नहीं है और वे हाल ही में आईआईटी दिल्ली में युवाओं से सीधे संवाद कर चुके हैं।

झारखंड छात्र आंदोलन और एफसीआरए विधेयक

केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने झारखंड में जारी छात्र विरोध-प्रदर्शन पर कहा कि सरकार ने छात्रों की कई माँगें मान ली हैं, लेकिन छात्र सीबीआई जाँच की माँग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने विरोध प्रदर्शन को छात्रों का मौलिक अधिकार बताया। भाजपा सांसद विष्णुदयाल राम ने झारखंड में जेएमएम के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस की भागीदारी का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर कांग्रेस का रवैया दोहरा है।

एफसीआरए विधेयक को लेकर भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर सदन में नारेबाजी को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस सदस्य राइली मूर के एफसीआरए विधेयक से जुड़े कथित भ्रामक बयान के संदर्भ में पत्र लिखकर विधेयक की विभिन्न धाराओं की जानकारी देने का प्रयास किया है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हो रही है। भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री सभी दलों को विश्वास में लेकर महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कराने का प्रयास कर रहे हैं। अब देखना होगा कि विपक्ष सरकार के इस प्रस्ताव पर सहमति जताता है या गतिरोध बना रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक शर्त छिपी है — चर्चा तभी, जब विपक्ष गृह मंत्री की बात बिना रोके सुने। यह संसदीय बहस की परंपरा के अनुकूल तो है, लेकिन सवाल यह है कि सरकार छात्र आंदोलनों पर चर्चा की पेशकश कर रही है या विपक्ष को एक ऐसे ढाँचे में बाँध रही है जहाँ आलोचना की गुंजाइश सीमित हो। झारखंड में सीबीआई जाँच की माँग पर सरकार की चुप्पी और एफसीआरए विधेयक पर अंतरराष्ट्रीय दबाव — दोनों मिलकर यह संकेत देते हैं कि मानसून सत्र का यह गतिरोध महज़ प्रक्रियागत नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से गहरा है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरेन रिजिजू ने संसद में छात्र आंदोलन पर क्या कहा?
रिजिजू ने 10 अगस्त को कहा कि सरकार मानसून सत्र में छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़ी गतिविधियों पर सदन में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि चर्चा के दौरान कोई व्यवधान न हो और गृह मंत्री अमित शाह का बयान शांतिपूर्वक सुना जाए।
झारखंड में छात्र किस माँग पर विरोध कर रहे हैं?
झारखंड में छात्र सीबीआई जाँच की माँग पर विरोध-प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर के अनुसार सरकार ने छात्रों की कई अन्य माँगें मान ली हैं, लेकिन सीबीआई जाँच की माँग पर गतिरोध बना हुआ है।
क्या इस मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पेश होगा?
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि मौजूदा मानसून सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पेश किए जाएँगे। उन्होंने परिसीमन पर आम सहमति बनाने और इसे राजनीति से दूर रखने की अपील की।
एफसीआरए विधेयक पर संसद में क्या हो रहा है?
भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया है कि विपक्षी दल — कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK और TMC — एफसीआरए विधेयक पर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने अमेरिकी कांग्रेस सदस्य राइली मूर के कथित भ्रामक बयान के जवाब में पत्र लिखकर विधेयक की जानकारी साझा करने का प्रयास किया है।
मानसून सत्र में गतिरोध का मुख्य कारण क्या है?
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच छात्र आंदोलन, राम मंदिर मुद्दे और एफसीआरए विधेयक सहित कई मुद्दों पर तीखी खींचतान के कारण मानसून सत्र में लगातार हंगामा हो रहा है। विपक्ष सदन में बहस की माँग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि चर्चा के दौरान व्यवधान न हो।
राष्ट्र प्रेस
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