रांची: सीआईएसएफ के तीन लेखा अधिकारी ₹48,400 की रिश्वत लेते गिरफ्तार, सीबीआई को तीन दिन की रिमांड
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 28 अगस्त 2026 को रांची स्थित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के क्षेत्रीय वेतन एवं लेखा कार्यालय के तीन अधिकारियों को ₹48,400 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने तीनों आरोपियों को तीन दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है, ताकि गहन पूछताछ और मामले में अन्य संभावित आरोपियों की जाँच की जा सके।
कौन हैं गिरफ्तार अधिकारी
सीबीआई के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीन अधिकारियों में सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर संतोष कुमार महतो, असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर सुनील कुमार और असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर सुजीत कुमार सिंह शामिल हैं। तीनों रांची स्थित सीआईएसएफ के क्षेत्रीय वेतन एवं लेखा कार्यालय में कार्यरत थे।
आरोप है कि इन अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित सीआईएसएफ-एनटीपीसी यूनिट के एक हेड कांस्टेबल से विभिन्न कर्मचारियों के यात्रा भत्ता (टीए) बिल और बच्चों की शिक्षा भत्ता समेत अन्य बिलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की माँग की थी।
मुख्य घटनाक्रम
सीबीआई ने बुधवार को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद गुरुवार को जाल बिछाकर कार्रवाई की गई, जिसमें तीनों अधिकारियों को ₹48,400 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथ दबोचा गया। शुक्रवार को रांची की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किए जाने पर अदालत ने तीन दिन की रिमांड मंजूर कर ली।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई ने आरोपियों से जुड़े पाँच ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। तलाशी में डिजिटल उपकरण, संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेज, निवेश संबंधी रिकॉर्ड, आभूषणों से जुड़े कागजात, बैंक लेनदेन के दस्तावेज और बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई।
अदालत की प्रतिक्रिया
विशेष सीबीआई अदालत ने रिमांड की माँग को उचित ठहराते हुए तीन दिन की हिरासत स्वीकार की। सीबीआई ने अदालत को बताया कि रिमांड का उद्देश्य आरोपियों से गहन पूछताछ करना और यह पता लगाना है कि क्या इस रिश्वतखोरी के जाल में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं।
आम जनता और सरकारी कर्मचारियों पर असर
यह मामला उन सरकारी कर्मचारियों को सीधे प्रभावित करता है जिनके वैध बिल — यात्रा भत्ता, शिक्षा भत्ता — लेखा कार्यालयों के माध्यम से पारित होते हैं। गौरतलब है कि ऐसे मामलों में निचले स्तर के कर्मचारी अक्सर अपने न्यायसंगत दावों के लिए भी रिश्वत देने को मजबूर होते हैं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन के दावे कर रही है।
आगे की जाँच
सीबीआई के अनुसार, रिमांड के दौरान बरामद दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जाँच की जाएगी। जाँच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि रिश्वतखोरी का यह सिलसिला कितने समय से चल रहा था और इसका दायरा कितना व्यापक है। फिलहाल मामले की जाँच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।