सीबीआई ने ईपीएफओ अधिकारी को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा, 14 दिन की न्यायिक हिरासत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 22 जुलाई को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक प्रवर्तन अधिकारी को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी अधिकारी ईपीएफओ के पटियाला जिला कार्यालय में तैनात था और उसने एक ईपीएफ कंसल्टेंट के क्लाइंट के खिलाफ प्रतिकूल जांच रिपोर्ट भेजने की धमकी देकर यह रकम मांगी थी। 23 जुलाई को उसे चंडीगढ़ की सक्षम अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
मामले का घटनाक्रम
जांच एजेंसी के अनुसार, शिकायतकर्ता एक ईपीएफ कंसल्टेंट है, जिसके क्लाइंट के खिलाफ कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा 7ए के तहत ईपीएफओ अधिकारियों के समक्ष जांच चल रही थी। शिकायतकर्ता ने विभाग में सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए थे।
इसके बावजूद आरोपी अधिकारी ने भारी आकलन और जुर्माने की सिफारिश करने वाली प्रतिकूल रिपोर्ट भेजने की धमकी दी। इसके बाद उसने 21 जुलाई को शिकायतकर्ता को ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ में बुलाया और जांच बंद करने तथा न्यूनतम जुर्माना लगाने के एवज में ₹4 लाख की रिश्वत की मांग की।
सीबीआई का जाल और गिरफ्तारी
सीबीआई ने 22 जुलाई को एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन के तहत आरोपी अधिकारी को शिकायतकर्ता से ₹2.5 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए मौके पर ही पकड़ लिया। उसी दिन उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। अगले दिन 23 जुलाई को अदालत में पेशी के बाद उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है।
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी घोटाले में छापेमारी
इसी दिन एक अलग मामले में सीबीआई ने चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के बैंक खातों से सरकारी धन के कथित गबन की जांच के तहत चंडीगढ़ और लुधियाना में पाँच स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
तलाशी में गबन की गई राशि के कथित लाभार्थियों के आवास और कारोबारी प्रतिष्ठान, सीएससीएल के अधिकारी अनुभव मिश्रा का ठिकाना तथा संबंधित निजी संस्थानों के परिसर शामिल थे। जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए।
₹504 करोड़ के बैंकिंग घोटाले की पृष्ठभूमि
यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा से जुड़े एक बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा बताया जा रहा है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों के करीब ₹504 करोड़ के सरकारी धन को फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले डेबिट लेनदेन के ज़रिए निकालकर शेल कंपनियों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया।
यह मामला पहले हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था। राज्य सरकार के अनुरोध पर इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई। दोनों मामलों में जांच की गति यह संकेत देती है कि सीबीआई की कार्रवाई आने वाले दिनों में और व्यापक हो सकती है।