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न्यायमूर्ति संजीव कुमार बने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, अनुच्छेद 223 के तहत नियुक्ति

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न्यायमूर्ति संजीव कुमार बने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, अनुच्छेद 223 के तहत नियुक्ति

सारांश

न्यायमूर्ति अरुण पल्ली के सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होते ही केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत न्यायमूर्ति संजीव कुमार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया — यह उनका इस पद पर दूसरा कार्यकाल है।

मुख्य बातें

न्यायमूर्ति संजीव कुमार को 1 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत राष्ट्रपति द्वारा की गई है।
न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति के बाद यह पद रिक्त हुआ था।
सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 22 मई और 27 मई की बैठकों में न्यायमूर्ति पल्ली की पदोन्नति की सिफारिश की थी।
न्यायमूर्ति संजीव कुमार अप्रैल 2025 में भी इसी उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं — यह उनका दूसरा कार्यकाल है।

केंद्र सरकार ने 1 जून 2026 को न्यायमूर्ति संजीव कुमार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की। यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत की गई है और तत्काल प्रभाव से लागू है। यह कदम न्यायमूर्ति अरुण पल्ली के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने के तुरंत बाद उठाया गया है।

नियुक्ति की पृष्ठभूमि

केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद यह नियुक्ति की। न्यायमूर्ति अरुण पल्ली, जिनका मूल उच्च न्यायालय पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय है, ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 22 मई और 27 मई को हुई अपनी बैठकों में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी।

अनुच्छेद 223 का महत्त्व

संविधान का अनुच्छेद 223 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि जब किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो जाए या मुख्य न्यायाधीश अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हों, तो वे उस न्यायालय के किसी वरिष्ठ न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर सकते हैं। यह प्रावधान न्यायिक कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए संविधान में रखा गया है।

न्यायमूर्ति संजीव कुमार का अनुभव

उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति संजीव कुमार इस उच्च न्यायालय के लिए नए नहीं हैं। अप्रैल 2025 में, जब न्यायमूर्ति अरुण पल्ली ने मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला था, उससे पूर्व न्यायमूर्ति संजीव कुमार उसी न्यायालय में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की भूमिका निभा चुके हैं। इस प्रकार यह उनका इस पद पर दूसरा कार्यकाल है।

सर्वोच्च न्यायालय में नई नियुक्तियाँ

केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर पोस्ट कर घोषणा की कि राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से सलाह के बाद न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली के साथ-साथ वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहन को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया है। यह नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश पर आधारित है।

आगे की स्थिति

न्यायमूर्ति संजीव कुमार अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का पूर्ण प्रशासनिक और न्यायिक कार्यभार संभालेंगे, जब तक कि केंद्र सरकार नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं कर देती। न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया में कॉलेजियम की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी दोनों आवश्यक होती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संस्थागत स्मृति और स्थिरता के लिहाज़ से सकारात्मक है। हालाँकि, एक ही न्यायालय में बार-बार कार्यवाहक व्यवस्था यह सवाल भी उठाती है कि नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में देरी क्यों होती है। केंद्र सरकार को कॉलेजियम के साथ समन्वय कर इस रिक्ति को शीघ्र स्थायी रूप से भरना चाहिए।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

न्यायमूर्ति संजीव कुमार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश क्यों नियुक्त किया गया?
न्यायमूर्ति अरुण पल्ली को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो गया, जिसके कारण संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत न्यायमूर्ति संजीव कुमार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
संविधान का अनुच्छेद 223 क्या है?
अनुच्छेद 223 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि जब किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो या वे अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हों, तो उस न्यायालय के किसी वरिष्ठ न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जा सकता है। यह प्रावधान न्यायिक कार्यों की निर्बाध निरंतरता के लिए है।
न्यायमूर्ति अरुण पल्ली को सर्वोच्च न्यायालय में कैसे नियुक्त किया गया?
सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 22 मई और 27 मई को हुई बैठकों में न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की पदोन्नति की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिश पर उन्हें न्यायमूर्ति शील नागू, श्री चंद्रशेखर, संजीव सचदेवा और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहन के साथ सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया।
क्या न्यायमूर्ति संजीव कुमार पहले भी इस पद पर रह चुके हैं?
हाँ, न्यायमूर्ति संजीव कुमार अप्रैल 2025 में भी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं — उस समय न्यायमूर्ति अरुण पल्ली के पदभार संभालने से पूर्व। यह उनका इस भूमिका में दूसरा कार्यकाल है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय में नियमित मुख्य न्यायाधीश कब नियुक्त होंगे?
इस संबंध में सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है। नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी दोनों आवश्यक होती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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