दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजीनियर राशिद को AIIMS में बीमार पिता से मिलने की अनुमति दी, 10 मई तक सुरक्षा में मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार, 6 मई 2025 को जेल में बंद बारामूला सांसद अब्दुल राशिद शेख, जिन्हें इंजीनियर राशिद के नाम से जाना जाता है, के मामले में पहले दिए गए अंतरिम जमानत आदेश में संशोधन किया। अदालत ने उन्हें नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती अपने बीमार पिता से मिलने की सीमित अनुमति प्रदान की है।
आदेश में क्या बदलाव हुआ
इससे पहले 28 अप्रैल 2025 को अदालत ने इंजीनियर राशिद को एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी, ताकि वे श्रीनगर जाकर अपने बीमार पिता से मिल सकें। हालाँकि, परिस्थितियाँ बदल गईं जब उनके पिता को श्रीनगर से AIIMS, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया। इसके बाद राशिद की ओर से अदालत में अर्जी दाखिल की गई, जिसमें दिल्ली में ही पिता से मिलने की अनुमति माँगी गई।
कोर्ट ने नए आदेश में स्पष्ट किया कि इंजीनियर राशिद को जेल से बाहर रहने की स्वतंत्र छूट नहीं दी जाएगी। वे 10 मई 2025 तक प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक सुरक्षा व्यवस्था के तहत AIIMS में अपने पिता से मिल सकते हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और शर्तें
अदालत ने निर्देश दिया कि मुलाकात के दौरान राशिद के साथ कम से कम दो पुलिसकर्मी सादी वर्दी में उपस्थित रहेंगे, जो वार्ड के बाहर तैनात रहेंगे। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो और किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले लगाई गई सभी शर्तें यथावत लागू रहेंगी। यह राहत केवल सीमित समय और विशेष परिस्थिति के लिए है। निर्धारित समयसीमा समाप्त होते ही इंजीनियर राशिद को तिहाड़ जेल वापस लौटना होगा, जहाँ वे फिलहाल बंद हैं।
किराए के पते पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान राशिद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने एक किराए के मकान का स्थानीय पता अदालत में प्रस्तुत किया। अदालत ने इस पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर किसी नए पते की जाँच शुरू करना उचित नहीं होगा, विशेषकर जब वह पता उनके किसी रिश्तेदार या परिचित का भी नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इंजीनियर राशिद 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला संसदीय सीट से निर्वाचित हुए थे, लेकिन वे 2019 से ही जेल में हैं। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने उन पर 2017 के कथित टेरर फंडिंग केस में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया था।
उनकी नियमित जमानत अर्जी ट्रायल कोर्ट ने 21 मार्च 2025 को खारिज कर दी थी। इसके बाद बीमार पिता के आधार पर माँगी गई अंतरिम जमानत को भी 24 अप्रैल 2025 को इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया था कि उन पर गवाहों को प्रभावित करने के आरोप हैं, जिनमें एक संरक्षित गवाह भी शामिल बताया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट का यह संशोधित आदेश उस पृष्ठभूमि में आया है जब राशिद के पिता की बिगड़ती सेहत के कारण उन्हें श्रीनगर से दिल्ली लाना पड़ा।