क्या डीडीए ने अरावली रिज में सड़क निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली?
सारांश
Key Takeaways
- डीडीए ने 473 पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी है।
- परियोजना से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।
- सुप्रीम कोर्ट ने मामले में विशेषज्ञ समिति की संस्तुति की आवश्यकता जताई है।
नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने अरावली रेंज में सड़क बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। डीडीए ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर 473 पेड़ों को काटने या अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने और 2,519 छोटे पौधों को हटाकर अन्य स्थान पर लगाने की अनुमति मांगी है।
यह सड़क सीएपीएफआईएमएस (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल चिकित्सा विज्ञान संस्थान) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अस्पताल तक पहुंच को सरल बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित है।
डीडीए के अनुसार, सड़क निर्माण के लिए मॉर्फोलॉजिकल रिज के 0.79 हेक्टेयर क्षेत्र में कार्य किया जाएगा, जबकि कुल 2.97 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की अनुमति मांगी गई है। प्राधिकरण का कहना है कि पहले इस परियोजना के लिए 3.6 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता बताई गई थी, लेकिन पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के प्रयासों के तहत अब इसे घटाया गया है।
डीडीए ने बताया है कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में द्वारका के धूलसिरास इलाके में 3.68 हेक्टेयर भूमि पर नए पेड़ लगाए जाएंगे। प्राधिकरण का दावा है कि परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि न्यूनतम वन क्षेत्र प्रभावित हो और हरित आवरण का संतुलन बना रहे।
इससे पहले 29 दिसंबर
इस मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ (जिसमें जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एजी मसीह भी शामिल हैं) ने की। पीठ ने स्वप्रेरित याचिका 'अरावली पहाड़ियों और श्रेणियों की परिभाषा एवं संबद्ध मुद्दे' में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी को तय की है।
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक एक नई उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन नहीं हो जाता, तब तक पहले की समिति की सिफारिशें और कोर्ट के पुराने निर्देश लागू नहीं होंगे। कोर्ट का मानना है कि किसी भी अंतिम फैसले से पहले वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और भू-वैज्ञानिक पहलुओं की समग्र समीक्षा आवश्यक है।