14 अगस्त 2026
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सपा सांसद रामगोपाल यादव का आरोप: सरकार ने संसदीय परंपराओं को तोड़कर जबरदस्ती पारित कराए विधेयक

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सपा सांसद रामगोपाल यादव का आरोप: सरकार ने संसदीय परंपराओं को तोड़कर जबरदस्ती पारित कराए विधेयक

सारांश

सपा सांसद रामगोपाल यादव ने संसद सत्र के अंत में सरकार पर कई मोर्चों पर हमला बोला — विधेयकों को जबरदस्ती पारित कराने से लेकर अमित शाह की बयान प्रक्रिया तक, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और महाराष्ट्र की मराठी भाषा नीति तक। विपक्ष का स्वर तीखा और बहुआयामी रहा।

मुख्य बातें

सपा सांसद रामगोपाल यादव ने 13 अगस्त 2026 को सरकार पर संसदीय परंपराओं और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष की जिद के कारण पूरे सत्र में कई विधेयक जबरदस्ती पारित कराए गए।
गृह मंत्री अमित शाह के बयान के लिए लिखित सवाल देने की प्रस्तावित व्यवस्था को सपा ने असंसदीय बताकर अस्वीकार किया।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों पर सपा ने सरकार से PMO निगरानी का हवाला देते हुए सदन में बयान माँगा।
महाराष्ट्र की मराठी भाषा अनिवार्यता नीति को रामगोपाल यादव ने 'संकीर्ण सोच' और देश की एकता के विरुद्ध बताया।
सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि UP में सपा सरकार बनने पर आजम खान सरकार का हिस्सा होंगे।

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ सांसद रामगोपाल यादव ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष की जिद के कारण पूरे संसद सत्र में कई विधेयक संसदीय परंपराओं और नियमों की अनदेखी करते हुए जबरदस्ती पारित कराए गए। उनके अनुसार, यह कार्यप्रणाली संसदीय लोकतंत्र की स्थापित मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।

संसदीय परंपराओं पर उठे सवाल

रामगोपाल यादव ने कहा कि सरकार में बैठे लोगों को अपने अहंकार या जिद को विपक्ष की जायज माँगों के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में कानून बनाने के लिए नियम और परंपराएँ निर्धारित हैं और उनका पालन अनिवार्य है। सपा सांसद ने यह भी कहा कि विपक्ष केवल इसलिए अपनी आपत्ति वापस नहीं लेगा क्योंकि सत्ताधारी दल बार-बार यह आरोप लगा रहा है कि विपक्ष संसद से भाग रहा है।

अमित शाह के बयान की प्रक्रिया पर आपत्ति

गृह मंत्री अमित शाह के संसद में बयान देने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर भी रामगोपाल यादव ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से कहा गया है कि विपक्षी दल अपने सवाल लोकसभा अध्यक्ष को लिखित रूप में दें, जिनका जवाब दिया जाएगा। सपा सांसद ने इसे संसद की स्थापित परंपरा के विपरीत बताते हुए कहा, 'हमेशा से यही तरीका रहा है कि मंत्री सदन में बयान देते हैं और इसके बाद सभी दलों के सांसद तय समय के भीतर अपने सवाल पूछकर संबंधित मुद्दों पर स्पष्टीकरण माँगते हैं। संसद इसी तरह काम करती है।' उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हर दिन संसदीय रीति-रिवाजों को तोड़ा जाएगा, तो विपक्ष ऐसी प्रक्रिया में शामिल होने पर पुनर्विचार करेगा।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सरकार से बयान की माँग

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों पर भी रामगोपाल यादव ने सरकार से सदन में बयान देने की माँग की। उन्होंने कहा कि यह घटना ऐसी जगह हुई जो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की निगरानी में थी, इसलिए आस्था से जुड़े इस गंभीर मामले पर सरकार का स्पष्टीकरण आवश्यक है। विपक्ष केवल सरकार का बयान चाहता है, उन्होंने स्पष्ट किया।

मराठी भाषा विवाद और 'विविधता में एकता'

महाराष्ट्र सरकार द्वारा टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के फैसले पर रामगोपाल यादव ने कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति इस तरह के कदम से सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी 'विविधता में एकता' है और भाषा के नाम पर लोगों को बाँटने की कोशिश संकीर्ण सोच को दर्शाती है। उनके अनुसार, ऐसे फैसले देश की एकता और सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं हैं।

आजम खान और सपा की आंतरिक राजनीति

उत्तर प्रदेश में सपा सरकार बनने पर आजम खान को गृह मंत्री बनाए जाने संबंधी सपा विधायक शिवपाल सिंह यादव के बयान पर सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि जब भी प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी है, आजम खान सरकार का हिस्सा रहे हैं और आगे भी रहेंगे। यह टिप्पणी पार्टी के भीतर एकजुटता का संकेत मानी जा रही है। संसद सत्र की समाप्ति के साथ ही विपक्ष और सरकार के बीच यह टकराव आगामी राजनीतिक घटनाक्रम को और तीखा कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत विश्वसनीयता का है। अमित शाह के बयान के लिए लिखित सवाल देने की व्यवस्था यदि सच है, तो यह वास्तव में संसदीय जवाबदेही के स्थापित ढाँचे से विचलन है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर PMO निगरानी का हवाला देना विपक्ष की रणनीतिक चाल भी है — लेकिन इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी सवालों को और गहरा करती है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामगोपाल यादव ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
सपा सांसद रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने संसदीय परंपराओं और नियमों की अनदेखी करते हुए पूरे सत्र में कई विधेयक जबरदस्ती पारित कराए। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष की जिद को विपक्ष की जायज माँगों के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए।
अमित शाह के संसद में बयान देने की व्यवस्था पर विपक्ष को क्या आपत्ति है?
सरकार ने विपक्ष से कहा कि वे अपने सवाल लोकसभा अध्यक्ष को लिखित रूप में दें, जिनका जवाब दिया जाएगा। रामगोपाल यादव ने इसे संसद की स्थापित परंपरा के विपरीत बताया — उनके अनुसार, मंत्री सदन में बयान देते हैं और सांसद तय समय में सवाल पूछते हैं, यही संसदीय प्रक्रिया है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सपा की क्या माँग है?
सपा ने सरकार से संसद में बयान देने की माँग की है। रामगोपाल यादव ने कहा कि यह घटना सीधे PMO की निगरानी में आने वाली जगह पर हुई, इसलिए आस्था से जुड़े इस गंभीर मामले पर सरकार का स्पष्टीकरण ज़रूरी है।
महाराष्ट्र की मराठी भाषा नीति पर सपा का क्या रुख है?
रामगोपाल यादव ने महाराष्ट्र सरकार के टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने के फैसले का विरोध किया। उन्होंने इसे 'संकीर्ण सोच' बताते हुए कहा कि भाषा के आधार पर विभाजन देश की 'विविधता में एकता' की ताकत को कमज़ोर करता है।
आजम खान को लेकर सपा का क्या बयान आया?
सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि जब भी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी है, आजम खान सरकार का हिस्सा रहे हैं और भविष्य में भी रहेंगे। यह बयान सपा विधायक शिवपाल सिंह यादव के उस बयान के जवाब में आया जिसमें आजम खान को गृह मंत्री बनाए जाने की बात कही गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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