पाकिस्तानी हवाई हमलों में 36 अफगान नागरिक मारे गए, काबुल ने पाकिस्तानी चार्ज डी'अफेयर्स को तलब किया
सारांश
मुख्य बातें
अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 29 जून 2026 को काबुल स्थित पाकिस्तानी दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स को तलब कर पाकिस्तानी वायुसेना के हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार के अनुसार, इन हमलों में 36 नागरिकों की मौत हो गई और 163 अन्य घायल हो गए — मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपना आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि मंत्रालय ने पाकिस्तानी दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स को बुलाकर अफगानिस्तान के एयरस्पेस के उल्लंघन और कुनार, पक्तिया तथा पक्तिका प्रांतों में आम नागरिकों के घरों पर बमबारी के विरुद्ध अपना 'कड़ा और पक्का विरोध' जताया।
तालिबान के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए नागरिक हताहतों का विस्तृत विवरण साझा किया। उन्होंने कहा, 'अब तक उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार, बीती रात हुए हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 36 नागरिकों की मृत्यु हो गई, जबकि 163 अन्य घायल हुए हैं। इसके अलावा, तीन आवासीय मकान पूरी तरह नष्ट हो गए।'
हमलों का विवरण — कहाँ, क्या हुआ
पक्तिया प्रांत के चमकनी जिले के मंडोखेल गांव में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने एक नागरिक के घर पर बमबारी की। फितरत के अनुसार, इस पहले हमले में एक बुज़ुर्ग और एक बच्चे की मौत हुई तथा परिवार के अन्य सदस्य घायल हो गए। इसके बाद, जब स्थानीय निवासी घायलों को बचाने के लिए वहाँ एकत्र हुए, तो उसी स्थान पर दूसरी बार बमबारी की गई — जिसमें 28 ग्रामीण मारे गए और 158 अन्य घायल हो गए।
पक्तिका प्रांत के गियान जिले के वालुस्त गांव में एक अन्य हमले में एक ग्रामीण के घर को निशाना बनाया गया, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई — इनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे। कुनर प्रांत के मनोगई जिले के बारोलो गांव में तीसरे हमले में एक नागरिक का घर पूरी तरह ध्वस्त हो गया, हालांकि इस हमले में कोई जनहानि नहीं हुई।
अफगानिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया
अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को अफगान एयरस्पेस का उल्लंघन और नागरिक आबादी के विरुद्ध अस्वीकार्य कार्रवाई करार दिया। पाकिस्तानी चार्ज डी'अफेयर्स को तलब करना कूटनीतिक भाषा में एक गंभीर संकेत है — यह दर्शाता है कि काबुल इस घटना को सामान्य सीमा-विवाद से कहीं अधिक गंभीरता से ले रहा है। गौरतलब है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के मुद्दे पर पहले से तनाव बना हुआ है।
व्यापक संदर्भ और आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध पहले से ही अत्यंत तनावपूर्ण हैं। पाकिस्तान कथित तौर पर अफगान धरती से संचालित आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता रहा है, जबकि काबुल ऐसे किसी भी हस्तक्षेप को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है। इन हमलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा और आगे की कूटनीतिक प्रतिक्रिया अभी प्रतीक्षित है।