दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: SBI की विधवा से पेंशन वसूली रद्द, 6% ब्याज सहित रकम लौटाने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाई कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को एक विधवा महिला इंदिरा की फैमिली पेंशन से की जा रही वसूली पर पूरी तरह रोक लगा दी है और बैंक को निर्देश दिया है कि पहले काटी गई समस्त रकम 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज के साथ आठ सप्ताह के भीतर वापस की जाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त भुगतान बैंक की पेंशन प्रोसेसिंग में हुई आंतरिक गलती के कारण हुआ था, न कि याचिकाकर्ता की किसी धोखाधड़ी या गलत सूचना के कारण।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता इंदिरा के पति दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के एसडीएम कार्यालय के चुनाव विभाग में अपर डिवीजन क्लर्क के पद पर कार्यरत थे। जून 2003 में सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद दिल्ली सरकार ने पेंशन भुगतान आदेश जारी कर महिला के लिए फैमिली पेंशन स्वीकृत की, जिसका भुगतान SBI की कापसहेड़ा शाखा के माध्यम से किया जाने लगा।
कुछ समय बाद महिला ने पाया कि उनकी मासिक पेंशन में भारी कटौती की जा रही है। बैंक ने उन्हें सूचित किया कि पेंशन रिकॉर्ड में 'गलत एन्हांस डेट' दर्ज होने के कारण उन्हें कथित तौर पर ₹2.51 लाख से अधिक की अतिरिक्त पेंशन दे दी गई थी। बाद में SBI ने इस कथित अतिरिक्त भुगतान की पुनर्गणना की, जो बढ़कर करीब ₹3.60 लाख हो गई, और बिना पूर्व सूचना के मासिक पेंशन से कटौती शुरू कर दी गई।
न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ
न्यायमूर्ति संजीव नरूला की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा कि बैंक के अपने रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि अधिक भुगतान पेंशन प्रोसेसिंग की आंतरिक तकनीकी त्रुटि के कारण हुआ। जस्टिस नरूला ने कहा, 'रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता को पता था, या उसे पता होना चाहिए था, कि उसे उसके कानूनी अधिकार से ज्यादा रकम मिल रही थी।'
न्यायालय ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता एक फैमिली पेंशनभोगी महिला हैं और सॉफ्टवेयर या तारीखों से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। ऐसे में उनसे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे बैंक की आंतरिक गणना में हुई त्रुटियों को पहचान पातीं।
वचनपत्र और सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा
SBI ने 2004 में याचिकाकर्ता से हस्ताक्षरित एक वचनपत्र का हवाला दिया, जिसमें अतिरिक्त भुगतान के समायोजन की अनुमति दी गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। फैसले में कहा गया, 'एसबीआई जिस सामान्य वचनपत्र का हवाला दे रहा है, वह फैमिली पेंशन शुरू होने के समय लिया गया था। ऐसे में केवल उसी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पेंशनभोगियों को दी गई कानूनी सुरक्षा को खत्म नहीं किया जा सकता।'
गौरतलब है कि न्यायालय ने पेंशनभोगियों से अतिरिक्त भुगतान की वसूली से जुड़े सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला उस 'सुरक्षा दायरे' में आता है, जो ऐसे मामलों के लिए निर्धारित है जहाँ वसूली से सेवानिवृत्त कर्मचारियों या पेंशनभोगियों को अनुचित कठिनाई हो सकती है।
प्रक्रियागत खामियों पर आलोचना
जस्टिस नरूला ने SBI की इस बात पर भी कड़ी आलोचना की कि बैंक ने याचिकाकर्ता को कथित अतिरिक्त भुगतान का पूरा विवरण और वसूली का तरीका बताए बिना ही पेंशन से एकतरफा कटौती शुरू कर दी। फैसले में स्पष्ट कहा गया, 'पेंशन से बिना पहले जानकारी दिए कटौती करना, और कटौती का कारण व तरीका न बताना, बुनियादी निष्पक्षता के खिलाफ है।'
आदेश और आगे की राह
रिट याचिका स्वीकार करते हुए न्यायालय ने SBI को निर्देश दिया कि वह आठ सप्ताह के भीतर पेंशन से काटी गई समस्त रकम वापस करे। यह राशि प्रत्येक कटौती की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज के साथ लौटाई जाएगी। न्यायालय ने भविष्य में किसी भी प्रकार की और वसूली पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया। यह फैसला देशभर के उन लाखों पेंशनभोगियों और उनके परिजनों के लिए एक महत्त्वपूर्ण न्यायिक नजीर बन सकता है, जो बैंकों की प्रशासनिक चूक के कारण एकतरफा वसूली का सामना करते हैं।