दिल्ली हाईकोर्ट ने बारामूला सांसद राशिद इंजीनियर को बीमार पिता से मिलने के लिए एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दी
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने 28 अप्रैल 2026 को बारामूला सांसद राशिद इंजीनियर को एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दी।
- जमानत बीमार पिता से मिलने के लिए दी गई; ₹1 लाख का निजी मुचलका और एक ज़मानतदार अनिवार्य।
- राशिद केवल पिता के अस्पताल या आवास तक सीमित रहेंगे; दो सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी हर समय साथ।
- केवल एक मोबाइल नंबर का उपयोग; NIA जाँच अधिकारी को नंबर देना अनिवार्य।
- NIA ने हिरासत में पैरोल की माँग की थी, किंतु न्यायालय ने अंतरिम जमानत उचित पाई।
- राशिद को इससे पहले जनवरी 2026 में संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए भी पैरोल मिल चुकी है।
नई दिल्ली: टेरर फंडिंग मामले में तिहाड़ जेल में बंद बारामूला के सांसद राशिद इंजीनियर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को एक सप्ताह की अंतरिम जमानत प्रदान की। यह राहत उन्हें अपने बीमार पिता से मिलने और उनकी देखभाल के लिए दी गई है। पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा पहले अंतरिम जमानत नामंज़ूर किए जाने के बाद राशिद ने उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था।
न्यायालय का आदेश और शर्तें
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने राशिद की याचिका स्वीकार करते हुए ₹1 लाख के निजी मुचलके और इतनी ही राशि का एक ज़मानतदार पेश करने पर रिहाई का निर्देश दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम जमानत कड़ी सुरक्षा शर्तों के साथ दी गई है।
खंडपीठ ने आदेश दिया कि जमानत अवधि के दौरान राशिद केवल उस अस्पताल में रहेंगे जहाँ उनके पिता का उपचार चल रहा है, अथवा उस आवास पर जहाँ उनके पिता निवास कर रहे हैं। इन परिसरों से बाहर जाने की उन्हें अनुमति नहीं होगी। साथ ही, कम से कम दो सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी हर समय उनके साथ तैनात रहेंगे।
मोबाइल और संपर्क पर प्रतिबंध
न्यायालय ने राशिद को केवल एक मोबाइल फोन नंबर का उपयोग करने का निर्देश दिया, जो राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के जाँच अधिकारी को उपलब्ध कराया जाएगा और हर समय चालू रखा जाएगा। उन्हें मामले से जुड़े किसी भी गवाह से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क करने, उन्हें प्रभावित करने या ऐसा प्रयास करने से भी पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, जमानत अवधि के दौरान केवल निकट परिवार के सदस्य ही राशिद से मिल सकते हैं — किसी भी अनावश्यक आगंतुक को अनुमति नहीं दी जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था का खर्च NIA वहन करेगी
दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत अवधि के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और एस्कॉर्ट कर्मियों का संपूर्ण खर्च NIA वहन करेगी। गौरतलब है कि राशिद की हिरासत में आवाजाही के खर्चों से जुड़े एक प्रश्न पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष नवंबर में विभाजित फैसला सुनाया था, जो अभी भी विचाराधीन है।
दोनों पक्षों के तर्क
राशिद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने तर्क दिया कि उनके पिता की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए तत्काल मानवीय सहायता आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि गवाहों को प्रभावित करने के आरोप निराधार हैं और NIA द्वारा इस्तेमाल की गई कुछ सामग्री शुरू में बचाव पक्ष को नहीं बताई गई थी।
वहीं, NIA की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने तर्क दिया कि गवाहों को प्रभावित करने के प्रयासों के संकेत देने वाले साक्ष्य मौजूद हैं और चल रहे मुकदमे में और हस्तक्षेप की आशंका है। NIA ने हिरासत में पैरोल की माँग की थी, किंतु न्यायालय ने कड़ी शर्तों के साथ अंतरिम जमानत देना उचित समझा।
पृष्ठभूमि और आगे की राह
राशिद इंजीनियर आतंकवाद-वित्तपोषण मामले में अभियोजन का सामना कर रहे हैं और इससे पहले भी उन्हें हिरासत में पैरोल दी जा चुकी है — जिसमें इसी वर्ष जनवरी में संसद के बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति भी शामिल है। न्यायमूर्ति सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की,