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रिश्वत मामले में IPS दीपक गहलावत: राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI जांच पर जताई कड़ी नाराजगी

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रिश्वत मामले में IPS दीपक गहलावत: राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI जांच पर जताई कड़ी नाराजगी

सारांश

नकली दवा रैकेट की जांच से जुड़े ₹3 करोड़ के रिश्वत मामले में गिरफ्तार IPS अधिकारी दीपक गहलावत की सुनवाई में राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI के जांच अधिकारी के जवाबों को 'समझ से बाहर' बताया और 5 दिन की माँग के बदले सिर्फ 1 दिन की हिरासत दी — जांच एजेंसी के लिए यह गंभीर चेतावनी है।

मुख्य बातें

राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI की जांच-प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताई और जांच अधिकारी के जवाबों को 'समझ से बाहर' करार दिया।
हरियाणा काडर के IPS अधिकारी दीपक गहलावत को नकली दवा रैकेट से जुड़े ₹3 करोड़ के कथित रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया गया।
CBI ने 5 दिनों की हिरासत माँगी थी, लेकिन कोर्ट ने केवल 1 दिन की CBI हिरासत मंजूर की।
कोर्ट ने माना कि ₹1 करोड़ का अग्रिम बरामद हो चुका है और गहलावत को कोई राशि सीधे नहीं दी गई, इसलिए बड़ी साजिश का तर्क हिरासत का आधार नहीं बन सकता।
आरोप के समय गहलावत DGCA में क्षेत्रीय निदेशक थे और उन पर पुडुचेरी के एक व्यवसायी को जांच का रुख मोड़ने का भरोसा दिलाने का आरोप है।

नकली दवा रैकेट से जुड़े ₹3 करोड़ की कथित रिश्वत मामले में गिरफ्तार हरियाणा काडर के आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत के प्रकरण में राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच-प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने 1 जुलाई को सुनवाई के दौरान कहा कि CBI ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस मामले में लेन-देन के किस हिस्से की जांच अभी बाकी है।

कोर्ट की मुख्य आपत्तियाँ

कोर्ट ने जांच अधिकारी के जवाबों को 'समझ से बाहर' करार देते हुए कहा कि जांच अधिकारी ने यह पता लगाने की कोई कोशिश नहीं की कि आरोपी ने किसी व्यक्ति से संपर्क किया था या नहीं — यहाँ तक कि यह भी नहीं जाँचा कि ऐसा कोई व्यक्ति अस्तित्व में था भी या नहीं।

कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि जांच अधिकारी के अनुसार ₹1 करोड़ का अग्रिम भुगतान किया गया था और वह बरामद हो चुका है, किंतु दीपक गहलावत को कोई राशि प्रत्यक्ष रूप से नहीं दी गई थी। इस आधार पर कोर्ट ने माना कि बड़ी साजिश का तर्क मौजूदा जांच के दायरे से बाहर है और यह पुलिस हिरासत का आधार नहीं बन सकता।

बरामद राशियों का ब्यौरा

कोर्ट ने CBI द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का हवाला देते हुए विभिन्न आरोपियों से बरामद राशियों का विवरण सामने रखा। दस्तावेजों के अनुसार — लवकुश मिश्रा से ₹14,25,000, अनुकल्प मिश्र से ₹16,82,046, अविनाश शुक्ला से ₹20,39,2201,121 डॉलर, करुणेश पांडेय से ₹18,07,063, रमाशंकर मिश्रा से ₹7,32,170 और रामशंकर यादव उर्फ टुन्नू से ₹1 लाख बरामद हुए।

आरोप और पृष्ठभूमि

CBI का आरोप है कि अपराध के समय दीपक गहलावत नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) में क्षेत्रीय निदेशक के पद पर तैनात थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने पुडुचेरी के एक व्यवसायी को यह भरोसा दिलाया कि वे अपने प्रभाव का उपयोग कर नकली दवा रैकेट की CBI जांच का रुख उसके पक्ष में मोड़ देंगे।

CBI ने उन्हें गिरफ्तार कर 5 दिनों की हिरासत की माँग के साथ राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया था। हालाँकि कोर्ट ने केवल 1 दिन की CBI हिरासत मंजूर की।

बचाव पक्ष की दलीलें

आरोपी के अधिवक्ता ने बताया कि दीपक गहलावत चार बार पूछताछ में शामिल हुए और हर बार जांच में सहयोग किया। उन्होंने तर्क दिया कि जिस ₹50,000 की राशि का उल्लेख किया जा रहा है, वह उनकी पुरानी कार बेचने के एवज में लिया गया अग्रिम भुगतान था। बचाव पक्ष ने यह भी प्रश्न उठाया कि कोई अधिकारी रिश्वत लेने पर उसे अपने व्यक्तिगत खाते में क्यों जमा करेगा।

CBI ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि कथित माँग ₹1.5 करोड़ की थी — ऐसे में ₹50,000 का अग्रिम भुगतान तर्कसंगत नहीं लगता।

आगे क्या होगा

यह मामला अब न केवल एक आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि CBI की जांच की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद CBI पर यह दबाव है कि वह अगली सुनवाई में जांच की स्पष्ट दिशा और बाकी लेन-देन का ब्यौरा प्रस्तुत करे। यह मामला भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र की जवाबदेही की एक महत्वपूर्ण कसौटी बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो हिरासत की माँग का औचित्य स्वतः कमज़ोर हो जाता है। यह वही CBI है जिस पर नकली दवा रैकेट जैसे गंभीर मामले की जांच की जिम्मेदारी है — ऐसे में जांच अधिकारी का यह न जानना कि आरोपी ने किसी से संपर्क किया या नहीं, जांच की गहराई पर संदेह पैदा करता है। अदालतें जब एजेंसियों को इस तरह आईना दिखाती हैं, तो यह लोकतांत्रिक जवाबदेही का ज़रूरी हिस्सा है — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या CBI इस चेतावनी से सबक लेगी।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IPS दीपक गहलावत को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
हरियाणा काडर के IPS अधिकारी दीपक गहलावत को नकली दवा बनाने वाले एक बड़े रैकेट की CBI जांच से जुड़े ₹3 करोड़ के कथित रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने पुडुचेरी के एक व्यवसायी को जांच का रुख अपने पक्ष में मोड़ने का भरोसा दिलाया था।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI पर क्या आपत्ति जताई?
कोर्ट ने कहा कि CBI ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस मामले में लेन-देन के किस हिस्से की जांच बाकी है। इसके अलावा, जांच अधिकारी ने यह पता लगाने की कोई कोशिश नहीं की कि आरोपी ने किसी व्यक्ति से संपर्क किया था या नहीं।
कोर्ट ने कितने दिनों की CBI हिरासत मंजूर की?
CBI ने 5 दिनों की हिरासत माँगी थी, लेकिन कोर्ट ने केवल 1 दिन की CBI हिरासत मंजूर की। कोर्ट ने माना कि बड़ी साजिश का तर्क मौजूदा जांच के दायरे से बाहर है और हिरासत का आधार नहीं बन सकता।
गिरफ्तारी के समय दीपक गहलावत किस पद पर थे?
आरोप के समय IPS दीपक गहलावत नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) में क्षेत्रीय निदेशक के पद पर तैनात थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने इस पद के प्रभाव का उपयोग कर जांच एजेंसी के अधिकारियों पर दबाव बनाने का वादा किया था।
बचाव पक्ष ने कोर्ट में क्या तर्क दिए?
आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि गहलावत चार बार पूछताछ में शामिल हुए और हर बार सहयोग किया। उन्होंने तर्क दिया कि जिस ₹50,000 का उल्लेख है, वह पुरानी कार बेचने का अग्रिम था, और किसी भी अधिकारी के लिए रिश्वत अपने व्यक्तिगत खाते में लेना तर्कसंगत नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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