बाबा रामदेव के आंदोलन-बयान पर सियासत तेज, कांग्रेस बोली — 'बेरोज़गारी का अंदाज़ा नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 17 अगस्त 2026 को योग गुरु बाबा रामदेव के युवा आंदोलन पर दिए गए बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज़ हो गया। जहाँ सत्तापक्ष ने रामदेव की चिंताओं को संदर्भ में देखने की बात कही, वहीं कांग्रेस ने उन पर देश की ज़मीनी हकीकत से अनजान होने का आरोप लगाया।
भाजपा सांसद का पक्ष
भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा कि नीट परीक्षा का पेपर 3 मई को लीक हुआ था, जिसके बाद केंद्र सरकार ने सभी छात्रों की फीस वापस की, दोबारा परीक्षा कराई और परिणाम घोषित किए। उन्होंने बताया कि इस परीक्षा में छात्राओं ने 58 प्रतिशत अंक हासिल किए।
चंदोलिया ने यह भी कहा कि विपक्ष ने लोकसभा में इस विषय पर हुई चर्चा में भाग नहीं लिया। उन्होंने कहा, 'अगर बाबा रामदेव के बयान के संदर्भ पर विचार करने की ज़रूरत हुई, तो सरकार उस पर गौर करेगी।'
बिहार मंत्री की राय
बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने रामदेव के बयान को 'चिंता का विषय' बताया। उन्होंने कहा कि आज देश के प्रतिभाशाली युवा — चाहे वे शिक्षक बनना चाहते हों, आईपीएस या आईएएस अधिकारी, डॉक्टर या प्रोफेसर — हर क्षेत्र में चुने जा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यदि युवा विरोध-प्रदर्शन की ओर मुड़ते हैं और अपना समय दूसरी गतिविधियों में लगाते हैं, तो इससे उनके भविष्य के अवसरों पर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सांसद बलवंत बसवंत वानखेड़े ने रामदेव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें देश में बेरोज़गारी और महंगाई की कोई जानकारी नहीं है। वानखेड़े ने कहा, 'उन्होंने 2014 से पहले लोगों से बात की थी, लेकिन 2014 से 2026 के बीच देश में क्या हो रहा है, इसके बारे में उन्हें कोई अंदाज़ा नहीं है।'
उन्होंने कहा कि देश के युवा अपने भविष्य के लिए संघर्ष करते हुए सड़कों पर उतर आए हैं, और ऐसे में रामदेव का 'बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड' वाला बयान बेमेल और गलत है।
विधायक वडेट्टीवार का चुनौती-भरा बयान
कांग्रेस विधायक विजय नामदेवराव वडेट्टीवार ने पिछले दिन कहा था कि रामदेव को अब खुद सड़कों पर उतरना चाहिए। उन्होंने अन्ना हजारे आंदोलन के दौरान रामदेव के कथित तौर पर भाग जाने का उल्लेख करते हुए कहा, 'अगर उनमें हिम्मत है, तो रामदेव को 'जेन जी' के साथ मैदान में उतरना चाहिए।'
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब नीट पेपर लीक और युवा बेरोज़गारी को लेकर देशभर में असंतोष की लहर है। गौरतलब है कि बाबा रामदेव के बयान की विस्तृत सामग्री पर राजनीतिक दलों की नज़रें टिकी हैं और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बहस और तेज़ होने की संभावना है।