सीबीआई ने सिलचर में रेलवे इंजीनियर को ₹20,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 13 जून 2026 को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद असम के सिलचर में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफ रेलवे) के एक वरिष्ठ अनुभाग अभियंता को ₹20,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी अधिकारी कैरेज एंड वैगन (सी एंड डब्ल्यू) विभाग में तैनात था और एक ठेकेदार के ₹20 लाख के लंबित बिल को मंजूरी देने के एवज में यह अवैध राशि मांगी गई थी।
मुख्य घटनाक्रम
12 जून 2026 को शिकायतकर्ता ठेकेदार ने आरोपी वरिष्ठ अनुभाग अभियंता से मुलाकात कर पहले से पूरा किए जा चुके कार्य का बिल शीघ्र पारित करने का अनुरोध किया। इस पर अधिकारी ने कुल लंबित राशि का एक प्रतिशत, अर्थात ₹20,000, रिश्वत के रूप में मांगी। शिकायत दर्ज होते ही सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी को रकम लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया।
सीबीआई की कार्रवाई
एजेंसी ने 13 जून को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की और अगले ही दिन गिरफ्तारी की। आरोपी को 14 जून 2026 को गुवाहाटी स्थित सक्षम न्यायालय में पेश किया गया। इसके साथ ही सीबीआई ने आरोपी के आवासीय परिसरों पर भी तलाशी अभियान चलाया, जो जारी बताया गया है।
व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सीबीआई ने हाल के हफ्तों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध कई बड़ी कार्रवाइयाँ की हैं। गौरतलब है कि 11 जून 2026 को सीबीआई की जबलपुर टीम ने मध्य प्रदेश के शहडोल में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सहायक प्रबंधक अभयंकर शर्मा को ₹10,000 की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। उन पर बैंकिंग कियोस्क संचालन की अनुमति देने के एवज में यह राशि मांगने का आरोप था। यह Nवीं ऐसी घटना है जहाँ सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों पर ठेकेदारों और छोटे उद्यमियों से अवैध वसूली के आरोप लगे हैं।
आम जनता और ठेकेदारों पर असर
रेलवे के ठेकेदारों के लिए बिल भुगतान की प्रक्रिया पहले से ही जटिल और समय-साध्य मानी जाती है। इस तरह के मामले यह उजागर करते हैं कि अनुमोदन श्रृंखला में भ्रष्टाचार छोटे ठेकेदारों की नकदी प्रवाह को किस कदर प्रभावित करता है। आलोचकों का कहना है कि बिल-स्वीकृति जैसी नियमित प्रक्रियाओं में एकल-अधिकारी निर्भरता भ्रष्टाचार की गुंजाइश बढ़ाती है।
आगे क्या होगा
सीबीआई के अनुसार मामले की विस्तृत जाँच जारी है और आरोपी के परिसरों पर तलाशी से और साक्ष्य मिलने की संभावना है। न्यायालय में पेशी के बाद हिरासत अवधि और आगे की कानूनी कार्यवाही तय होगी।