सीएम धामी ने चमोली के श्री गोपीनाथ मंदिर के महत्व पर जोर दिया, श्रद्धालुओं से की अपील
सारांश
Key Takeaways
- श्री गोपीनाथ मंदिर चमोली का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।
- इसकी अद्वितीय स्थापत्य कला इसे विशेष बनाती है।
- महाशिवरात्रि पर यहाँ विशेष पूजा होती है।
- यह मंदिर केदारनाथ और बद्रीनाथ के बीच एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
उत्तराखंड, ६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देवी भूमि उत्तराखंड अपनी प्राचीन पौराणिक धरोहर और भव्य मंदिरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसी क्रम में, चमोली के गोपेश्वर में स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर एक महत्वपूर्ण स्थल है। यह मंदिर बाबा भोलेनाथ को समर्पित है और अपनी अद्वितीय स्थापत्य कला तथा धार्मिक महत्व के लिए अत्यधिक प्रसिद्ध है।
गोपीनाथ मंदिर का निर्माण ९वीं और ११वीं शताब्दी के बीच कत्यूरी राजाओं द्वारा किया गया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मंदिर के महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का भव्य वीडियो साझा किया।
उन्होंने लिखा, "जनपद चमोली के गोपेश्वर में स्थित गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर अपनी अद्भुत स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि और होली जैसे पवित्र पर्वों पर यहाँ विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। आप भी चमोली आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।"
यह प्राचीन मंदिर कत्यूरी राजवंश के समय (लगभग ९वीं से ११वीं शताब्दी) में निर्मित माना जाता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यह अपनी गुम्बदनुमा शिखर और ३० वर्ग फुट के गर्भगृह के लिए जाना जाता है, जहाँ तक २४ द्वारों से पहुँचा जा सकता है।
यह मंदिर चमोली के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित है और पंच केदार के रुद्रनाथ जी की शीतकालीन गद्दी के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण प्रांगण में स्थापित ५ मीटर ऊँचा त्रिशूल है, जो ८ विभिन्न धातुओं से बना है।
प्राचीन त्रिशूल को लेकर एक पौराणिक कहावत बहुत प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि इस प्राचीन त्रिशूल को शारीरिक बल से नहीं हिलाया जा सकता, लेकिन यदि किसी भक्त के मन में सच्ची आस्था है, तो उसके छूने भर से त्रिशूल में कंपन होने लगता है।
शीतकाल के दौरान जब रुद्रनाथ मंदिर (पंच केदार में से एक) के कपाट बंद हो जाते हैं, तब भगवान रुद्रनाथ की उत्सव मूर्ति को यहाँ लाया जाता है। मंदिर परिसर में शिवजी के अलावा परशुराम, गणेश और भैरव जी की मूर्तियां भी हैं। साथ ही यहाँ एक पवित्र 'वैतरणी कुंड' भी स्थित है। यह मंदिर केदारनाथ और बद्रीनाथ के बीच एक प्रमुख पड़ाव माना जाता है, जहाँ महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा की जाती है।