जयशंकर और जर्मन सांसद हार्ड्ट की मुलाकात: पश्चिम एशिया, यूक्रेन और भारत-जर्मनी साझेदारी पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 14 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में जर्मन सांसद और सीडीयू/सीएसयू संसदीय समूह के विदेश नीति प्रवक्ता जर्गन हार्ड्ट से द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में पश्चिम एशिया, यूक्रेन संघर्ष और भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत हाल के घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में जर्मनी के नवनियुक्त भारतीय राजदूत जैस्पर वीक भी उपस्थित रहे।
बैठक में क्या हुआ
बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'सीडीयू-सीएसयू के विदेश नीति प्रवक्ता जर्गन हार्ड्ट से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत में खाड़ी, पश्चिम एशिया, यूक्रेन और भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी से जुड़े हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा हुई।' यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
भारत-जर्मनी संबंधों की पृष्ठभूमि
जर्मनी यूरोप में भारत के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है। भारत उन पहले देशों में शामिल था जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1951 में जर्मनी के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मई 2000 में अपनाए गए 'भारत-जर्मन साझेदारी के लिए एजेंडा' पर आधारित है, जिसे बाद में 2022 के प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते जैसी संयुक्त घोषणाओं के ज़रिए अद्यतन किया गया।
नए राजदूत जैस्पर वीक का परिचय
नवनियुक्त जर्मन राजदूत जैस्पर वीक ने भारत के साथ अपने गहरे व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख किया। एक्स पर साझा किए गए वीडियो में उन्होंने कहा, 'मेरे लिए भारत आना घर आने जैसा है। मैं भारत का पुराना दोस्त हूं। मैं पहली बार 35 साल पहले भारत आया था। तब मैं छात्र था और देश और यहां के लोगों से मिलकर मैं तुरंत रोमांचित हो गया था।' वीक पूर्व में जर्मन दूतावास में उप मिशन प्रमुख के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
राजदूत की प्राथमिकताएँ
वीक ने स्पष्ट किया कि वे एक 'मैचमेकर, सक्षमकर्ता और उत्प्रेरक' के रूप में काम करना चाहते हैं ताकि भारत-जर्मनी की दोस्ती को नए स्तर पर ले जाया जा सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जर्मनी में भारतीय प्रवासी समुदाय का विस्तार हो रहा है और भारत में जर्मन निवेश लगातार बढ़ रहा है। वीक ने कहा कि क्रेडेंशियल्स प्रस्तुत करने के बाद वे दोनों देशों के बीच 'नए पुल' बनाने के काम में जुट जाएंगे।
आगे की दिशा
यह बैठक भारत-जर्मनी संबंधों के 75वें वर्ष के उत्सव के व्यापक संदर्भ में हुई है। गौरतलब है कि दोनों देश वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल — विशेषकर यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति — के बीच अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने की दिशा में सक्रिय हैं। आने वाले हफ्तों में राजदूत वीक के औपचारिक क्रेडेंशियल प्रस्तुति के बाद द्विपक्षीय संवाद और तेज़ होने की उम्मीद है।