पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा के लिए निगरानी और तैयारी को बढ़ाया गया

Click to start listening
पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा के लिए निगरानी और तैयारी को बढ़ाया गया

सारांश

पश्चिम एशिया में बदलते समुद्री हालात को देखते हुए भारत सरकार ने निगरानी और तैयारी को मजबूत किया है। भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने कई उपाय किए हैं। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के बारे में।

Key Takeaways

पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा के लिए निगरानी और तैयारी को मजबूत किया गया। भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन की स्थापना की गई। सभी भारतीय झंडे वाले जहाज सुरक्षित हैं। मंत्रालय ने व्यापार संगठनों के साथ समन्वय किया। समुद्री व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में बदलते समुद्री हालात के संदर्भ में निगरानी और तैयारी के उपायों को और अधिक सुदृढ़ किया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, भारतीय जहाजों को सुरक्षित रखना और समुद्री व्यापार को निर्बाध रूप से जारी रखना है। इन परिवर्तित परिस्थितियों की समीक्षा के लिए मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित की गई।

बैठक में विदेश मंत्रालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ-साथ शिपिंग उद्योग और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, भारतीय राष्ट्रीय शिपओनर्स एसोसिएशन, कंटेनर शिपिंग लाइन एसोसिएशन और फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस जैसे व्यापार संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

यह बैठक केंद्रीय पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा पहले की गई समीक्षा के संदर्भ में हुई। मंत्रालय ने सभी हितधारकों को मध्य पूर्व में बदलते हालात के बाद भारत सरकार, विशेष रूप से पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी प्रदान की। मंत्रालय शिपिंग उद्योग के साथ सक्रिय समन्वय कर रहा है। नाविकों को बेहतर सहायता प्रदान करने और समन्वय को सरल बनाने के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग में 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन स्थापित की गई है। इसके अलावा, मंत्रालय ने एक विशेष निगरानी प्रणाली भी बनाई है, जिससे हालात पर निरंतर नजर रखी जा रही है। भारतीय नाविकों, भारतीय झंडे वाले जहाजों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए सावधानियाँ 28 फरवरी 2026 के डीजीएस सर्कुलर नंबर 08 ऑफ 2026 के माध्यम से जारी की गई हैं। इसमें सभी भारतीय झंडे वाले जहाजों और भारतीय नाविकों को बेहतर सुरक्षा उपाय अपनाने और डीजीएस सर्कुलर 08 ऑफ 2024 के तहत रिपोर्टिंग नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, 28 फरवरी 2026 के डीजीएस सर्कुलर नंबर 09 ऑफ 2026 के जरिए क्रू सेफ्टी एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें भारतीय नाविकों और शिपिंग हितधारकों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं, जैसे तेहरान में भारतीय दूतावास के साथ रजिस्ट्रेशन कराना और डायरेक्टरेट को क्रू की पूरी जानकारी जमा करना। वर्तमान में सभी भारतीय झंडे वाले जहाज सुरक्षित हैं। किसी भी भारतीय झंडे वाले जहाज के रोकने, चढ़ाई करने या किसी हादसे की कोई पुष्ट सूचना नहीं मिली है। फारस की खाड़ी क्षेत्र में कुल 35 भारतीय झंडे वाले जहाज (होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 24 और पूर्व में 11 जहाज, साथ ही ओमान की खाड़ी और आसपास के इलाके) और अदन की खाड़ी में 3 जहाजों को एलआरआईटी नेशनल डेटा सेंटर के जरिए हर घंटे ट्रैक किया जा रहा है। इनकी नियमित स्थिति रिपोर्ट भी जारी की जा रही है।

पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के माध्यम से बड़े भारतीय पोर्ट्स, समुद्री प्राधिकरणों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति पर बेहद करीबी नजर रख रहा है। भारतीय नाविकों को ले जाने वाले भारतीय झंडे वाले जहाजों के अलावा विदेशी झंडे वाले जहाजों के लिए भी बेहतर निगरानी और रिपोर्टिंग की व्यवस्था शुरू की गई है। इससे स्थिति की ताजा जानकारी मिलती रहती है और आवश्यक तैयारी पूरी की जा सकती है। शिपिंग कंपनियों, जहाज संचालकों और रिक्रूटमेंट एवं प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंसी को सलाह दी गई है कि वे संवेदनशील इलाकों में नाविकों को भेजते समय पूरी सावधानी बरतें। यात्रा से पहले जोखिम का आकलन करें और नाविकों तथा उनके परिवारों से नियमित संपर्क बनाए रखें। आवश्यकता पड़ने पर भारतीय नाविकों को तुरंत मदद पहुंचाने के लिए विशेष समन्वय व्यवस्था भी तैयार की गई है।

मंत्रालय ने खाड़ी सहयोग परिषद और पश्चिम एशिया के अन्य गंतव्यों पर जाने वाले जहाजों तथा माल की स्थिति की भी समीक्षा की है। पूरे भारत में पोर्ट्स का संचालन सामान्य रूप से चल रहा है। सभी पोर्ट्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्यातकों को होने वाली किसी भी परेशानी को कम करें और आयात-निर्यात व्यापार को बिना किसी रुकावट के जारी रखने में पूरी मदद करें। बड़े पोर्ट्स ने कई व्यावहारिक कदम उठाए हैं। इनमें शिपिंग लाइनों और जहाज एजेंट्स के साथ मिलकर जहाजों की आवाजाही की लगातार निगरानी, इलाके में हो रहे बदलावों का तुरंत आकलन और जहाजों तथा माल की स्थिति की नियमित रिपोर्टिंग शामिल है। जहां आवश्यकता पड़ी है, वहां अतिरिक्त भंडारण स्थान की व्यवस्था की गई है। ठंडा रखने वाले माल और जल्दी खराब होने वाले सामान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आवश्यक होने पर इन्हें प्राथमिकता से हैंडल किया जा सके। मंत्रालय भारतीय समुद्री हितों की रक्षा करने, नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और समुद्री व्यापार तथा लॉजिस्टिक्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी समुद्री हितधारकों और भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर स्थिति पर बारीकी से नजर रखना जारी रखेगा।

Point of View

जिसमें पश्चिम एशिया में बदलते समुद्री हालात के मद्देनजर सुरक्षा और निगरानी को प्राथमिकता दी गई है। यह कदम भारतीय समुद्री हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

पश्चिम एशिया में समुद्री हालात क्यों बदले हैं?
पश्चिम एशिया में राजनीतिक और आर्थिक कारकों के कारण समुद्री हालात में परिवर्तन हुआ है, जिससे सुरक्षा के नए उपायों की आवश्यकता पड़ी।
भारत सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
भारत सरकार ने निगरानी और तैयारी को मजबूत करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की और हेल्पलाइन और निगरानी प्रणाली स्थापित की।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के तहत हेल्पलाइन और सुरक्षा उपायों को लागू किया गया है।
क्या भारतीय जहाज सुरक्षित हैं?
हाँ, वर्तमान में सभी भारतीय झंडे वाले जहाज सुरक्षित हैं।
हेल्पलाइन का उद्देश्य क्या है?
हेल्पलाइन का उद्देश्य नाविकों को 24 घंटे सहायता प्रदान करना और समन्वय को सरल बनाना है।
Nation Press