27 सितंबर 2026
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रम्मीकल्चर मामले में ईडी की ₹442.35 करोड़ की संपत्ति कुर्की, कुल जब्ती ₹2,843 करोड़ पार

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रम्मीकल्चर मामले में ईडी की ₹442.35 करोड़ की संपत्ति कुर्की, कुल जब्ती ₹2,843 करोड़ पार

सारांश

ऑनलाइन रम्मी की दुनिया में ₹2,843 करोड़ का घोटाला — ईडी ने रम्मीकल्चर के खिलाफ ₹442.35 करोड़ की ताज़ा कुर्की की है। आरोप है कि तीन करोड़ उपयोगकर्ताओं को छुपे बॉट्स और लत बढ़ाने वाली रणनीतियों से ठगा गया और मुनाफे को वैध संपत्तियों में छुपाया गया।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 25 सितंबर 2026 को रम्मीकल्चर और संबद्ध कंपनियों की ₹442.35 करोड़ की संपत्तियाँ पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से कुर्क कीं।
इस मामले में अब तक कुल ₹2,843 करोड़ की कथित अपराध से अर्जित संपत्तियाँ कुर्क, फ्रीज या जब्त की जा चुकी हैं।
जांच तेलंगाना में दर्ज एफआईआर पर आधारित है; प्लेटफॉर्म के देशभर में लगभग तीन करोड़ उपयोगकर्ता थे।
आरोप है कि उपयोगकर्ताओं की सहमति के बिना ऑटोमेटेड बॉट्स का उपयोग किया गया और दाँव राशि पर 10–15% कमीशन वसूला गया।
कंपनियों ने प्रचार पर करीब ₹1,035 करोड़ खर्च किए और लाभांश व शेयर बायबैक के ज़रिए कथित धन शोधन किया।
मामले में आगे की जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 27 सितंबर 2026 को ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म रम्मीकल्चर और उससे संबद्ध कंपनियों के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ₹442.35 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क कीं। इस ताज़ा कार्रवाई के साथ इस मामले में अब तक कुर्क, फ्रीज या जब्त की गई कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों का कुल आँकड़ा ₹2,843 करोड़ तक पहुँच गया है।

प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर और कुर्क संपत्तियाँ

ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने 25 सितंबर 2026 को पीएमएलए की धारा 5(1) के अंतर्गत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी किया। कुर्क की गई संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा राशि, व्यावसायिक दुकानें, एक विला और कई आवासीय संपत्तियाँ शामिल हैं।

ये संपत्तियाँ गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारकों के परिजनों, निजी फैमिली ट्रस्ट और उनसे जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के नाम पर पंजीकृत थीं। इससे पहले तलाशी अभियानों के दौरान ₹495 करोड़ की चल संपत्तियाँ फ्रीज की जा चुकी थीं, जबकि ₹11 लाख नकद, लगभग 2.30 किलोग्राम सोना, हीरे के आभूषण और बुलियन भी जब्त किए गए थे।

जांच का आधार और तलाशी अभियान

ईडी ने यह जांच तेलंगाना में दर्ज कई प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर शुरू की, जिनमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत धोखाधड़ी के अपराध दर्ज हैं — ये पीएमएलए के अंतर्गत अनुसूचित अपराध माने जाते हैं।

एजेंसी ने 7 से 14 मई 2026 और 20 से 21 जून 2026 के बीच गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज के कार्यालयों तथा उसके निदेशकों एवं प्रमुख कर्मचारियों के आवासों पर तलाशी चलाई। इस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए, जिन्हें जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया है।

प्लेटफॉर्म पर आरोप: बॉट्स और भ्रामक रणनीतियाँ

जांच में सामने आया कि गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज और रम्मीटाइम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड रम्मीकल्चर, रम्मीप्राइम, प्लेशिप और रम्मीटाइम जैसे ब्रांडों के ज़रिए ऑनलाइन रियल मनी रम्मी गेम और टूर्नामेंट संचालित कर रही थीं। इन प्लेटफॉर्म्स के देशभर में करीब तीन करोड़ उपयोगकर्ता थे, जिनमें तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे उन राज्यों के खिलाड़ी भी शामिल थे जहाँ ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध है।

ईडी के अनुसार, कंपनियाँ खिलाड़ियों को यह भरोसा दिलाती थीं कि प्लेटफॉर्म पर किसी प्रकार के बॉट का उपयोग नहीं होता, लेकिन जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि उपयोगकर्ताओं की जानकारी या सहमति के बिना ऑटोमेटेड बॉट्स इस्तेमाल किए गए, जिससे खिलाड़ियों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। कंपनियाँ दाँव राशि पर 10 से 15 प्रतिशत तक प्लेटफॉर्म कमीशन वसूलती थीं।

नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ने और उन्हें लगातार खेलते रहने के लिए बोनस, रेफरल इंसेंटिव, मुफ्त टूर्नामेंट एंट्री और अन्य प्रमोशनल ऑफर का इस्तेमाल किया गया। कंपनियों ने इन विज्ञापन और प्रचार अभियानों पर करीब ₹1,035 करोड़ खर्च किए। इसके अतिरिक्त, निकासी पर 5 से 10 प्रतिशत तक शुल्क लगाकर और 'सुपर बूस्टर' जैसे ऑफर के ज़रिए उपयोगकर्ताओं की निकासी योग्य राशि को गैर-निकासी योग्य 'गेम कैश' में बदलने की रणनीति अपनाई गई।

धन शोधन का कथित तंत्र

ईडी के अनुसार, कथित अपराध से अर्जित धन को लाभांश और शेयर बायबैक के ज़रिए शेयरधारकों तक पहुँचाया गया। बाद में उसे म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, कन्वर्टिबल नोट्स, इक्विटी शेयरों और महँगी चल-अचल संपत्तियों में निवेश कर वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की कोशिश की गई — जो धन शोधन का एक सुनियोजित तंत्र होने का संकेत देती है।

आगे की जांच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अब तक इस प्रकरण में कुल ₹2,843 करोड़ की कथित अपराध से अर्जित संपत्तियाँ कुर्क, फ्रीज या जब्त की जा चुकी हैं — जो ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग क्षेत्र के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी प्रवर्तन कार्रवाइयों में से एक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह राज्य और केंद्र दोनों स्तर पर निगरानी की विफलता को दर्शाता है। ₹1,035 करोड़ का विज्ञापन खर्च और लत-आधारित डिज़ाइन यह सवाल उठाता है कि क्या मौजूदा उपभोक्ता संरक्षण ढाँचा डिजिटल गेमिंग की जटिलताओं से निपटने में सक्षम है। ₹2,843 करोड़ की जब्ती का आँकड़ा बड़ा है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या प्रभावित उपयोगकर्ताओं को कोई राहत मिलती है — जो अब तक इस तरह के प्रवर्तन मामलों में प्राथमिकता नहीं रही है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रम्मीकल्चर मामले में ईडी ने क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत रम्मीकल्चर और संबद्ध कंपनियों की ₹442.35 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ 25 सितंबर 2026 को अस्थायी रूप से कुर्क कीं। इस मामले में अब तक कुल ₹2,843 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क, फ्रीज या जब्त की जा चुकी हैं।
गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज पर क्या आरोप हैं?
जांच एजेंसी के अनुसार, गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज और रम्मीटाइम टेक्नोलॉजीज ने उपयोगकर्ताओं की सहमति के बिना ऑटोमेटेड बॉट्स का इस्तेमाल किया, जिससे खिलाड़ियों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। इसके अलावा कंपनियों ने दाँव राशि पर 10–15% कमीशन वसूला और लत बढ़ाने वाली भ्रामक रणनीतियाँ अपनाईं।
ईडी की जांच किस आधार पर शुरू हुई?
यह जांच तेलंगाना में दर्ज कई एफआईआर पर आधारित है, जिनमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत धोखाधड़ी के अपराध दर्ज हैं — जो पीएमएलए के अंतर्गत अनुसूचित अपराध हैं। ईडी ने मई और जून 2026 में गेम्सक्राफ्ट के कार्यालयों और निदेशकों के आवासों पर तलाशी भी चलाई थी।
क्या प्रतिबंधित राज्यों के उपयोगकर्ता भी इन प्लेटफॉर्म्स पर थे?
हाँ, जांच में सामने आया कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु — जहाँ ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध है — वहाँ के बड़ी संख्या में उपयोगकर्ता इन प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय थे। प्लेटफॉर्म के कुल उपयोगकर्ताओं की संख्या करीब तीन करोड़ बताई गई है।
कथित धन शोधन किस तरह किया गया?
ईडी के अनुसार, कंपनियों ने कथित अपराध से अर्जित धन को लाभांश और शेयर बायबैक के ज़रिए शेयरधारकों तक पहुँचाया। इसके बाद उस धन को म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, कन्वर्टिबल नोट्स, इक्विटी शेयरों और महँगी संपत्तियों में निवेश कर वैध दिखाने की कोशिश की गई।
राष्ट्र प्रेस
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