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देहरादून में यमुना किनारे शनि धाम का अनोखा धार्मिक महत्व

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देहरादून में यमुना किनारे शनि धाम का अनोखा धार्मिक महत्व

सारांश

उत्तराखंड की धरती पर स्थित शनि धाम का पौराणिक महत्व अद्वितीय है। यह श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का मुख्य केंद्र है। मुख्यमंत्री धामी ने इसे लेकर अपने विचार साझा किए हैं।

मुख्य बातें

शनि धाम धार्मिक आस्था का केंद्र है।
यह मंदिर लगभग 800 वर्ष पुराना है।
यहाँ शनिवार को विशेष पूजा होती है।
पांडवों द्वारा निर्मित इस मंदिर की वास्तुकला अद्वितीय है।
यह यमुना और शनिदेव के बीच के भाई-बहन के रिश्ते को दर्शाता है।

देहरादून, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड की देवभूमि अपनी पवित्रता, प्राकृतिक सौंदर्य, पवित्र नदियों और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। इसी भूमि पर देहरादून जनपद के विकासनगर क्षेत्र में यमुना नदी के किनारे स्थित है 'शनि धाम'

यह मंदिर अपने पवित्र स्थान, आस्था और आध्यात्मिक शांति का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इसकी पौराणिक महत्ता के कारण यह हर जगह प्रसिद्ध है। शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस स्थान के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का एक विशेष वीडियो साझा किया। इसके साथ ही उन्होंने शनि धाम के महत्व को बताते हुए लोगों से इस पावन धाम का अनुभव करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने लिखा, "देहरादून जनपद के विकासनगर में यमुना नदी के तट पर स्थित शनि धाम अनेकों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर शांत वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है। शनिवार के दिन यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। आप भी देहरादून आगमन पर इस पावन धाम के दर्शन अवश्य करें।"

यह मंदिर अपनी शांतिपूर्ण जगह, हरियाली और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान इस चारमंजिला मंदिर का निर्माण किया था। इसकी अनूठी लकड़ी-पत्थर की वास्तुकला (कोटी बनाल शैली) इसे आपदाओं से भी सुरक्षित रखती है।

यह मंदिर लगभग 800 वर्ष पुराना है और इसे यमुना के भाई शनिदेव का निवास माना जाता है। पुराणों के अनुसार, शनिदेव और मां यमुना भाई-बहन हैं। दोनों की माता सूर्य देव हैं। यमुना, संज्ञा की पुत्री और शनिदेव छाया के पुत्र हैं।

इसलिए, जब यमुनोत्री धाम के कपाट खुलते हैं, तो अक्षय तृतीया के दिन शनिदेव की डोली अपनी बहन यमुना को विदा करने के लिए यमुनोत्री धाम जाती है। और जब भैयादूज के दिन यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होते हैं, तब शनिदेव की डोली अपनी बहन यमुना को लेने के लिए यमुनोत्री धाम पहुंचती है। इसके बाद शनिदेव अपनी बहन यमुना को लेकर लौट आते हैं। फिर सर्दियों के दौरान भाई-बहन खरसाली गांव में अपने-अपने मंदिरों में विराजमान रहते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शनि धाम कहाँ स्थित है?
शनि धाम देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में यमुना नदी के किनारे स्थित है।
शनि धाम का पौराणिक महत्व क्या है?
यह मंदिर पांडवों द्वारा निर्मित माना जाता है और यहाँ शनिदेव की पूजा की जाती है।
यहाँ कौन सी विशेष पूजा होती है?
शनिवार के दिन यहाँ विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।
शनि देव और यमुना का क्या संबंध है?
पुराणों के अनुसार, शनिदेव और यमुना भाई-बहन हैं।
शनि धाम के दर्शन कब करना चाहिए?
आप देहरादून आगमन पर इस पावन धाम के दर्शन अवश्य करें।
राष्ट्र प्रेस
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