चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा बोले — ट्रस्ट पर गबन की आशंका अभी बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने 26 जून को हावड़ा में कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा एक प्रशंसनीय कदम है, जो निष्पक्ष जांच का मार्ग प्रशस्त करता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के इस पूरे प्रकरण में जनमानस से गबन की आशंका अभी पूरी तरह नहीं हटी है।
इस्तीफों का स्वागत, लेकिन संदेह बरकरार
पीएन मिश्रा ने कहा, 'जिन लोगों पर ट्रस्ट के धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं और जो ट्रस्ट के प्रमुख कार्यकर्ता व ट्रस्टी रहे हैं, उन्हें त्यागपत्र देना ही चाहिए था।' उन्होंने कहा कि इस कदम से जांच में किसी को संदेह नहीं रहना चाहिए। गौरतलब है कि अब तक हुई जांच जनता के मन से मिलीभगत से गबन की आशंका को पूरी तरह नहीं मिटा पाई है।
पीएन मिश्रा ने यह भी बताया कि राम जन्मभूमि मामले में उन्होंने स्वयं एक महीने बहस की थी — 24 दिन लगातार लखनऊ में और 4 दिन सर्वोच्च न्यायालय में — जो समस्त हिंदू वकीलों की संयुक्त बहस से भी अधिक थी। उन्होंने कहा कि इस घटना से उन्हें अत्यंत दुख और स्तब्धता हुई है।
शास्त्रीय दृष्टिकोण और नैतिक चेतावनी
पीएन मिश्रा ने धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि स्कंद पुराण और बृहस्पति स्मृति में स्पष्ट उल्लेख है कि देवता को अर्पित धन की चोरी करने वाला, उसमें सहयोग करने वाला या चुप रहने वाला व्यक्ति 60 हज़ार वर्ष तक दंड भोगता है। उन्होंने कहा, 'जो लोग इसमें संलिप्त रहे हैं, परमात्मा उन्हें अवश्य दंडित करेंगे।'
न्यायिक जांच की मांग
पीएन मिश्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार से आग्रह किया कि इस मामले की जांच न्यायपालिका द्वारा की जाए। उन्होंने कहा कि यह ट्रस्ट सर्वोच्च न्यायालय की पाँच जजों की पीठ के निर्देश पर एक अधिनियम के अंतर्गत गठित हुआ है, इसलिए किसी कार्यकारी अधिकारी द्वारा जांच उचित नहीं होगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद स्वयं ट्रस्ट के पदेन सदस्य हैं, ऐसे में उनके नेतृत्व में निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
उन्होंने सुझाव दिया कि या तो पाँच जजों की वही पीठ यह जांच करे जिसने मूल मामले की सुनवाई की थी, या मुख्य न्यायाधीश पूर्ण न्यायालय बुलाकर पाँच जजों की समिति गठित करें। इस जांच में चारों शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, वल्लभाचार्य, निम्बार्काचार्य, रामानंदाचार्य तथा सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
शेष ट्रस्टियों से इस्तीफे की अपील
पीएन मिश्रा ने कहा कि जनता भगवान के लिए दान देती है, अपने स्वार्थ के लिए नहीं, और भगवान का धन धर्मशालाओं, आरोग्यालयों, वृद्धाश्रमों तथा लोक कल्याण कार्यों में ही लगना चाहिए। उन्होंने शेष सभी ट्रस्टियों से तत्काल इस्तीफे की अपील करते हुए कहा, 'एक मिनट भी पद पर बने रहना अनैतिक आचरण होगा।' उनके अनुसार, सभी ट्रस्टियों के इस्तीफे के बाद ही राम मंदिर की पावन आस्था पुनः स्थापित हो सकती है।