सीबीआई ने हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत को रिश्वतखोरी में गिरफ्तार किया, ₹1.15 करोड़ बरामद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 1 जुलाई 2026 को हरियाणा कैडर के 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत को रिश्वतखोरी और प्रभाव के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया। गहलावत इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस), नई दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे। यह गिरफ्तारी उस व्यापक जांच का हिस्सा है जो 8 जून को दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर के खिलाफ दर्ज मामले से शुरू हुई थी।
मामले का पूरा घटनाक्रम
सीबीआई ने 8 जून को दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह और दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ प्रारंभिक मामला दर्ज किया था। जांच आगे बढ़ने पर एजेंसी को पता चला कि आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत ने कथित तौर पर रिश्वत की मांग की थी। आरोप है कि उन्होंने दावा किया कि वे अपने व्यक्तिगत प्रभाव का इस्तेमाल कर पुडुचेरी में नकली दवाओं की बिक्री से जुड़े उन मामलों में निजी व्यक्तियों को राहत दिला सकते हैं, जिनकी जांच स्वयं सीबीआई कर रही थी।
बरामदगी और तलाशी अभियान
इस मामले में सीबीआई अब तक इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह सहित छह अन्य व्यक्तियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। ट्रैप ऑपरेशन के दौरान एजेंसी ने करीब ₹25 लाख की ट्रैप राशि बरामद की थी। इसके अलावा जांच के क्रम में ₹90 लाख नकद और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए गए। गहलावत की गिरफ्तारी के बाद उनके कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें डिजिटल डिवाइस, हार्ड डिस्क और अहम दस्तावेज कब्जे में लिए गए।
पुडुचेरी नकली दवा मामले से कड़ी
यह ऐसे समय में आया है जब सीबीआई पुडुचेरी में नकली दवाओं की बिक्री के एक संगीन मामले की जांच कर रही है। गौरतलब है कि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी का कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़ाव और सीबीआई की अपनी जांच को प्रभावित करने का प्रयास इस मामले को विशेष रूप से गंभीर बनाता है। आरोपों के अनुसार, गहलावत ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच में हस्तक्षेप करने की कोशिश की — जो कि स्वयं एक दंडनीय अपराध है।
जांच की स्थिति और आगे की राह
सीबीआई के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित रिश्वतखोरी और प्रभाव-दुरुपयोग के नेटवर्क में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं। जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच से नए तथ्य सामने आने की संभावना है।