BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप: ली शिफेंग बोले — चीनी टीम की ताकत दबाव नहीं, सीखने का अवसर है
सारांश
मुख्य बातें
BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 के दौरान नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में विश्व के नंबर 7 बैडमिंटन खिलाड़ी ली शिफेंग ने स्पष्ट किया कि चीनी पुरुष एकल टीम में शीर्ष रैंकिंग वाले खिलाड़ियों की भरमार उन पर दबाव नहीं बनाती, बल्कि यह परस्पर विकास का माध्यम है। उनके अनुसार, स्वस्थ आंतरिक प्रतिस्पर्धा खिलाड़ियों को निरंतर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है।
चीनी टीम की ताकत और ली का नज़रिया
पुरुष एकल वर्ग में चीन की उपस्थिति इस समय असाधारण रूप से मजबूत है। शी यू क्यूई (विश्व नंबर 1), वेंग होंगयांग और लू गुआंगजू जैसे खिलाड़ी एक ही टीम में हैं। 26 वर्षीय ली इस मजबूत समूह का हिस्सा हैं और उनका मानना है कि यह स्थिति प्रतिकूल नहीं, बल्कि अनुकूल है।
ली ने पत्रकारों से कहा, 'दुनिया में कई टॉप-रैंक वाले चीनी खिलाड़ी हैं, इसलिए मुझे कोई दबाव महसूस नहीं होता। मुझे लगता है कि हम एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं और साथ में बेहतर हो रहे हैं। हम एक टीम के तौर पर खेलने के लिए एक-दूसरे का हौसला बढ़ा रहे हैं।'
थॉमस कप विजय और ली की भूमिका
चीन ने मई 2026 में थॉमस कप जीता, जहाँ फाइनल में फ्रांस को 3-1 से हराया गया। ली ने इस अभियान में अहम भूमिका निभाई — ग्रुप स्टेज में भारत के लक्ष्य सेन पर जीत सहित कई महत्वपूर्ण मैच जीते। हालाँकि फाइनल में उन्हें फ्रांस के एलेक्स लैनियर से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन चीन ने ट्रॉफी अपने नाम की।
गौरतलब है कि यह अनुभव ली के उस दृष्टिकोण को और पुख्ता करता है जिसमें वे टीम की आंतरिक प्रतिस्पर्धा को व्यक्तिगत विकास का इंजन मानते हैं।
तैयारी पर फोकस, विरोधी पर नहीं
ली ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ मैचों में उनका प्रदर्शन अपेक्षित स्तर का नहीं रहा, इसलिए उनकी प्राथमिकता गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पर है, न कि केवल विरोधियों के विश्लेषण पर।
उन्होंने कहा, 'मैंने पिछले दो मैचों में बहुत अच्छा नहीं खेला, इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात अच्छी ट्रेनिंग करना है। असल बात तो अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने और जो भी तैयारी की है — जिसमें खास रणनीतियाँ भी शामिल हैं — उसे अमल में लाने की है।'
वेन्यू पर प्रतिक्रिया
नवीनीकृत इंदिरा गांधी स्टेडियम के बारे में ली ने सकारात्मक राय जताई। उन्होंने कहा कि कोर्ट का आकार, हवा का प्रवाह (ड्रिफ्ट) और समग्र प्रबंधन — सभी पहलू नई दिल्ली में उनके पिछले अनुभव की तुलना में काफी बेहतर हैं।
'कोर्ट का साइज वाकई बहुत अच्छा है। ड्रिफ्ट और मौसम समेत बाकी सभी चीजें पिछली बार की तुलना में बहुत अच्छी तरह से मैनेज की गई हैं,' उन्होंने कहा।
स्कॉटलैंड की कर्स्टी गिलमोर का बयान
चैंपियनशिप के इसी मंच पर स्कॉटलैंड की मौजूदा यूरोपियन चैंपियन कर्स्टी गिलमोर ने अपने देश में बैडमिंटन के विकास की चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि सीमित जनसंख्या के कारण प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान और उन्हें वर्ल्ड टूर स्तर तक ले जाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
'15 से 20 साल की उम्र का दायरा बहुत अहम है — ऐसे लोगों की पहचान के लिए जिनमें फुल-टाइम खिलाड़ी बनने और वर्ल्ड टूर प्रोग्राम में शामिल होने की क्षमता हो,' गिलमोर ने कहा।
ली शिफेंग के लिए अब असली परीक्षा यह है कि वे अपनी बेहतरीन तैयारी को टूर्नामेंट के कोर्ट पर परिणाम में बदल सकें।