खाड़ी और ब्लैक सी हमलों की निंदा: भारत-लाइबेरिया ने GOF S4 के ज़रिए समुद्री सुरक्षा का किया आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
भारत और लाइबेरिया ने 9 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में खाड़ी क्षेत्र और ब्लैक सी में वाणिज्यिक जहाजों तथा नाविकों पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की। दोनों देश मिलकर ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स (GOF S4) का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य नाविकों और वाणिज्यिक जहाजरानी की सुरक्षा को वैश्विक विमर्श के केंद्र में लाना है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
GOF S4 क्या है और इसकी स्थापना कैसे हुई
भारत और लाइबेरिया ने 25 सितंबर 2026 को GOF S4 की औपचारिक शुरुआत की थी। इस समूह की पहली बैठक हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बायसोलो न्यान्टी ने संयुक्त रूप से की। इस बैठक में कुल 25 देशों ने भागीदारी की।
यह समूह उन देशों और हितधारकों को एक साझा मंच पर लाने के लिए बनाया गया है जो वाणिज्यिक जहाजरानी एवं समुद्री उद्योग से जुड़े हैं — विशेष रूप से वे देश जो समुद्री सेवाएँ प्रदान करते हैं या जहाँ बड़ी संख्या में नाविक समुदाय निवास करता है।
मुख्य घटनाक्रम: संयुक्त राष्ट्र में निंदा
संयुक्त राष्ट्र में भारत और लाइबेरिया के स्थायी मिशनों ने गुरुवार को जारी संयुक्त बयान में कहा कि खाड़ी क्षेत्र, उसके आसपास के इलाकों और ब्लैक सी में हाल के दिनों में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हुए हमले 'अस्वीकार्य' हैं। बयान में कहा गया, 'समुद्री व्यापार को बाधित करने और निर्दोष लोगों की जान लेने वाली ऐसी कार्रवाइयों का कोई औचित्य नहीं है।'
संयुक्त बयान में उन नाविकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई जिन्होंने अपनी जान गंवाई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की गई।
सरकार की प्रतिक्रिया
नई दिल्ली में आयोजित विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस वार्ता में मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'विचार यह है कि सभी को एक साथ लाया जाए ताकि हमारे नाविकों की सुरक्षा और वाणिज्यिक जहाजरानी की सुरक्षा के मुद्दे को वैश्विक चर्चा के केंद्र में रखा जा सके। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अभियानों को मजबूत किया जा सके ताकि वाणिज्यिक जहाजरानी प्रभावित न हो, उन पर हमले न हों और नाविक सुरक्षित रहें।'
दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि वे ऐसे हमलों की पुनरावृत्ति रोकने और नाविकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बेहतर अंतरराष्ट्रीय समन्वय का समर्थन करने को तत्पर हैं।
आम जनता और व्यापार पर असर
गौरतलब है कि खाड़ी और ब्लैक सी मार्गों से होकर विश्व के एक बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार संचालित होता है। भारत एक प्रमुख नाविक-आपूर्तिकर्ता देश है और लाखों भारतीय नागरिक वैश्विक व्यापारिक बेड़े में कार्यरत हैं। इन मार्गों पर हमलों का सीधा असर न केवल जहाज़ी सुरक्षा पर, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार लागत पर भी पड़ता है।
यह ऐसे समय में आया है जब लाल सागर और आसपास के समुद्री गलियारों में हमलों की घटनाएँ वैश्विक शिपिंग उद्योग के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।
क्या होगा आगे
GOF S4 के गठन के बाद भारत और लाइबेरिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य देशों को इस समूह से जोड़ने के प्रयास में लगे हैं। 25 देशों की प्रारंभिक भागीदारी इस पहल को व्यापक समर्थन दिलाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। आने वाले महीनों में समूह की अगली बैठक और ठोस कार्य-योजना की घोषणा अपेक्षित है।