15 अगस्त 2026
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BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप: ली शिफेंग बोले — चीनी टीम की ताकत दबाव नहीं, सीखने का अवसर है

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BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप: ली शिफेंग बोले — चीनी टीम की ताकत दबाव नहीं, सीखने का अवसर है

सारांश

विश्व नंबर 7 ली शिफेंग का मानना है कि शी यू क्यूई और वेंग होंगयांग जैसे दिग्गजों के साथ एक ही टीम में रहना दबाव नहीं — यह उनकी सबसे बड़ी ताकत है। BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 से पहले नई दिल्ली में दिया यह बयान चीनी बैडमिंटन की सामूहिक मानसिकता को दर्शाता है।

मुख्य बातें

ली शिफेंग (विश्व नंबर 7) ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 से पहले इंदिरा गांधी स्टेडियम, नई दिल्ली में कहा कि चीनी टीम की ताकत उन पर दबाव नहीं डालती।
चीनी पुरुष एकल टीम में शी यू क्यूई (नंबर 1), वेंग होंगयांग और लू गुआंगजू जैसे शीर्ष खिलाड़ी शामिल हैं।
चीन ने मई 2026 में थॉमस कप जीता — फाइनल में फ्रांस को 3-1 से हराया; ली ने ग्रुप स्टेज में लक्ष्य सेन पर जीत दर्ज की।
ली ने माना कि पिछले दो मैचों में प्रदर्शन अपेक्षित नहीं रहा; उनकी प्राथमिकता गुणवत्तापूर्ण ट्रेनिंग है।
स्कॉटलैंड की यूरोपियन चैंपियन कर्स्टी गिलमोर ने 15-20 वर्ष आयु वर्ग में प्रतिभा पहचान को बैडमिंटन विकास की कुंजी बताया।

BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 के दौरान नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में विश्व के नंबर 7 बैडमिंटन खिलाड़ी ली शिफेंग ने स्पष्ट किया कि चीनी पुरुष एकल टीम में शीर्ष रैंकिंग वाले खिलाड़ियों की भरमार उन पर दबाव नहीं बनाती, बल्कि यह परस्पर विकास का माध्यम है। उनके अनुसार, स्वस्थ आंतरिक प्रतिस्पर्धा खिलाड़ियों को निरंतर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है।

चीनी टीम की ताकत और ली का नज़रिया

पुरुष एकल वर्ग में चीन की उपस्थिति इस समय असाधारण रूप से मजबूत है। शी यू क्यूई (विश्व नंबर 1), वेंग होंगयांग और लू गुआंगजू जैसे खिलाड़ी एक ही टीम में हैं। 26 वर्षीय ली इस मजबूत समूह का हिस्सा हैं और उनका मानना है कि यह स्थिति प्रतिकूल नहीं, बल्कि अनुकूल है।

ली ने पत्रकारों से कहा, 'दुनिया में कई टॉप-रैंक वाले चीनी खिलाड़ी हैं, इसलिए मुझे कोई दबाव महसूस नहीं होता। मुझे लगता है कि हम एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं और साथ में बेहतर हो रहे हैं। हम एक टीम के तौर पर खेलने के लिए एक-दूसरे का हौसला बढ़ा रहे हैं।'

थॉमस कप विजय और ली की भूमिका

चीन ने मई 2026 में थॉमस कप जीता, जहाँ फाइनल में फ्रांस को 3-1 से हराया गया। ली ने इस अभियान में अहम भूमिका निभाई — ग्रुप स्टेज में भारत के लक्ष्य सेन पर जीत सहित कई महत्वपूर्ण मैच जीते। हालाँकि फाइनल में उन्हें फ्रांस के एलेक्स लैनियर से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन चीन ने ट्रॉफी अपने नाम की।

गौरतलब है कि यह अनुभव ली के उस दृष्टिकोण को और पुख्ता करता है जिसमें वे टीम की आंतरिक प्रतिस्पर्धा को व्यक्तिगत विकास का इंजन मानते हैं।

तैयारी पर फोकस, विरोधी पर नहीं

ली ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ मैचों में उनका प्रदर्शन अपेक्षित स्तर का नहीं रहा, इसलिए उनकी प्राथमिकता गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पर है, न कि केवल विरोधियों के विश्लेषण पर।

उन्होंने कहा, 'मैंने पिछले दो मैचों में बहुत अच्छा नहीं खेला, इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात अच्छी ट्रेनिंग करना है। असल बात तो अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने और जो भी तैयारी की है — जिसमें खास रणनीतियाँ भी शामिल हैं — उसे अमल में लाने की है।'

वेन्यू पर प्रतिक्रिया

नवीनीकृत इंदिरा गांधी स्टेडियम के बारे में ली ने सकारात्मक राय जताई। उन्होंने कहा कि कोर्ट का आकार, हवा का प्रवाह (ड्रिफ्ट) और समग्र प्रबंधन — सभी पहलू नई दिल्ली में उनके पिछले अनुभव की तुलना में काफी बेहतर हैं।

'कोर्ट का साइज वाकई बहुत अच्छा है। ड्रिफ्ट और मौसम समेत बाकी सभी चीजें पिछली बार की तुलना में बहुत अच्छी तरह से मैनेज की गई हैं,' उन्होंने कहा।

स्कॉटलैंड की कर्स्टी गिलमोर का बयान

चैंपियनशिप के इसी मंच पर स्कॉटलैंड की मौजूदा यूरोपियन चैंपियन कर्स्टी गिलमोर ने अपने देश में बैडमिंटन के विकास की चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि सीमित जनसंख्या के कारण प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान और उन्हें वर्ल्ड टूर स्तर तक ले जाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

'15 से 20 साल की उम्र का दायरा बहुत अहम है — ऐसे लोगों की पहचान के लिए जिनमें फुल-टाइम खिलाड़ी बनने और वर्ल्ड टूर प्रोग्राम में शामिल होने की क्षमता हो,' गिलमोर ने कहा।

ली शिफेंग के लिए अब असली परीक्षा यह है कि वे अपनी बेहतरीन तैयारी को टूर्नामेंट के कोर्ट पर परिणाम में बदल सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें चीनी बैडमिंटन की उस व्यवस्थागत सोच की झलक है जो दशकों से उसे वैश्विक वर्चस्व दिलाती रही है — व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को सामूहिक उत्कृष्टता में बदलने की क्षमता। जब एक ही टीम में चार-पाँच शीर्ष-10 खिलाड़ी हों, तो आंतरिक प्रतिस्पर्धा किसी भी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से कड़ी हो जाती है। यह ढाँचा अन्य देशों के लिए एक सबक भी है — भारत सहित, जहाँ पुरुष एकल में गहराई अभी भी सीमित है। BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में चीन की असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह सामूहिक मानसिकता व्यक्तिगत प्रदर्शन में भी तब्दील होती है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ली शिफेंग कौन हैं और BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में उनकी रैंकिंग क्या है?
ली शिफेंग चीन के 26 वर्षीय पुरुष एकल बैडमिंटन खिलाड़ी हैं और वर्तमान में विश्व नंबर 7 की रैंकिंग पर हैं। वे थॉमस कप 2026 विजेता चीनी टीम का अहम हिस्सा रहे हैं।
BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 कहाँ आयोजित हो रही है?
BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित हो रही है। ली शिफेंग ने वेन्यू की स्थितियों — कोर्ट का आकार, हवा का प्रवाह और प्रबंधन — की सराहना की है।
चीन ने थॉमस कप 2026 में किसे हराया और ली की भूमिका क्या रही?
चीन ने मई 2026 में थॉमस कप के फाइनल में फ्रांस को 3-1 से हराया। ली शिफेंग ने ग्रुप स्टेज में भारत के लक्ष्य सेन पर जीत सहित कई अहम मैच जीते, हालाँकि फाइनल में उन्हें एलेक्स लैनियर से हार का सामना करना पड़ा।
ली शिफेंग चीनी टीम की आंतरिक प्रतिस्पर्धा को दबाव क्यों नहीं मानते?
ली का मानना है कि शी यू क्यूई, वेंग होंगयांग और लू गुआंगजू जैसे मजबूत साथियों के साथ प्रशिक्षण परस्पर सीखने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर है। उनके अनुसार यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है।
कर्स्टी गिलमोर ने बैडमिंटन विकास को लेकर क्या कहा?
स्कॉटलैंड की मौजूदा यूरोपियन चैंपियन कर्स्टी गिलमोर ने कहा कि सीमित जनसंख्या के कारण प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान उनके देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने 15 से 20 वर्ष आयु वर्ग को बैडमिंटन प्रतिभा विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण बताया।
राष्ट्र प्रेस
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