रामगोपाल यादव का आरोप: विपक्षी सांसद खड़े होते ही स्थगित होता है सदन, सरकार चर्चा से भाग रही है
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और सांसद प्रो. रामगोपाल यादव ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि संसद में जब भी कोई विपक्षी सांसद बोलने के लिए खड़ा होता है, सदन की कार्यवाही महज कुछ मिनटों में स्थगित कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला सुबह 11 बजे से लेकर शाम तक बार-बार दोहराया जाता है, जो स्पष्ट करता है कि सरकार विपक्ष की आवाज़ सुनने में रुचि नहीं रखती। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में यादव ने इसे लोकतंत्र का मज़ाक करार दिया।
संसद में गतिरोध का आरोप
प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा कि यदि सरकार वाकई चर्चा के लिए तैयार होती, तो संसद में हंगामे की नौबत ही नहीं आती। उनके अनुसार, विपक्ष के किसी भी सांसद के खड़े होते ही सदन स्थगित कर दिया जाता है — यह क्रम सुबह से शाम तक जारी रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट है और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा मानता है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सवाल
सपा सांसद ने राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कुछ दिनों की अनियमितता नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही गड़बड़ियों का है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने दान दिया था — महिलाओं ने अपने गहने तक अर्पित कर दिए और लगभग हर घर से चंदा एकत्र हुआ।
यादव ने बताया कि उनके गृह जनपद इटावा में भी हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने मंदिर निर्माण के लिए दान दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस चंदे का कोई पारदर्शी हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं किया गया और यह स्पष्ट नहीं है कि धनराशि कब बैंकों में जमा हुई।
तिरुपति मॉडल की तुलना
प्रो. यादव ने तिरुपति मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की शाखा मौजूद रहती है, दान की रसीदें जारी होती हैं और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होती है। उनका कहना था कि राम मंदिर में एकत्र हुए लाखों-करोड़ों रुपये के चंदे के मामले में भी इसी स्तर की पारदर्शिता अनिवार्य होनी चाहिए।
संजय सिंह के बयान पर असहमति
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने आंदोलन के लिए अनुमति लेने की बात कही थी, रामगोपाल यादव ने खुलकर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि आंदोलनों के लिए अनुमति नहीं ली जाती और इस तरह का बयान पूरी तरह गलत है। उन्होंने दोहराया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का पूरा अधिकार है।
आगे की स्थिति
संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्षी दलों की एकजुटता और सरकार की चुप्पी के बीच टकराव आने वाले सत्र में और गहरा हो सकता है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर पारदर्शिता की माँग अब केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रह गई है — यह मुद्दा व्यापक जन-चर्चा का केंद्र बनता जा रहा है।