दिल्ली हाईकोर्ट ने राशिद इंजीनियर को पिता की 40वें दिन की रस्म के लिए 25-30 जून तक अंतरिम जमानत दी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 26 मई 2026 को टेरर फंडिंग मामले में विचाराधीन कैदी और सांसद राशिद इंजीनियर को उनके पिता के निधन के बाद 27 जून को श्रीनगर में होने वाली 40वें दिन की रस्म में शामिल होने के लिए 25 जून से 30 जून 2026 तक अंतरिम जमानत प्रदान की है। इससे पहले उन्हें पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए 2 जून तक की अंतरिम जमानत दी जा चुकी थी।
कोर्ट में क्या हुआ
राशिद इंजीनियर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने अदालत को बताया कि वे पिता के अंतिम संस्कार में पहले ही शामिल हो चुके हैं और 27 जून को श्रीनगर में होने वाली 40वें दिन की रस्म परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि जेल से रिहाई के बाद यात्रा में भी एक दिन का समय लग जाता है।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की ओर से अधिवक्ता अक्षय मलिक ने जमानत विस्तार का विरोध किया। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि इस मामले में पहले ही काफी न्यायिक समय लग चुका है और 25 से 30 जून तक की राहत देने में कोई बड़ी बात नहीं है।
जमानत की शर्तें
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 2 जून को मौजूदा अंतरिम जमानत समाप्त होने पर राशिद को सरेंडर करना होगा। इसके पश्चात 25 जून से 30 जून तक पुनः अंतरिम जमानत प्रभावी होगी। अदालत ने यह भी कहा कि नया निजी मुचलका अथवा नई जमानत राशि जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी और 18 मई के आदेश की समस्त शर्तें पूर्ववत लागू रहेंगी।
राशिद इंजीनियर को पहले मिली राहतें
यह पहली बार नहीं है जब राशिद इंजीनियर को न्यायिक राहत मिली है। इससे पूर्व उन्हें 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक संसद के पूरे सत्र में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। नवंबर 2025 में भी कोर्ट ने संसद सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति प्रदान की थी। इसके अलावा सितंबर 2025 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने की अनुमति भी उन्हें दी गई थी।
राशिद इंजीनियर कौन हैं
राशिद इंजीनियर जम्मू-कश्मीर के बारामूला लोकसभा क्षेत्र से निर्वाचित सांसद हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को लगभग एक लाख मतों के अंतर से पराजित किया था। वे टेरर फंडिंग के आरोप में NIA द्वारा गिरफ्तार किए गए हैं और फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
यह मामला न्यायपालिका, सुरक्षा एजेंसियों और संसदीय प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बना हुआ है। 30 जून के बाद राशिद की अगली न्यायिक सुनवाई की स्थिति पर सबकी नज़र रहेगी।