11 अगस्त 2026
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जी.वी. राजा स्टेडियम के कायाकल्प पर ₹100 करोड़ खर्च का प्रस्ताव, ओलंपिक-स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य

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जी.वी. राजा स्टेडियम के कायाकल्प पर ₹100 करोड़ खर्च का प्रस्ताव, ओलंपिक-स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य

सारांश

तिरुवनंतपुरम का 1937 में बना जी.वी. राजा स्टेडियम — जिसका सिंथेटिक ट्रैक जर्जर हो चुका है — अब ₹100 करोड़ के संभावित केंद्रीय अनुदान से ओलंपिक-स्तरीय वेन्यू बन सकता है। केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी की पहल और भारत की 2036 ओलंपिक बोली ने इस पुराने स्टेडियम को राष्ट्रीय खेल नक्शे पर ला खड़ा किया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने तिरुवनंतपुरम के जी.वी.
राजा स्टेडियम को ओलंपिक-स्तरीय बनाने की पहल शुरू की।
केंद्र सरकार स्टेडियम के पुनर्निर्माण के लिए ₹100 करोड़ उपलब्ध करा सकती है।
स्टेडियम का स्वामित्व और संचालन केरल विश्वविद्यालय के पास है; विश्वविद्यालय जल्द मास्टर प्लान तैयार करेगी।
राजा स्टेडियम का निर्माण 1937 में हुआ था और इसका सिंथेटिक ट्रैक व अन्य सुविधाएँ वर्तमान में जर्जर हालत में हैं।
यह प्रस्ताव भारत की 2036 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी की बोली की पृष्ठभूमि में आया है; IOC 2029 तक मेजबान चुन सकती है।

तिरुवनंतपुरम के ऐतिहासिक जी.वी. राजा स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक आयोजनों के योग्य बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से ₹100 करोड़ की संभावित फंडिंग का प्रस्ताव सामने आया है। केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने केरल विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक और स्टेडियम के दौरे के बाद इस पहल को औपचारिक आकार देने की प्रक्रिया शुरू की है। यह कदम 2036 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की आधिकारिक बोली की पृष्ठभूमि में उठाया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

सुरेश गोपी ने केरल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मोहनन कुन्नुमल के साथ स्टेडियम का निरीक्षण किया। इस बैठक में विश्वविद्यालय सिंडिकेट के वित्तीय सदस्य आर.एस. शशिकुमार भी शामिल थे। गोपी ने बातचीत में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार इस स्टेडियम के पुनर्निर्माण के लिए ₹100 करोड़ उपलब्ध करा सकती है।

गोपी के अनुसार, 'अधिकारियों के साथ बातचीत हो चुकी है और अब स्टेडियम के प्रस्तावित बड़े बदलाव को आकार देने के लिए कदम उठाए जाएंगे, जिसका मालिकाना हक और संचालन केरल विश्वविद्यालय के पास है।'

स्टेडियम की मौजूदा स्थिति

जी.वी. राजा स्टेडियम का निर्माण 1937 में हुआ था और इसका नाम केरल के खेल आंदोलन के पुरोधा कर्नल गोदावर्मा राजा के नाम पर रखा गया है। यह स्टेडियम अब तक एक अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट मैच की मेजबानी कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद वैश्विक खेल आयोजनों में इसे नजरअंदाज किया जाता रहा है। फिलहाल स्टेडियम का सिंथेटिक ट्रैक और अन्य बुनियादी सुविधाएँ जर्जर अवस्था में हैं, जो इसे अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स आयोजनों के लिए अनुपयुक्त बनाती हैं।

ओलंपिक बोली से जुड़ाव

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत ने 2036 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी के लिए अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के समक्ष आधिकारिक आवेदन दाखिल किया है। भारत सरकार की प्राथमिक योजना गुजरात के अहमदाबाद में ओलंपिक आयोजित करने की है, और IOC 2029 तक मेजबान शहर का चयन कर सकती है। ऐसे में तिरुवनंतपुरम के स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स वेन्यू के रूप में विकसित करना भारत की व्यापक ओलंपिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।

आगे की योजना

शशिकुमार ने बताया, 'केरल विश्वविद्यालय जल्द ही स्टेडियम के व्यापक नवीनीकरण के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करेगी। गोपी के सकारात्मक रुख को देखते हुए हमें उम्मीद है कि यह स्टेडियम एक विश्व-स्तरीय खेल केंद्र में तब्दील होगा।' विश्वविद्यालय से अगले चरण में एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और मास्टर प्लान प्रस्तुत करने की अपेक्षा है, जिसके बाद केंद्रीय फंडिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

गौरतलब है कि तिरुवनंतपुरम के सांसद के रूप में सुरेश गोपी लंबे समय से इस शहर के खेल अवसंरचना को उन्नत करने की पैरवी करते रहे हैं। यदि यह प्रस्ताव मूर्त रूप लेता है, तो केरल के पास एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स वेन्यू होगा, जो दक्षिण भारत में खेल पर्यटन को नई गति दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न DPR तैयार हुई है। भारत की 2036 ओलंपिक बोली में अहमदाबाद केंद्रीय भूमिका में है, ऐसे में तिरुवनंतपुरम को 'ओलंपिक-स्तरीय' बताना अभी आकांक्षा है, तथ्य नहीं। असली सवाल यह है कि क्या केरल विश्वविद्यालय — जो मुख्यतः एक शैक्षणिक संस्था है — इतनी बड़ी खेल अवसंरचना परियोजना को क्रियान्वित करने की स्थिति में है। बिना स्वतंत्र तकनीकी मूल्यांकन और स्पष्ट समयसीमा के, यह घोषणा राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन अधिक लगती है, ठोस योजना कम।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जी.वी. राजा स्टेडियम के पुनर्निर्माण के लिए कितना पैसा खर्च होगा?
केंद्र सरकार की ओर से ₹100 करोड़ उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने केरल विश्वविद्यालय के अधिकारियों को यह जानकारी दी, हालांकि अभी तक बजट आवंटन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
जी.वी. राजा स्टेडियम का मालिक कौन है?
जी.वी. राजा स्टेडियम का स्वामित्व और संचालन केरल विश्वविद्यालय के पास है। स्टेडियम तिरुवनंतपुरम में स्थित है और इसका नाम केरल के खेल अभियान के पुरोधा कर्नल गोदावर्मा राजा के नाम पर है।
इस स्टेडियम को ओलंपिक-स्तरीय बनाने की ज़रूरत क्यों है?
भारत ने 2036 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी के लिए आधिकारिक आवेदन किया है और IOC 2029 तक मेजबान चुन सकती है। जी.वी. राजा स्टेडियम का सिंथेटिक ट्रैक और अन्य सुविधाएँ जर्जर हालत में हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स मानकों के अनुरूप बनाना ज़रूरी है।
स्टेडियम के नवीनीकरण की अगली प्रक्रिया क्या होगी?
केरल विश्वविद्यालय जल्द ही एक विस्तृत मास्टर प्लान और परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगी। इसके बाद केंद्रीय फंडिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
सुरेश गोपी की इस पहल में क्या भूमिका है?
केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी , जो तिरुवनंतपुरम के सांसद भी हैं, ने केरल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मोहनन कुन्नुमल और वित्तीय सदस्य आर.एस. शशिकुमार के साथ स्टेडियम का दौरा किया और केंद्रीय फंडिंग की संभावना से अवगत कराया।
राष्ट्र प्रेस
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