रम्मीकल्चर मामले में ईडी की ₹442.35 करोड़ की संपत्ति कुर्की, कुल जब्ती ₹2,843 करोड़ पार
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 27 सितंबर 2026 को ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म रम्मीकल्चर और उससे संबद्ध कंपनियों के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ₹442.35 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क कीं। इस ताज़ा कार्रवाई के साथ इस मामले में अब तक कुर्क, फ्रीज या जब्त की गई कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों का कुल आँकड़ा ₹2,843 करोड़ तक पहुँच गया है।
प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर और कुर्क संपत्तियाँ
ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने 25 सितंबर 2026 को पीएमएलए की धारा 5(1) के अंतर्गत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी किया। कुर्क की गई संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा राशि, व्यावसायिक दुकानें, एक विला और कई आवासीय संपत्तियाँ शामिल हैं।
ये संपत्तियाँ गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारकों के परिजनों, निजी फैमिली ट्रस्ट और उनसे जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के नाम पर पंजीकृत थीं। इससे पहले तलाशी अभियानों के दौरान ₹495 करोड़ की चल संपत्तियाँ फ्रीज की जा चुकी थीं, जबकि ₹11 लाख नकद, लगभग 2.30 किलोग्राम सोना, हीरे के आभूषण और बुलियन भी जब्त किए गए थे।
जांच का आधार और तलाशी अभियान
ईडी ने यह जांच तेलंगाना में दर्ज कई प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर शुरू की, जिनमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत धोखाधड़ी के अपराध दर्ज हैं — ये पीएमएलए के अंतर्गत अनुसूचित अपराध माने जाते हैं।
एजेंसी ने 7 से 14 मई 2026 और 20 से 21 जून 2026 के बीच गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज के कार्यालयों तथा उसके निदेशकों एवं प्रमुख कर्मचारियों के आवासों पर तलाशी चलाई। इस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए, जिन्हें जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया है।
प्लेटफॉर्म पर आरोप: बॉट्स और भ्रामक रणनीतियाँ
जांच में सामने आया कि गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज और रम्मीटाइम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड रम्मीकल्चर, रम्मीप्राइम, प्लेशिप और रम्मीटाइम जैसे ब्रांडों के ज़रिए ऑनलाइन रियल मनी रम्मी गेम और टूर्नामेंट संचालित कर रही थीं। इन प्लेटफॉर्म्स के देशभर में करीब तीन करोड़ उपयोगकर्ता थे, जिनमें तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे उन राज्यों के खिलाड़ी भी शामिल थे जहाँ ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध है।
ईडी के अनुसार, कंपनियाँ खिलाड़ियों को यह भरोसा दिलाती थीं कि प्लेटफॉर्म पर किसी प्रकार के बॉट का उपयोग नहीं होता, लेकिन जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि उपयोगकर्ताओं की जानकारी या सहमति के बिना ऑटोमेटेड बॉट्स इस्तेमाल किए गए, जिससे खिलाड़ियों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। कंपनियाँ दाँव राशि पर 10 से 15 प्रतिशत तक प्लेटफॉर्म कमीशन वसूलती थीं।
नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ने और उन्हें लगातार खेलते रहने के लिए बोनस, रेफरल इंसेंटिव, मुफ्त टूर्नामेंट एंट्री और अन्य प्रमोशनल ऑफर का इस्तेमाल किया गया। कंपनियों ने इन विज्ञापन और प्रचार अभियानों पर करीब ₹1,035 करोड़ खर्च किए। इसके अतिरिक्त, निकासी पर 5 से 10 प्रतिशत तक शुल्क लगाकर और 'सुपर बूस्टर' जैसे ऑफर के ज़रिए उपयोगकर्ताओं की निकासी योग्य राशि को गैर-निकासी योग्य 'गेम कैश' में बदलने की रणनीति अपनाई गई।
धन शोधन का कथित तंत्र
ईडी के अनुसार, कथित अपराध से अर्जित धन को लाभांश और शेयर बायबैक के ज़रिए शेयरधारकों तक पहुँचाया गया। बाद में उसे म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, कन्वर्टिबल नोट्स, इक्विटी शेयरों और महँगी चल-अचल संपत्तियों में निवेश कर वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की कोशिश की गई — जो धन शोधन का एक सुनियोजित तंत्र होने का संकेत देती है।
आगे की जांच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अब तक इस प्रकरण में कुल ₹2,843 करोड़ की कथित अपराध से अर्जित संपत्तियाँ कुर्क, फ्रीज या जब्त की जा चुकी हैं — जो ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग क्षेत्र के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी प्रवर्तन कार्रवाइयों में से एक है।