आईपीएस दीपक गहलावत को दिल्ली अदालत ने भेजा एक दिन की सीबीआई रिमांड पर, रिश्वत मामले में गिरफ्तारी
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 1 जुलाई 2026 को 2012 बैच के हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत को कथित रिश्वत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक दिन की हिरासत में भेज दिया। गहलावत को सीबीआई ने उसी दिन गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था, जहाँ एजेंसी ने पाँच दिन की रिमांड की माँग रखी थी।
मामले की पृष्ठभूमि
गहलावत वर्तमान में नई दिल्ली स्थित नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। सीबीआई के अनुसार, यह मामला मूलतः 8 जून को दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर और दो निजी व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज किया गया था। जांच के दौरान कथित तौर पर यह सामने आया कि गहलावत ने अवैध रिश्वत की मांग की, यह दावा करते हुए कि वे पुडुचेरी में नकली दवाओं की बिक्री से जुड़े सीबीआई मामलों में कुछ निजी व्यक्तियों को राहत दिलाने के लिए अपने व्यक्तिगत प्रभाव का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अदालत में बचाव पक्ष के तर्क
गहलावत के वकील ने सीबीआई की रिमांड याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आईपीएस अधिकारी पहले ही चार बार जांच में शामिल हो चुके हैं और पूरी प्रक्रिया में सहयोग किया है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि उनके बैंक खाते में कथित तौर पर जमा ₹50,000 रुपए उनकी पुरानी कार की बिक्री के लिए प्राप्त अग्रिम राशि मात्र थे। वकील ने यह भी कहा कि कोई भी लोक सेवक रिश्वत की राशि अपने निजी बैंक खाते में स्वीकार नहीं करेगा।
सीबीआई की जांच का दायरा
इस मामले में इससे पहले सीबीआई दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह और छह अन्य निजी व्यक्तियों को गिरफ्तार कर चुकी है। अदालत ने जांच एजेंसी की पाँच दिन की रिमांड माँग को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए केवल एक दिन की हिरासत की अनुमति दी, जो बचाव पक्ष की दलीलों को आंशिक राहत के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा
एक दिन की सीबीआई हिरासत पूरी होने के बाद गहलावत को पुनः अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ जांच की प्रगति के आधार पर आगे की कार्यवाही तय होगी। यह मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आचरण और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात अफसरों की जवाबदेही के व्यापक सवाल भी उठाता है।