26 सितंबर 2026
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जयशंकर-लावरोव मुलाकात: भारत-रूस ने UNGA में रणनीतिक साझेदारी की प्रतिबद्धता दोहराई

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जयशंकर-लावरोव मुलाकात: भारत-रूस ने UNGA में रणनीतिक साझेदारी की प्रतिबद्धता दोहराई

सारांश

UNGA के मंच पर जयशंकर-लावरोव की बैठक ने एक बार फिर साफ किया कि भारत यूक्रेन संघर्ष के बावजूद रूस से अपनी 'विशेष साझेदारी' को बनाए रखने का रास्ता चुन रहा है — और एक साथ कीव से भी संवाद जारी रखे हुए है। यह संतुलन भारत की बहुध्रुवीय कूटनीति की मिसाल है।

मुख्य बातें

जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 26 सितंबर 2026 को UNGA के इतर द्विपक्षीय बैठक की।
भारत और रूस ने 'विशेष और खास रणनीतिक साझेदारी' को मजबूत करने तथा जी-20 और ब्रिक्स में तालमेल जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
किसी भी पक्ष ने आधिकारिक बयान में यूक्रेन युद्ध का सीधा उल्लेख नहीं किया।
इससे पहले जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से भी मुलाकात कर 'शांति प्रयासों' पर चर्चा की थी।
PM मोदी ने पिछले महीने SCO शिखर सम्मेलन में पुतिन से मिलकर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया था।
ट्रंप ने पुतिन को दिसंबर के जी-20 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया है, जहाँ मोदी के भी शामिल होने की संभावना है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच 26 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के इतर न्यूयॉर्क में द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें भारत और रूस ने अपनी 'विशेष और खास रणनीतिक साझेदारी' को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र, जी-20 तथा ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर आपसी तालमेल बनाए रखने पर भी सहमति जताई।

बैठक में क्या हुआ

बैठक के बाद रूसी विदेश मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'दोनों पक्षों ने रूस-भारत की विशेष और खास रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और संयुक्त राष्ट्र, जी-20 तथा ब्रिक्स में करीबी तालमेल बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।' जयशंकर ने भी एक्स पर पोस्ट कर बताया कि दोनों नेताओं ने 'कई मौजूदा मुद्दों' पर विचार साझा किए और भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों तथा ब्रिक्स के तहत सहयोग की समीक्षा की।

गौरतलब है कि दोनों मंत्रियों में से किसी ने भी इस बैठक से संबंधित जारी बयानों में यूक्रेन युद्ध का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया — जयशंकर ने केवल 'कई मौजूदा मुद्दों' की बात कही।

यूक्रेन संघर्ष की पृष्ठभूमि

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत यूक्रेन संघर्ष पर दोनों पक्षों से संपर्क बनाए हुए है। इससे महज कुछ दिन पहले, सोमवार को जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से भी मुलाकात की थी। उस बैठक के बाद जयशंकर ने 'पिछले कुछ हफ्तों के घटनाक्रम' पर ध्यान देने की बात कही, जबकि सिबिहा ने अधिक स्पष्ट शब्दों में कहा कि चर्चा 'शांति की कोशिशों' पर केंद्रित रही।

यह ऐसे समय में आया है जब पिछले महीने किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी और उनसे 'मानवता के नाम पर' यूक्रेन युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया था।

ब्रिक्स और बहुपक्षीय सहयोग

लावरोव इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पुतिन के साथ भारत आए थे। भारत और रूस ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य के रूप में वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण जैसे मुद्दों पर अपने रुख में तालमेल करते रहे हैं।

इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन को दिसंबर में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। प्रधानमंत्री मोदी के भी इस सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है, जो एक अन्य त्रिकोणीय कूटनीतिक अवसर बन सकता है।

UNGA में भारत की सक्रिय कूटनीति

लावरोव के साथ यह बैठक UNGA के दौरान जयशंकर की व्यापक कूटनीतिक श्रृंखला का हिस्सा है। इस दौरान वे अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को सुदृढ़ करने, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने, और 'ग्लोबल साउथ' की आवाज़ के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से कई देशों के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं।

आने वाले हफ्तों में जी-20 शिखर सम्मेलन की तैयारियों और ब्रिक्स के भीतर सहयोग की दिशा पर दोनों देशों के बीच और बातचीत होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ एक अंतर्विरोध भी है: मोदी ने पुतिन से युद्ध रोकने का आग्रह किया, फिर भी भारत-रूस 'विशेष साझेदारी' की घोषणाएँ बिना किसी शर्त के जारी हैं। यूक्रेन का सीधा जिक्र न करना एक कूटनीतिक संकेत है — जो मॉस्को को आश्वस्त रखता है और पश्चिम को असहज। दीर्घकालिक सवाल यह है कि क्या यह संतुलन तब भी टिकेगा जब जी-20 में ट्रंप, पुतिन और मोदी एक ही मेज पर बैठेंगे।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और लावरोव की बैठक कहाँ और कब हुई?
यह बैठक 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के इतर हुई। इसमें भारत-रूस की विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति बनी।
भारत-रूस की 'विशेष और खास रणनीतिक साझेदारी' का क्या मतलब है?
यह एक द्विपक्षीय ढाँचा है जो रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और बहुपक्षीय मंचों पर गहरे सहयोग को परिभाषित करता है। दोनों देश ब्रिक्स और जी-20 जैसे मंचों पर साझा रुख अपनाते रहे हैं और इस बैठक में इसी प्रतिबद्धता को दोहराया गया।
क्या इस बैठक में यूक्रेन युद्ध पर चर्चा हुई?
न तो जयशंकर और न ही रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयानों में यूक्रेन युद्ध का सीधा उल्लेख किया। जयशंकर ने केवल 'कई मौजूदा मुद्दों' पर विचार साझा करने की बात कही।
भारत ने यूक्रेन के विदेश मंत्री से कब मुलाकात की?
जयशंकर ने इसी UNGA सत्र के दौरान सोमवार को यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से मुलाकात की थी। उस बातचीत में सिबिहा ने स्पष्ट किया कि चर्चा 'शांति की कोशिशों' पर केंद्रित रही।
PM मोदी और पुतिन की अगली संभावित मुलाकात कब होगी?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन को दिसंबर में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया है, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी के भी शामिल होने की संभावना है। इससे तीनों नेताओं के एक साथ बातचीत का अवसर बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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