19 सितंबर 2026
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UNSC में भारत की दो-टूक: 'शिपिंग को भू-राजनीतिक तनाव का शिकार न बनाएं', होर्मुज संकट पर सख्त रुख

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UNSC में भारत की दो-टूक: 'शिपिंग को भू-राजनीतिक तनाव का शिकार न बनाएं', होर्मुज संकट पर सख्त रुख

सारांश

होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने नाविकों की मौत और जहाजों पर हमलों के बाद भारत ने UNSC में दो-टूक कहा — शिपिंग भू-राजनीतिक शतरंज का मोहरा नहीं बन सकती। ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के ज़रिए 449 से अधिक जहाजों को सुरक्षित गुज़ारने वाला भारत अब वैश्विक समुद्री शासन में केंद्रीय किरदार बनने की दिशा में बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

हरीश ने 19 सितंबर 2026 को UNSC की अनौपचारिक बैठक में कहा कि व्यावसायिक समुद्री आवाजाही को भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बनना चाहिए।
अप्रैल 2026 में IRGC की गनबोट्स ने दो भारतीय-ध्वज टैंकरों पर गोलियाँ चलाईं; जुलाई 2026 में ईरानी हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हुई।
जून 2026 में भारत ने अमेरिका के सामने भी विरोध दर्ज कराया जब अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए।
भारतीय नौसेना के 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' के तहत 449 से अधिक जहाज और 8.4 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का कार्गो सुरक्षित गुज़रा।
संघर्ष में शामिल दोनों पक्षों की नाकेबंदी के कारण सैकड़ों भारतीय नाविक होर्मुज में जहाजों पर फँसे हैं।
हरीश ने ड्रोन हमलों, साइबर जोखिम और नेविगेशन बाधाओं जैसे उभरते समुद्री खतरों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की माँग की।

भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 19 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक अनौपचारिक बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि व्यावसायिक समुद्री आवाजाही को 'भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बनना चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे टकरावों की वजह से भारतीय जहाजों, नाविकों और ऊर्जा आपूर्ति को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

मुख्य बयान और भारत का पक्ष

हरीश ने सुरक्षा परिषद में कहा, 'नेविगेशन के अधिकारों पर जबरदस्ती, धमकियों, गैर-कानूनी प्रतिबंधों या मनमाने दखल का असर नहीं पड़ना चाहिए।' उन्होंने आगे जोड़ा कि भारत एक प्रमुख समुद्री देश है और वह एक ऐसे समुद्री क्षेत्र का पुरजोर समर्थन करता है जो 'आज़ाद, खुला, सुरक्षित और नियम-आधारित' हो। यह बयान बहरीन की ओर से बुलाई गई 'आरिया-फॉर्मूला' बैठक में दिया गया, जो समुद्री सुरक्षा की मौजूदा स्थिति पर विचार करने के लिए आयोजित की गई थी।

गौरतलब है कि 'आरिया-फॉर्मूला' बैठकें सुरक्षा परिषद की औपचारिक प्रक्रिया से इतर होती हैं और इन्हें 1992 में वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो आरिया ने शुरू किया था। ये बैठकें संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर चर्चा का मंच देती हैं।

भारतीय नाविकों पर हुए हमले और राजनयिक विरोध

अप्रैल 2026 में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गनबोट्स ने भारतीय झंडे वाले दो टैंकरों पर चेतावनी के तौर पर गोलियाँ चलाईं। जुलाई 2026 में संयुक्त अरब अमीरात में पंजीकृत दो जहाजों पर ईरानी हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया।

भारत ने नई दिल्ली में ईरानी राजनयिकों के सामने दोनों घटनाओं का कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके अलावा, जून 2026 में भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख (चार्ज डी'अफेयर्स) को बुलाकर तीन भारतीय नाविकों की मौत पर विरोध जताया, जब अमेरिका ने उनके पलाऊ-पंजीकृत जहाज पर हमला किया था। हरीश ने बैठक में किसी भी देश का नाम लिए बिना इन घटनाओं का उल्लेख किया।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट से तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया। हरीश ने कहा कि खाड़ी और पश्चिम एशिया में आई व्यवधानों का 'ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मामले में दुनिया भर के क्षेत्रों पर असर पड़ता है।' संघर्ष में शामिल दोनों पक्षों की नाकेबंदी के कारण सैकड़ों भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर फँसे हुए हैं।

भारतीय नौसेना का 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा'

हरीश के अनुसार भारत इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से अपनी नौसेना तैनात कर रहा है। मार्च 2026 में भारतीय नौसेना ने पश्चिमी अरब सागर में 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' शुरू किया, जिसमें 11 जहाज तैनात किए गए। सोमवार तक भारतीय सुरक्षा अभियानों की मदद से 449 से अधिक व्यावसायिक जहाज — जिनमें लगभग 2.03 करोड़ टन कार्गो या 8.4 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का तेल था — अदन की खाड़ी और लाल सागर से सुरक्षित गुजर चुके थे।

लाल सागर में रुकावटें हूथी मिलिशिया द्वारा पैदा की जा रही हैं, जो ईरान से जुड़ा यमन का एक विद्रोही समूह है।

नए खतरे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की माँग

हरीश ने तकनीकी विकास से उभरते नए समुद्री खतरों पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि भारत 'बिना चालक दल वाले सिस्टम से हमले, साइबर जोखिम और नेविगेशन व संचार में बाधा डालने' जैसी चुनौतियों से निपटने के बढ़ते महत्व को पहचानता है। उनका कहना था कि इन चुनौतियों से निपटने में 'अंतरराष्ट्रीय सहयोग, क्षमता निर्माण और तकनीक का ज़िम्मेदार उपयोग' निर्णायक भूमिका निभाएगा। नाविकों की सुरक्षा, समय पर निकासी, चिकित्सा सहायता और स्वदेश वापसी के लिए प्रभावी अंतरराष्ट्रीय तंत्र की माँग करते हुए उन्होंने कहा कि नाविक 'हमारी सामूहिक कोशिशों के केंद्र में होने चाहिए।' इस बयान के साथ भारत ने वैश्विक समुद्री शासन में अपनी सक्रिय भागीदारी और जवाबदेही की माँग को और मज़बूत किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब नामहीन विरोध की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा भारत की बढ़ती नौसैनिक क्षमता का प्रमाण है, लेकिन होर्मुज में फँसे सैकड़ों नाविकों की मुक्ति के लिए ऑपरेशनल ताकत के साथ-साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति और सीधी द्विपक्षीय दबाव की भी ज़रूरत है, जो अभी स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UNSC में भारत ने शिपिंग को लेकर क्या कहा?
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 19 सितंबर 2026 को सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि व्यावसायिक समुद्री आवाजाही को भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बनना चाहिए और नेविगेशन के अधिकारों पर किसी भी जबरदस्ती या गैर-कानूनी दखल का असर नहीं पड़ना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों पर क्या हुआ?
अप्रैल 2026 में IRGC की गनबोट्स ने दो भारतीय-ध्वज टैंकरों पर गोलियाँ चलाईं। जुलाई 2026 में ईरानी हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हुई और एक घायल हुआ। जून 2026 में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए, जिस पर भारत ने अमेरिकी दूतावास में कड़ा विरोध दर्ज कराया।
'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' क्या है?
यह भारतीय नौसेना द्वारा मार्च 2026 में शुरू किया गया एक समुद्री सुरक्षा अभियान है, जिसमें पश्चिमी अरब सागर में 11 जहाज तैनात किए गए। इस अभियान की मदद से सोमवार तक 449 से अधिक व्यावसायिक जहाज अदन की खाड़ी और लाल सागर से सुरक्षित गुज़रे, जिनमें 8.4 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का तेल था।
होर्मुज संकट का भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर क्या असर पड़ा?
होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट से भारत की तेल और गैस आपूर्ति बाधित हुई और वैश्विक पेट्रोलियम कीमतों में भारी उछाल आया। पी. हरीश ने कहा कि खाड़ी और पश्चिम एशिया की इन व्यवधानों का ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मामले में दुनिया भर के क्षेत्रों पर असर पड़ता है।
लाल सागर में व्यवधानों के लिए कौन जिम्मेदार है?
लाल सागर में रुकावटें मुख्य रूप से हूथी मिलिशिया द्वारा पैदा की जा रही हैं, जो ईरान से जुड़ा यमन का एक विद्रोही समूह है। होर्मुज जलडमरूमध्य में टकराव में ईरान और अमेरिका दोनों शामिल रहे हैं, जिनके हमलों में भारतीय नाविकों की जानें गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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