पाकिस्तानी हवाई हमलों में अफगानिस्तान के 800 से अधिक नागरिक मारे गए, फरवरी से जारी है बमबारी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तानी वायुसेना के हवाई हमलों में फरवरी 2026 से अब तक अफगानिस्तान के 800 से अधिक नागरिक मारे जा चुके हैं और बड़ी संख्या में आम अफगानी घायल हुए हैं। अफगान मीडिया आउटलेट टोलो न्यूज़ सहित विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में इन हमलों की व्यापक तबाही का ब्यौरा सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समुदाय में गहरी चिंता पैदा कर दी है।
कौन-से प्रांत हुए प्रभावित
टोलो न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार ये हमले अफगानिस्तान के कई प्रांतों — खोस्त, पक्तिया, पक्तिका, कुनार, काबुल, नंगरहार और कंधार — में किए गए। इन हमलों में केवल संदिग्ध आतंकी ठिकाने ही नहीं, बल्कि आम लोगों के आवास, अस्पताल, स्कूल और विश्वविद्यालय जैसे नागरिक बुनियादी ढाँचे को भी निशाना बनाया गया।
मुख्य घटनाक्रम: तारीखवार हमले
21 फरवरी को पक्तिका, नंगरहार और खोस्त में हुए हवाई हमलों में 18 लोगों की मौत हुई, जिनमें 11 बच्चे शामिल थे। इसके बाद 16 मार्च को काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए हमले में 400 से अधिक लोगों की मौत और 260 से अधिक के घायल होने का दावा किया गया है — यह इस पूरी अवधि की सबसे भयावह घटना है।
27 अप्रैल को कुनार प्रांत स्थित सैयद जमालुद्दीन अफगानी विश्वविद्यालय पर हुए हमले में लगभग 30 छात्र और शिक्षक घायल हुए। 10 जून को खोस्त, कुनार और पक्तिका में हुए हवाई हमलों में 13 लोगों की मौत की पुष्टि की गई।
सबसे हालिया हमला 28 जून की रात पक्तिया, पक्तिका और कुनार में हुआ, जिसमें 36 नागरिकों की मौत और 163 लोगों के घायल होने की पुष्टि तालिबान के उप-प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने की है।
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषक अख्तर मोहम्मद रसिख ने टोलो न्यूज़ से कहा, 'पाकिस्तान की सेना, खुफिया एजेंसियाँ और राजनीतिक नेतृत्व अफगानिस्तान को अस्थिर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसका परिणाम अफगानों की मौत, देश में असुरक्षा, अफगानिस्तान को पाकिस्तान का प्रभाव क्षेत्र बनाने और डूरंड लाइन को आधिकारिक सीमा के रूप में स्थापित करने की कोशिश है।'
सैन्य विश्लेषक सादिक शिनवारी ने कहा, 'पाकिस्तान के लगातार हवाई हमले, जिनमें रविवार के हमले भी शामिल हैं, अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का स्पष्ट उल्लंघन हैं। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों की मौत हुई है, और इनका कोई औचित्य नहीं है।'
कई विश्लेषकों ने इन हमलों और कथित तौर पर नागरिकों को निशाना बनाने को 'युद्ध अपराध' बताया है तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से स्वतंत्र जाँच की माँग की है।
पाकिस्तान का पक्ष
इस्लामाबाद कथित तौर पर अफगानिस्तान में सक्रिय उग्रवादी समूहों की मौजूदगी को सीमा पार हमलों का आधार बताता रहा है। हालाँकि रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के भीतर भी आईएसआईएस से जुड़े आतंकी ठिकाने सक्रिय बताए जाते हैं, जो इस तर्क को जटिल बनाता है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान शासन और पाकिस्तान के बीच संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से जाँच की माँग बढ़ती जा रही है और इन हमलों को लेकर वैश्विक दबाव में वृद्धि की संभावना है।