13 अगस्त 2026
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कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप 2026: भारत ने 35 मेडल जीते, विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी पर पहली बार कब्जा

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कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप 2026: भारत ने 35 मेडल जीते, विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी पर पहली बार कब्जा

सारांश

भारतीय फेंसिंग टीम ने लागोस में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप 2026 में 35 मेडल जीते और पहली बार विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी अपने नाम की — यह उपलब्धि 2028 ओलंपिक की दिशा में भारतीय फेंसिंग के बढ़ते कद का संकेत है।

मुख्य बातें

भारतीय फेंसिंग टीम ने कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप 2026 में पहली बार ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब जीता।
चार दिनों में कुल 35 मेडल — 13 गोल्ड, 8 सिल्वर, 14 ब्रॉन्ज — हासिल किए।
टीम इवेंट्स के 6 में से 5 मुकाबलों में गोल्ड; मेंस फॉयल में सिल्वर।
निखिल वाघ, तनिष्का खत्री, कनागलक्ष्मी, राजेंद्रन शांतिमोली शेरजिन और सिंह करण सिंह प्रमुख गोल्ड मेडलिस्ट रहे।
विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी 1982 से दी जा रही है; भारत ने इसे पहली बार जीता।
फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल राजीव मेहता ने इसे भारतीय फेंसिंग के टैलेंट और अनुशासन का प्रमाण बताया।

भारतीय फेंसिंग टीम ने कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप 2026 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब पहली बार अपने नाम किया। लागोस, नाइजीरिया में 13 अगस्त 2026 को समाप्त हुई इस चार दिवसीय प्रतियोगिता में टीम इंडिया ने कुल 35 मेडल13 गोल्ड, 8 सिल्वर और 14 ब्रॉन्ज — जीतकर मेडल तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। इस शानदार प्रदर्शन के बल पर भारत ने प्रतिष्ठित विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी अपनी झोली में डाली।

विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी: क्या है इसका महत्व

यह ट्रॉफी 1982 से कॉमनवेल्थ फेंसिंग फेडरेशन द्वारा सर्वश्रेष्ठ समग्र प्रदर्शन करने वाले देश को प्रदान की जाती है। भारत के लिए यह पहला अवसर है जब उसने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को हासिल किया है, जो देश में फेंसिंग के बढ़ते स्तर का प्रमाण है।

टीम इवेंट्स में दबदबा

भारतीय फेंसर्स ने टीम इवेंट्स के 6 मुकाबलों में से पाँच में गोल्ड मेडल जीते। मेंस सेबर, विमेंस सेबर, मेंस एपी, विमेंस एपी और विमेंस फॉयल में भारत ने शीर्ष स्थान हासिल किया। मेंस फॉयल में कड़े मुकाबले के बाद सिल्वर मेडल मिला, जो टीम के व्यापक वर्चस्व को और पुख्ता करता है।

दिन-दर-दिन मुख्य प्रदर्शन

पहले दिन अंडर-23 व्यक्तिगत इवेंट्स में भारत ने 17 मेडल (4 गोल्ड, 4 सिल्वर, 9 ब्रॉन्ज) जीते। निखिल वाघ की अगुवाई में मेंस सेबर में पोडियम पर पूरी तरह भारत का कब्जा रहा। जॉइस अशिता (विमेंस फॉयल), प्राची लोहान (विमेंस एपी) और जेफरलिन (विमेंस सेबर) ने भी व्यक्तिगत गोल्ड जीते।

दूसरे दिन सीनियर व्यक्तिगत इवेंट्स में 7 मेडल (1 गोल्ड, 2 सिल्वर, 4 ब्रॉन्ज) आए। तनिष्का खत्री और खुशी दाभाड़े ने सीनियर विमेंस एपी में क्रमशः गोल्ड और सिल्वर जीतकर सबका ध्यान खींचा।

तीसरे दिन 5 मेडल (3 गोल्ड, 1 सिल्वर, 1 ब्रॉन्ज) मिले। कनागलक्ष्मी (सीनियर विमेंस फॉयल), राजेंद्रन शांतिमोली शेरजिन (सीनियर मेंस एपी) और सिंह करण सिंह (सीनियर मेंस सेबर) ने गोल्ड मेडल अपने नाम किए।

सपोर्ट स्टाफ की भूमिका

इस ऐतिहासिक अभियान के पीछे कोच भरतजी ठाकोर, श्रीहरि पिसे और शंकर नारायणन, फिजियोथेरेपिस्ट अमृता बालकावाड़े और टीम मैनेजर मनु त्यागी का समर्पित योगदान रहा। उनकी रणनीतिक सलाह, फिजिकल कंडीशनिंग और इवेंट मैनेजमेंट ने चार दिनों के दौरान टीम को ऊर्जावान बनाए रखा।

फेंसिंग एसोसिएशन की प्रतिक्रिया

फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल राजीव मेहता ने कहा, 'मुझे अपनी पूरी टीम — हर एक खिलाड़ी, कोच और सपोर्ट स्टाफ मेंबर पर बहुत गर्व है, जिनकी कड़ी मेहनत से यह ऐतिहासिक जीत मुमकिन हो पाई। पहली बार कॉमनवेल्थ ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब जीतना भारतीय फेंसिंग में मौजूद टैलेंट, अनुशासन और कड़ी मेहनत का सबूत है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट और बड़े वैश्विक चैंपियनशिप की तैयारी के लिए एक मजबूत और सकारात्मक माहौल बनाएगी।

गौरतलब है कि यह जीत ऐसे समय में आई है जब भारत 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक की तैयारियों में जुटा है और फेंसिंग जैसे गैर-पारंपरिक खेलों में पदक की संभावनाएँ तलाश रहा है। इस प्रदर्शन से निश्चित रूप से इस खेल को देश में नई पहचान मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा का स्तर ओलंपिक या विश्व चैंपियनशिप जितना व्यापक नहीं होता, इसलिए इस जीत को उचित संदर्भ में देखना जरूरी है। असली परीक्षा तब होगी जब ये खिलाड़ी 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक की क्वालीफिकेशन प्रक्रिया में उतरेंगे। फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के लिए यह जीत बुनियादी ढाँचे और कोचिंग में निवेश बढ़ाने का सबसे सशक्त तर्क है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप 2026 में भारत ने कितने मेडल जीते?
भारत ने कुल 35 मेडल जीते — 13 गोल्ड, 8 सिल्वर और 14 ब्रॉन्ज। यह प्रदर्शन अंडर-23 और सीनियर दोनों कैटेगरी को मिलाकर रहा और भारत मेडल तालिका में शीर्ष पर रहा।
विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी क्या है और भारत ने इसे पहले क्यों नहीं जीता था?
विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी 1982 से कॉमनवेल्थ फेंसिंग फेडरेशन द्वारा सर्वश्रेष्ठ समग्र प्रदर्शन करने वाले देश को दी जाती है। 2026 में पहली बार भारत ने इसे जीता, जो देश में फेंसिंग के स्तर में आई उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है।
भारत के कौन-से खिलाड़ी इस चैंपियनशिप में सबसे अधिक चमके?
निखिल वाघ (अंडर-23 मेंस सेबर गोल्ड), तनिष्का खत्री (सीनियर विमेंस एपी गोल्ड), कनागलक्ष्मी (सीनियर विमेंस फॉयल गोल्ड), राजेंद्रन शांतिमोली शेरजिन (सीनियर मेंस एपी गोल्ड) और सिंह करण सिंह (सीनियर मेंस सेबर गोल्ड) प्रमुख प्रदर्शनकर्ता रहे।
भारत ने टीम इवेंट्स में कैसा प्रदर्शन किया?
भारत ने 6 टीम इवेंट्स में से 5 में गोल्ड मेडल जीते — मेंस सेबर, विमेंस सेबर, मेंस एपी, विमेंस एपी और विमेंस फॉयल में। मेंस फॉयल में कड़े मुकाबले के बाद सिल्वर मेडल मिला।
इस जीत का भारतीय फेंसिंग के भविष्य पर क्या असर होगा?
फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल राजीव मेहता के अनुसार, यह उपलब्धि खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाएगी और आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट तथा बड़े वैश्विक चैंपियनशिप की तैयारी के लिए सकारात्मक माहौल बनाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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