23 जुलाई 2026
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सीबीआई ने ईपीएफओ अधिकारी को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा, 14 दिन की न्यायिक हिरासत

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सीबीआई ने ईपीएफओ अधिकारी को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा, 14 दिन की न्यायिक हिरासत

सारांश

सीबीआई ने ईपीएफओ के पटियाला कार्यालय के एक प्रवर्तन अधिकारी को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेते चंडीगढ़ में दबोचा — वह ₹4 लाख माँग रहा था। उसी दिन सीबीआई ने चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी के ₹504 करोड़ के कथित घोटाले में भी पाँच ठिकानों पर छापे मारे।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 22 जुलाई को ईपीएफओ, पटियाला के प्रवर्तन अधिकारी को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
आरोपी ने जांच बंद करने और न्यूनतम जुर्माने के बदले ₹4 लाख की माँग की थी।
23 जुलाई को चंडीगढ़ अदालत ने आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा।
सीबीआई ने चंडीगढ़ नगर निगम व सीएससीएल के ₹504 करोड़ के कथित गबन मामले में चंडीगढ़ और लुधियाना में पाँच स्थानों पर छापे मारे।
स्मार्ट सिटी घोटाला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा और हरियाणा सरकार के आठ विभागों से जुड़ा बताया जा रहा है।
दोनों मामलों में सीबीआई की जांच जारी है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 22 जुलाई को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक प्रवर्तन अधिकारी को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी अधिकारी ईपीएफओ के पटियाला जिला कार्यालय में तैनात था और उसने एक ईपीएफ कंसल्टेंट के क्लाइंट के खिलाफ प्रतिकूल जांच रिपोर्ट भेजने की धमकी देकर यह रकम मांगी थी। 23 जुलाई को उसे चंडीगढ़ की सक्षम अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

मामले का घटनाक्रम

जांच एजेंसी के अनुसार, शिकायतकर्ता एक ईपीएफ कंसल्टेंट है, जिसके क्लाइंट के खिलाफ कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा 7ए के तहत ईपीएफओ अधिकारियों के समक्ष जांच चल रही थी। शिकायतकर्ता ने विभाग में सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए थे।

इसके बावजूद आरोपी अधिकारी ने भारी आकलन और जुर्माने की सिफारिश करने वाली प्रतिकूल रिपोर्ट भेजने की धमकी दी। इसके बाद उसने 21 जुलाई को शिकायतकर्ता को ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ में बुलाया और जांच बंद करने तथा न्यूनतम जुर्माना लगाने के एवज में ₹4 लाख की रिश्वत की मांग की।

सीबीआई का जाल और गिरफ्तारी

सीबीआई ने 22 जुलाई को एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन के तहत आरोपी अधिकारी को शिकायतकर्ता से ₹2.5 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए मौके पर ही पकड़ लिया। उसी दिन उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। अगले दिन 23 जुलाई को अदालत में पेशी के बाद उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है।

चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी घोटाले में छापेमारी

इसी दिन एक अलग मामले में सीबीआई ने चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के बैंक खातों से सरकारी धन के कथित गबन की जांच के तहत चंडीगढ़ और लुधियाना में पाँच स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।

तलाशी में गबन की गई राशि के कथित लाभार्थियों के आवास और कारोबारी प्रतिष्ठान, सीएससीएल के अधिकारी अनुभव मिश्रा का ठिकाना तथा संबंधित निजी संस्थानों के परिसर शामिल थे। जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए।

₹504 करोड़ के बैंकिंग घोटाले की पृष्ठभूमि

यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा से जुड़े एक बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा बताया जा रहा है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों के करीब ₹504 करोड़ के सरकारी धन को फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले डेबिट लेनदेन के ज़रिए निकालकर शेल कंपनियों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया।

यह मामला पहले हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था। राज्य सरकार के अनुरोध पर इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई। दोनों मामलों में जांच की गति यह संकेत देती है कि सीबीआई की कार्रवाई आने वाले दिनों में और व्यापक हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनका काम श्रमिकों की भविष्य निधि की रक्षा करना है, उनके अधिकारियों का इस तरह रिश्वत लेना संस्थागत विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है। यह कोई इकलौती घटना नहीं — सीबीआई के पिछले कुछ वर्षों के रिकॉर्ड में ईपीएफओ और श्रम विभागों से जुड़े कई ट्रैप ऑपरेशन दर्ज हैं। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी के ₹504 करोड़ के कथित घोटाले का एक ही दिन में सामने आना यह भी बताता है कि शहरी विकास परियोजनाओं में वित्तीय निगरानी के तंत्र में गंभीर खामियाँ हैं। असली सवाल यह है कि क्या इन मामलों में दोषसिद्धि तक की प्रक्रिया उतनी ही तेज़ होगी जितनी गिरफ्तारी।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने ईपीएफओ अधिकारी को किस आरोप में गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने ईपीएफओ के पटियाला जिला कार्यालय के एक प्रवर्तन अधिकारी को 22 जुलाई को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने एक ईपीएफ कंसल्टेंट के क्लाइंट के खिलाफ प्रतिकूल जांच रिपोर्ट भेजने की धमकी देकर ₹4 लाख की रिश्वत माँगी थी।
गिरफ्तार ईपीएफओ अधिकारी को कितने दिन की हिरासत में भेजा गया?
23 जुलाई को चंडीगढ़ की सक्षम अदालत में पेश किए जाने पर अदालत ने आरोपी अधिकारी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सीबीआई ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है।
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड घोटाला क्या है?
यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा से जुड़े एक कथित बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा सरकार के आठ विभागों के करीब ₹504 करोड़ के सरकारी धन को फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले लेनदेन के ज़रिए शेल कंपनियों में स्थानांतरित किए जाने का आरोप है। यह मामला पहले हरियाणा सतर्कता ब्यूरो के पास था, जिसे बाद में राज्य सरकार के अनुरोध पर सीबीआई को सौंपा गया।
सीबीआई ने चंडीगढ़ और लुधियाना में छापे क्यों मारे?
सीबीआई ने चंडीगढ़ नगर निगम और सीएससीएल के बैंक खातों से सरकारी धन के कथित गबन की जांच के तहत पाँच स्थानों पर एक साथ तलाशी ली। इनमें लाभार्थियों के आवास, सीएससीएल अधिकारी अनुभव मिश्रा का ठिकाना और संबंधित निजी संस्थानों के परिसर शामिल थे।
ईपीएफओ की धारा 7ए जांच क्या होती है?
कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा 7ए के तहत ईपीएफओ अधिकारी किसी नियोक्ता के खिलाफ बकाया अंशदान और जुर्माने का निर्धारण करने के लिए जांच करते हैं। इस प्रक्रिया में अधिकारी को रिपोर्ट तैयार करने का अधिकार होता है, जिसका दुरुपयोग इस मामले में रिश्वत माँगने के लिए किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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