पाकिस्तानी हवाई हमलों में अफगान नागरिकों की मौत, अमेरिका से जवाबदेही की अपील
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (यूएनएएमए) के अनुसार, पाकिस्तान ने करीब एक महीने की अपेक्षाकृत शांति के बाद अफगानिस्तान में नए हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 13 नागरिक मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। अमेरिकी ऑनलाइन पत्रिका रिस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट की एक रिपोर्ट में वाशिंगटन से अपील की गई है कि वह इस्लामाबाद को इन हमलों के लिए जवाबदेह ठहराए और मासूम अफगान नागरिकों की मौत की स्वतंत्र जाँच कराए।
हमलों का ब्यौरा और पाकिस्तान का दावा
इस्लामाबाद ने इन हवाई हमलों की पुष्टि करते हुए दावा किया कि उनका निशाना तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकाने थे और इनमें 26 टीटीपी लड़ाके मारे गए। हालाँकि, रिपोर्ट के अनुसार, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने ऐसे दावे किए हों — इससे पहले भी वह अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया।
काबुल के पुनर्वास केंद्र पर हमले का संदर्भ
गौरतलब है कि मार्च में पाकिस्तानी हवाई हमलों ने काबुल स्थित ओमिद ड्रग पुनर्वास केंद्र को निशाना बनाया था, जिसमें यूएनएएमए के अनुसार करीब 143 लोग मारे गए थे। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिका की ओर से इन हमलों की केवल नाममात्र की आलोचना हुई। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध और प्रगाढ़ हुए हैं।
पीड़ितों की आपबीती
अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के निवासी हाजी हाफिजुल्लाह ने बताया कि हमलों के बाद उन्होंने अपने बेटे और अन्य ग्रामीणों के साथ पूरी रात मलबे से शव निकालने में बिताई। उन्होंने कहा, 'एक परिवार ने अपने सात बच्चों को खो दिया। उनकी उम्र तीन से 15 साल के बीच थी। उसी परिवार की एक महिला और एक पुरुष की भी मौत हो गई। वे सभी सो रहे थे। उनका किसी भी संगठन से कोई संबंध नहीं था — वे लड़ाके नहीं, बल्कि साधारण और गरीब लोग थे।'
खोस्त के एक अन्य निवासी इस्मतुल्लाह ने पाकिस्तान के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, 'पाकिस्तान कहता है कि वह आतंकवादियों से लड़ रहा है, तो फिर आज हमने बच्चों को क्यों दफनाया? अगर ये बच्चे आतंकवादी थे तो उनकी बंदूकें दिखाइए, उनका अपराध बताइए। उनका एकमात्र अपराध यह था कि वे अफगान थे, गरीब थे और उस सीमा के पास सो रहे थे, जिस पर पाकिस्तान जब चाहे बमबारी करने का अधिकार समझता है।'
रिपोर्ट की मुख्य माँगें
रिस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट की रिपोर्ट में वाशिंगटन से तीन स्पष्ट माँगें की गई हैं: पहली, इस्लामाबाद से उसके दावों के समर्थन में सबूत माँगे जाएँ; दूसरी, हमलों में हुई मौतों की स्वतंत्र जाँच कराई जाए; और तीसरी, यह स्पष्ट किया जाए कि आतंकवाद-रोधी अभियान के नाम पर मासूम नागरिकों को मारना स्वीकार्य नहीं है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि टीटीपी को लेकर पाकिस्तान की नाराजगी उसे खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों के ग्रामीणों को निशाना बनाने का अधिकार नहीं देती।
आगे क्या होगा
इस्मतुल्लाह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा, 'हम दुनिया से हमारे लिए लड़ने की माँग नहीं कर रहे, हम केवल सच बोलने की अपील कर रहे हैं। खोस्त या पक्तिका में मारा गया बच्चा और माँ भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यदि मानवाधिकार वास्तव में मायने रखते हैं, तो उन्हें अफगान लोगों के लिए भी मायने रखना चाहिए।' अफगान नागरिकों की मौत को 'सामान्य पृष्ठभूमि की घटना' की तरह नजरअंदाज न करने की यह अपील अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गूँजने लगी है।