पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में अफगानिस्तान के तीन प्रांतों में दर्जनों नागरिक मारे गए, पूर्व अमेरिकी राजदूत ने उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने 29 जून 2026 को दावा किया कि पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के पक्तिका, पक्तिया और कुनार प्रांतों के रिहायशी इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें महिलाओं और बच्चों सहित दर्जनों नागरिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। यह हमले रविवार की रात को अंजाम दिए गए, और इन्हें तालिबान प्रशासन ने ‘कायरतापूर्ण आक्रामण’ करार दिया है।
हमलों का विवरण और प्रभावित क्षेत्र
मुजाहिद के अनुसार, यह हवाई हमले पक्तिका प्रांत के गयान जिले, पक्तिया प्रांत के त्सामकानी जिले और कुनार प्रांत के मानोगाई जिले में किए गए। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “पिछली रात पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के गयान जिले, पक्तिया प्रांत के त्सामकानी जिले और कुनार प्रांत के मानोगाई जिले के नागरिक इलाकों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कई नागरिक मारे गए और घायल हुए। हम इस कायर आक्रमण की कड़ी निंदा करते हैं और इसे अपराध तथा क्रूरता मानते हैं।”
पूर्व अमेरिकी राजदूत की कड़ी आलोचना
अफगानिस्तान में अमेरिका के पूर्व राजदूत जल्मय खलीलजाद ने इन हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अंतरराष्ट्रीय अपीलों को नजरअंदाज करते हुए एक बार फिर सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना। उन्होंने एक्स पर लिखा, “दुनिया भर और पाकिस्तान के कई लोगों द्वारा बातचीत के जरिए पड़ोसी देश के साथ मतभेद सुलझाने की अपीलों को नजरअंदाज करते हुए पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान पर हमला किया है, जिससे कई लोग मारे गए और घायल हुए हैं।”
खलीलजाद ने यह भी उल्लेख किया कि इस्लामाबाद ने उन कई प्रस्तावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिन पर तालिबान सरकार ने सहमति जताई थी। उन्होंने सवाल उठाया, “अब जबकि पाकिस्तान की ओर से किसी भी रचनात्मक प्रयास या प्रतिक्रिया का पूरी तरह अभाव है, यह पूछना जरूरी हो गया है कि क्या इस्लामाबाद वास्तव में कोई समाधान चाहता भी है?”
इस्लामाबाद के इरादों पर उठे सवाल
खलीलजाद ने आगे कहा, “क्या यह संघर्ष वास्तव में उन्हीं कारणों से है जिनका पाकिस्तान दावा करता है, या फिर पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के कुछ अन्य उद्देश्य हैं? क्या वह अफगानिस्तान को अस्थिर रखना चाहता है? क्या चीन पाकिस्तान को ऐसी परिस्थितियां बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है जिससे अफगानिस्तान में चीनी प्रभाव बढ़ सके? या फिर दोनों ही बातें सही हैं?” उनके अनुसार, यदि इस्लामाबाद की रणनीति के पीछे वास्तव में ऐसे उद्देश्य हैं, तो यह अमेरिका के हितों के भी खिलाफ होगा और ISIS-K जैसे आतंकवादी संगठनों को सुरक्षित ठिकाने मिल सकते हैं।
पिछले हमलों की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इसी महीने पहले भी पाकिस्तानी हवाई हमलों में 13 नागरिकों की मौत हुई थी, जिसके बाद अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने काबुल में पाकिस्तान के प्रभारी राजनयिक (चार्ज डी'अफेयर्स) को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। 9 जून की रात कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में हुए हमलों में 11 बच्चों, एक महिला और एक बुजुर्ग की मौत की पुष्टि मुजाहिद ने की थी, जबकि 14 महिलाएं और बच्चे घायल हुए थे। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है और सीमा पर कई बार गोलीबारी की घटनाएं हो चुकी हैं।
आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंध पहले से ही गहरे तनाव में हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से बातचीत की अपीलों के बावजूद सैन्य कार्रवाइयों का जारी रहना इस संकट के कूटनीतिक समाधान की राह को और कठिन बनाता दिख रहा है।