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पाकिस्तान के हवाई हमलों में 36 नागरिक मारे गए, संयुक्त राष्ट्र और EU ने की कड़ी निंदा

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पाकिस्तान के हवाई हमलों में 36 नागरिक मारे गए, संयुक्त राष्ट्र और EU ने की कड़ी निंदा

सारांश

पाकिस्तान के हवाई हमलों ने अफगानिस्तान के तीन प्रांतों में 36 नागरिकों की जान ली और 163 को घायल किया। संयुक्त राष्ट्र, EU और ब्रिटेन ने कड़ी निंदा की। काबुल ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए पाकिस्तानी राजनयिक को तलब किया।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के हवाई हमलों में अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में 36 नागरिकों की मौत , 163 घायल ।
तालिबान उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत के अनुसार हमले में तीन मकान पूरी तरह नष्ट हुए।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने तत्काल हिंसा रोकने और नागरिकों की सुरक्षा की अपील की।
यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने भी तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन का आह्वान किया।
अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने काबुल स्थित पाकिस्तान दूतावास के प्रभारी को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।
अफगानिस्तान ने हमले को 'अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन' करार दिया।

अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 36 नागरिकों की मौत हो गई और 163 लोग घायल हुए। इन हमलों की संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कड़ी निंदा की है और तत्काल संयम बरतने की अपील की है।

हमले का विवरण और जनहानि

तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोमवार को जनहानि का अपडेट देते हुए बताया कि इस हमले में तीन मकान पूरी तरह नष्ट हो गए। मृतकों और घायलों में बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं। यह हमला अफगानिस्तान के सीमावर्ती प्रांतों को निशाना बनाकर किया गया, जो पाकिस्तान की सीमा से लगे हैं।

संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल हिंसा रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि 'सभी पक्ष अपने मतभेदों का समाधान कूटनीतिक माध्यमों से करें और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करते हुए नागरिकों एवं नागरिक बुनियादी ढाँचे की हर हाल में रक्षा करें।'

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने भी पुष्टि की कि हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कई नागरिक मारे गए। मिशन ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सावधानी, भेदभाव और संतुलित बल प्रयोग के सिद्धांतों का पालन करने की आवश्यकता दोहराई।

अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक रिचर्ड बेनेट ने नागरिकों के हताहत होने पर चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में संबोधित किया जाना चाहिए और जवाबदेही तय होनी चाहिए।

यूरोपीय संघ और ब्रिटेन की अपील

यूरोपीय संघ (EU) ने तत्काल तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील की। EU के विदेश मामलों के प्रवक्ता अनुवार एल अनौनी ने कहा कि 'नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए।'

अफगानिस्तान के लिए ब्रिटेन के विशेष दूत रिचर्ड लिंडसे ने भी जारी हिंसा और लगातार हो रही जनहानि पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने का आह्वान किया।

अफगानिस्तान का कड़ा विरोध

अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को काबुल स्थित पाकिस्तान दूतावास के प्रभारी (चार्जे डी'अफेयर्स) को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन और नागरिक घरों पर बमबारी 'अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवीय कानून और किसी भी संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।'

मंत्रालय ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान बिना किसी ठोस सबूत के अपनी आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक विफलताओं का दोष वर्षों से अफगानिस्तान पर मढ़ता रहा है तथा बल प्रयोग और सैन्य कार्रवाई के ज़रिए समस्याओं का समाधान खोजने की असफल नीति अपनाता रहा है। गौरतलब है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव पिछले कई वर्षों से बढ़ता रहा है, और यह हमला दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को और गहरे संकट में डाल सकता है।

आगे की स्थिति

अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद अभी तक पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विश्लेषकों के अनुसार, यह घटना ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र अब इस बात पर है कि क्या दोनों देश कूटनीतिक वार्ता की राह अपनाते हैं या तनाव और बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार अंतरराष्ट्रीय निंदा के बावजूद जवाबदेही शून्य रही है। असली सवाल यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र और EU की अपीलें महज बयानबाज़ी तक सीमित रहेंगी या इस बार ठोस कूटनीतिक दबाव बनेगा। अफगानिस्तान में तालिबान शासन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता न होने के कारण पीड़ित नागरिकों के लिए न्याय के रास्ते और भी संकरे हो जाते हैं। यह संकट दक्षिण एशिया की उस व्यापक अस्थिरता की याद दिलाता है जहाँ सुरक्षा के नाम पर नागरिक बार-बार सबसे बड़ी कीमत चुकाते हैं।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान के हवाई हमलों में कितने लोग मारे गए?
अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में पाकिस्तान के हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 36 नागरिकों की मौत हुई और 163 लोग घायल हुए। तालिबान उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने यह जानकारी सोमवार को दी।
संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान के हमलों पर क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल हिंसा रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने सभी पक्षों से कूटनीतिक समाधान और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन का आग्रह किया।
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के खिलाफ क्या कदम उठाया?
अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने काबुल स्थित पाकिस्तान दूतावास के प्रभारी को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। मंत्रालय ने हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून और अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन बताया।
यूरोपीय संघ ने इस मामले में क्या रुख अपनाया?
यूरोपीय संघ ने तत्काल तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील की। EU के विदेश मामलों के प्रवक्ता अनुवार एल अनौनी ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच यह तनाव क्यों बढ़ रहा है?
अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान वर्षों से बिना ठोस सबूत के अपनी आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक विफलताओं का दोष अफगानिस्तान पर मढ़ता रहा है। पाकिस्तान का तर्क है कि वह अफगान धरती से संचालित होने वाले आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, जबकि अफगानिस्तान इसे संप्रभुता का उल्लंघन मानता है।
राष्ट्र प्रेस
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