नैनीताल के पहाड़ों में स्थित श्री संकट मोचन मंदिर: आस्था का अद्भुत केंद्र
सारांश
Key Takeaways
- श्री संकट मोचन मंदिर नैनीताल का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- यह हनुमान जी को समर्पित है।
- मंदिर की स्थापना 1950 में हुई थी।
- यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य भक्तों को आकर्षित करता है।
- मान्यता है कि यहाँ आने वाले सभी की मनोकामना पूरी होती है।
उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल में प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहाँ की खूबसूरत झीलें, हरे-भरे पहाड़ और ठंडी हवा लोगों को आकर्षित करती हैं, वहीं प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता का अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं।
नैनीताल में स्थित प्रसिद्ध श्री संकट मोचन मंदिर राम भक्त हनुमान जी को समर्पित है। यह मंदिर ऊंचे पहाड़ों के मध्य स्थित है। मंदिर की दिव्यता और इसके चारों ओर का प्राकृतिक सौंदर्य भक्तों को नई ऊर्जा और मानसिक शांति का अनुभव कराता है।
इस मंदिर की महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है। हर साल हजारों श्रद्धालु यहाँ आकर हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं। हनुमान जयंती के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर की महत्वता को उजागर किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मंदिर का विशेष वीडियो साझा किया और लिखा, "जनपद नैनीताल में स्थित श्री संकट मोचन मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जिसकी दिव्यता और प्राकृतिक सौंदर्य आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा प्रदान करती है। नैनीताल आगमन पर यहाँ अवश्य आएं।"
इस मंदिर को आमतौर पर हनुमान गढ़ी भी कहा जाता है। इसकी स्थापना बाबा नीब करौली के निर्देशानुसार लगभग 1950 में की गई थी। इस पहाड़ी के दूसरी तरफ शीतला देवी मंदिर और लीला शाह बापू आश्रम स्थित हैं।
लोग यहाँ विशेष रूप से शाम के समय सुंदर सूर्यास्त का नजारा देखने के लिए भी आते हैं, जो इस स्थान की खूबसूरती को और बढ़ा देता है।
यहाँ हनुमान जी की एक अनोखी प्रतिमा स्थापित है, जिसमें वे अपनी छाती खोलते हुए दिखाई देते हैं। उनके हृदय में भगवान राम और सीता विराजमान हैं।
हनुमान गढ़ी मंदिर से तराई घाटी का सुन्दर दृश्य भी दिखाई देता है। यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण होती है।