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पीएम मोदी का इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरा: पूर्व राजदूत त्रिगुनायत ने समझाई भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति

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पीएम मोदी का इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरा: पूर्व राजदूत त्रिगुनायत ने समझाई भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति

सारांश

पीएम मोदी का यह तीन-देशीय दौरा महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं — यह ब्रिक्स और क्वाड दोनों की अध्यक्षता संभाल रहे भारत की रणनीतिक चाल है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी रक्षा साख और नए व्यापार समझौतों के साथ, भारत इंडो-पैसिफिक में अपनी केंद्रीय भूमिका को ठोस आकार देने की कोशिश कर रहा है।

मुख्य बातें

पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुनायत के अनुसार, पीएम मोदी का इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति की अहम कड़ी है।
इंडोनेशिया में भारत की 130 से अधिक कंपनियाँ सक्रिय हैं; रक्षा, ऊर्जा, पाम ऑयल और निवेश में सहयोग बढ़ रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस और आकाश रक्षा प्रणालियों में अंतरराष्ट्रीय रुचि बढ़ी; इंडोनेशिया संभावित खरीदारों में शामिल।
न्यूजीलैंड के साथ हाल ही में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हस्ताक्षरित; ऑस्ट्रेलिया के साथ CECA पहले से लागू।
भारत इस वर्ष ब्रिक्स और क्वाड दोनों की अध्यक्षता कर रहा है — इंडोनेशिया ब्रिक्स सदस्य, ऑस्ट्रेलिया क्वाड सदस्य।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरा वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की विदेश नीति की एक निर्णायक कड़ी है। पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुनायत के अनुसार, यह दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और इंडो-पैसिफिक साझेदारियों को नई ऊर्जा देने का अवसर है। 6 जुलाई को दिए गए अपने विश्लेषण में त्रिगुनायत ने कहा कि दुनिया में चल रहे 'ग्लोबल मंथन' के दौर में भारत को उन देशों के साथ संबंध प्रगाढ़ करने चाहिए जहाँ सबसे अधिक तालमेल और संभावनाएँ हैं।

इंडोनेशिया की रणनीतिक अहमियत

त्रिगुनायत ने बताया कि इंडोनेशिया न केवल दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, बल्कि उसकी अपनी एक सुदृढ़ धर्मनिरपेक्ष पहचान भी है। उन्होंने कहा कि वहाँ आज भी भारत की प्राचीन संस्कृति का प्रभाव दिखता है और लोग उसका सम्मान करते हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति उसे रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।

पूर्व राजदूत ने यह भी रेखांकित किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, मलक्का स्ट्रेट, बाब-अल-मन्देब और स्वेज कैनाल जैसे वैश्विक व्यापारिक समुद्री मार्गों में किसी भी व्यवधान का असर पूरी दुनिया के कारोबार पर पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों के संघर्षों ने यह सिद्ध किया है कि ऐसी चुनौतियों के लिए पहले से तैयारी अनिवार्य है।

रक्षा और व्यापार सहयोग

त्रिगुनायत के अनुसार, भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, सुरक्षा, कृषि, व्यापार और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत की 130 से अधिक कंपनियाँ इंडोनेशिया में सक्रिय हैं और दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का निवेश हो चुका है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस, आकाश जैसी भारतीय रक्षा प्रणालियों में अंतरराष्ट्रीय रुचि बढ़ी है और इंडोनेशिया भी उन देशों में शामिल है जो इन उपकरणों में दिलचस्पी रखते हैं।

उन्होंने कहा, 'आजकल जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का असलहा, चाहे वो ब्रह्मोस हो, आकाश तीर हो, इन सब में लोगों का बड़ा इंटरेस्ट जागा है, क्योंकि भारत ने अपनी एफिशिएंसी प्रूव की।'

न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया का महत्व

पूर्व राजदूत ने बताया कि न्यूजीलैंड के साथ हाल ही में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हस्ताक्षरित हुआ है। वहाँ भारतीय मूल की एक बड़ी आबादी निवास करती है और न्यूजीलैंड ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रायः भारत का समर्थन किया है। इंडो-पैसिफिक संदर्भ में न्यूजीलैंड की भूमिका भी उल्लेखनीय है।

ऑस्ट्रेलिया के साथ पिछले 8-10 वर्षों में संबंध उल्लेखनीय रूप से प्रगाढ़ हुए हैं। त्रिगुनायत के अनुसार, वहाँ की सरकार चाहे किसी भी दल की रही हो, भारत के साथ संबंधों को हमेशा प्राथमिकता दी गई है। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CECA) भी लागू है। ऑस्ट्रेलिया ऊर्जा, निवेश और शिक्षा के क्षेत्र में भारत के लिए एक अहम साझेदार है, जहाँ बड़ी संख्या में भारतीय छात्र और कामगार मौजूद हैं।

ब्रिक्स, क्वाड और बहुपक्षीय संदर्भ

त्रिगुनायत ने यह भी रेखांकित किया कि इंडोनेशिया ब्रिक्स का सदस्य है और इस वर्ष भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया क्वाड का सदस्य है और भारत इस वर्ष क्वाड की भी अध्यक्षता कर रहा है। इन दोनों बहुपक्षीय मंचों की अध्यक्षता के चलते इन देशों के साथ शीर्ष स्तरीय संवाद की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने और विश्वसनीय साझेदारों का एक व्यापक नेटवर्क तैयार करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों में एक साथ अध्यक्षता एक दुर्लभ अवसर है जिसे भारत भुनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ये साझेदारियाँ ठोस रक्षा सौदों और व्यापार वृद्धि में तब्दील होती हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय रक्षा उपकरणों की बढ़ी साख एक नई कूटनीतिक पूँजी है, पर इसे दीर्घकालिक निर्यात में बदलने के लिए संस्थागत तंत्र चाहिए जो अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भारत-इंडोनेशिया की समान सोच एक मज़बूत आधार है, मगर चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच इंडोनेशिया की 'रणनीतिक स्वायत्तता' भारत के लिए अवसर और चुनौती दोनों है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी का इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरा क्यों अहम है?
पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुनायत के अनुसार, यह दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और इंडो-पैसिफिक रणनीति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स और क्वाड दोनों की अध्यक्षता कर रहा है, जिससे इन देशों के साथ शीर्ष स्तरीय संवाद की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।
भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग की क्या स्थिति है?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस और आकाश जैसी भारतीय रक्षा प्रणालियों में अंतरराष्ट्रीय रुचि बढ़ी है और इंडोनेशिया संभावित खरीदारों में शामिल है। इसके अलावा भारत की 130 से अधिक कंपनियाँ इंडोनेशिया में काम कर रही हैं और दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा और व्यापार में सहयोग तेज़ी से बढ़ रहा है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता कब हुआ?
पूर्व राजदूत त्रिगुनायत के अनुसार, भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हस्ताक्षरित हुआ है। न्यूजीलैंड में भारतीय मूल की एक बड़ी आबादी है और वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रायः भारत का समर्थन करता रहा है।
ऑस्ट्रेलिया भारत के लिए रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
ऑस्ट्रेलिया क्वाड का सदस्य है और भारत के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CECA) लागू है। ऊर्जा, निवेश और शिक्षा के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया भारत का एक प्रमुख साझेदार है, जहाँ बड़ी संख्या में भारतीय छात्र और कामगार मौजूद हैं।
इंडो-पैसिफिक में समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए क्यों ज़रूरी है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, मलक्का स्ट्रेट, बाब-अल-मन्देब और स्वेज कैनाल जैसे प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में किसी भी व्यवधान का असर वैश्विक कारोबार पर पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों के संघर्षों से यह स्पष्ट हुआ है कि भारत को विश्वसनीय साझेदारों के साथ मिलकर इन मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारी पहले से करनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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