तीन भारतीय नाविकों की मौत: कांग्रेस ने जयशंकर के 'कमज़ोर' जवाब पर उठाए सवाल, अमेरिका को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस ने रविवार, 14 जून 2026 को ओमान तट के पास अमेरिकी नौसेना के हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया को 'कमज़ोर' करार देते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर पर निशाना साधा। पार्टी का आरोप है कि जयशंकर अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो के साथ बातचीत में भारत की स्थिति को पर्याप्त दृढ़ता से नहीं रख सके।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का कड़ा बयान
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इस घटना को 'बहुत बुरा' बताते हुए कहा, "यह भारत की चिंताओं के प्रति गहरी असंवेदनशीलता को दिखाता है। इसमें कोई अफसोस, पछतावा या हमदर्दी नहीं है। असल में, एक साफ संदेश दिया गया है कि जो कोई भी होर्मुज में अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करेगा, उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।" उन्होंने यह भी कहा कि कथित तौर पर जिस टैंकर पर हमला हुआ, वह अमेरिकी प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहा था।
तिवारी ने आगे कहा, "भारत ने अमेरिकी एयरस्ट्राइक में तीन भारतीय नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता जताई थी। ऐसा नहीं लगता कि अमेरिकी सरकार ने भारत की आलोचना को दर्ज किया है।" उनके अनुसार, विदेश मंत्री जयशंकर को अमेरिकी सरकार के इस बर्ताव का कहीं अधिक कड़ा विरोध करना चाहिए था।
पवन खेड़ा ने भी जताई आपत्ति
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी अमेरिकी हमले और उस पर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा, "एस. जयशंकर ने बहुत हल्के शब्दों का इस्तेमाल किया और हमारी बात को मज़बूती से नहीं रखा। हमने अपने तीन नागरिकों की जान गंवाई।"
खेड़ा ने यह भी कहा, "इसके बाद भी एस. जयशंकर की तरफ से निंदा का एक भी शब्द नहीं आया, न ही अमेरिका पर माफी माँगने का कोई दबाव था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक संदेश भी जारी नहीं किया। असल में, यह अमेरिका ही है जो हमें डांट रहा है।" उन्होंने 1949 के जिनेवा कन्वेंशन का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी व्यावसायिक जहाज़ पर इस तरह हमला नहीं किया जा सकता।
जयशंकर ने एक्स पर दर्ज कराया विरोध
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्होंने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो से बातचीत में खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमलों पर भारत का कड़ा विरोध दोहराया, जिनमें तीन भारतीय नाविक मारे गए। उन्होंने कहा, "कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ ऐसी जानलेवा कार्रवाई सही नहीं है।" यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापारिक तनाव पहले से ही बना हुआ है।
विदेश मंत्रालय ने तलब किया अमेरिकी अधिकारी
गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने भारत में अमेरिका के चार्ज डी'अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब किया था और औपचारिक विरोध दर्ज कराया था। आलोचकों का कहना है कि इस कूटनीतिक कदम के बावजूद वाशिंगटन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया या खेद नहीं आया है।
यह घटना भारत की उस बहुप्रतीक्षित स्वतंत्र विदेश नीति की परीक्षा है जिसे सरकार 'रणनीतिक स्वायत्तता' कहती है — और विपक्ष के अनुसार, यह परीक्षा अभी तक उत्तीर्ण नहीं हुई है।