प्रोजेक्ट दंतक का 66वां स्थापना दिवस: भारत-भूटान मित्रता के 6 दशक, 1500 KM सड़कों की विरासत

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प्रोजेक्ट दंतक का 66वां स्थापना दिवस: भारत-भूटान मित्रता के 6 दशक, 1500 KM सड़कों की विरासत

सारांश

बीआरओ की प्रोजेक्ट दंतक ने 24 अप्रैल को थिम्पू में 66वां स्थापना दिवस मनाया। 1961 से भूटान में 1500 KM से अधिक सड़कें, हवाई अड्डे और जलविद्युत परियोजनाएं बनाकर यह परियोजना भारत-भूटान मित्रता का सबसे मजबूत प्रतीक बन चुकी है।

Key Takeaways

  • प्रोजेक्ट दंतक ने 24 अप्रैल 2025 को थिम्पू, भूटान में अपना 66वां स्थापना दिवस मनाया।
  • परियोजना की स्थापना 24 अप्रैल 1961 को हुई थी और इसने भूटान की पहली मोटर योग्य सड़क का निर्माण किया।
  • दंतक ने भूटान में 1500 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया है, जिसमें पूर्व-पश्चिम राजमार्ग और 168 KM लंबा समद्रुप जोंगखार-त्राशिगांग हाईवे शामिल है।
  • पारो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, योंगफुला एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड और कई जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण में दंतक की अहम भूमिका रही है।
  • स्थापना दिवस पर उत्कृष्ट कर्मियों का सम्मान, शहीदों को श्रद्धांजलि और अंतर-विद्यालयीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई।
  • यह परियोजना भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का सबसे सफल और दीर्घकालिक उदाहरण मानी जाती है।

थिम्पू, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की प्रोजेक्ट दंतक ने 24 अप्रैल 2025 को भूटान की राजधानी थिम्पू में अपना 66वां स्थापना दिवस गर्व और उत्साह के साथ मनाया। यह ऐतिहासिक अवसर भारत और भूटान के बीच छह दशकों से अधिक समय से चली आ रही अटूट मित्रता, विकास और सहयोग की साझेदारी का जीवंत प्रमाण है। 1500 किलोमीटर से अधिक सड़कों के निर्माण से लेकर हवाई अड्डों और जलविद्युत परियोजनाओं तक, दंतक ने भूटान के कायाकल्प में अभूतपूर्व योगदान दिया है।

प्रोजेक्ट दंतक की ऐतिहासिक यात्रा

प्रोजेक्ट दंतक की नींव 24 अप्रैल 1961 को रखी गई थी। उस समय भूटान एक ऐसा देश था जहां आधुनिक परिवहन व्यवस्था का लगभग अभाव था। परियोजना ने भूटान की पहली मोटर योग्य सड़क का निर्माण कर देश में एक नए युग की शुरुआत की।

पिछले छह दशकों से अधिक की अवधि में यह परियोजना भूटान के सामाजिक और आर्थिक विकास की रीढ़ बन चुकी है। आज इसे भूटान की कनेक्टिविटी का मूल आधार माना जाता है, जो देश के दूरदराज़ क्षेत्रों को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ती है।

प्रमुख उपलब्धियां और निर्माण कार्य

प्रोजेक्ट दंतक ने भूटान में 1500 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया है। इनमें पूर्व-पश्चिम राजमार्ग, फुएंत्शोलिंग-थिम्पू हाईवे और समद्रुप जोंगखार-त्राशिगांग हाईवे जैसी रणनीतिक परियोजनाएं शामिल हैं, जो देश के सुदूर इलाकों को राजधानी से जोड़ती हैं।

सड़कों के अलावा परियोजना ने पारो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और योंगफुला एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे भूटान के पर्यटन और हवाई संपर्क को नई उड़ान मिली है।

इसके साथ ही जलविद्युत परियोजनाओं, पुलों, दूरसंचार नेटवर्क, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण में भी दंतक की भूमिका उल्लेखनीय रही है। इन प्रयासों ने स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर को सीधे प्रभावित किया है।

आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन

हाल के वर्षों में प्रोजेक्ट दंतक ने अपने कार्यों में आधुनिक तकनीक को प्राथमिकता दी है। कॉन्फ्लुएंस-हा सड़क खंड का दोहरीकरण और लगभग 168 किलोमीटर लंबे समद्रुप जोंगखार-त्राशिगांग हाईवे का उन्नयन इसके ताज़ा उदाहरण हैं।

इन परियोजनाओं से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आई है, सड़क सुरक्षा बेहतर हुई है और क्षेत्रीय संपर्क सुदृढ़ हुआ है। भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तेज़ी से सड़क बहाली करके दंतक ने अपनी आपदा प्रतिक्रिया क्षमता भी साबित की है।

स्थापना दिवस समारोह और सम्मान

स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में थिम्पू में कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मियों को सम्मानित किया गया और कर्तव्य के दौरान शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इस अवसर पर अंतर-विद्यालयीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें भूटानी युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस प्रतियोगिता ने युवा पीढ़ी में भारत-भूटान मैत्री के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम किया।

भारत-भूटान संबंधों का व्यापक परिप्रेक्ष्य

यह उल्लेखनीय है कि प्रोजेक्ट दंतक केवल एक इंजीनियरिंग परियोजना नहीं, बल्कि भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट नीति' का सबसे ठोस और दीर्घकालिक उदाहरण है। जब चीन हिमालयी देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में भूटान में भारत की यह उपस्थिति रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वर्तमान में भी दंतक भूटान के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क विस्तार, पुल निर्माण और वैकल्पिक मार्गों के विकास में सक्रिय है। इन परियोजनाओं का लक्ष्य हर मौसम में सुचारू और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना है, साथ ही भूटान की पर्यावरणीय संवेदनशीलता का भी पूरा ध्यान रखना है।

आने वाले वर्षों में प्रोजेक्ट दंतक से और अधिक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की उम्मीद है, जो भारत-भूटान संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएंगी और दोनों देशों के नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाएंगी।

Point of View

बल्कि भारत की उस कूटनीतिक दूरदर्शिता का प्रमाण है जो चीन के बढ़ते हिमालयी प्रभाव के बीच भूटान को भारत के करीब रखती है। जब बीजिंग 'बेल्ट एंड रोड' से पड़ोसी देशों को ऋण जाल में फंसाता है, दंतक बिना शर्त विकास की मिसाल पेश करती है। मुख्यधारा की कवरेज इसे केवल इंजीनियरिंग उपलब्धि बताती है, लेकिन असल तस्वीर यह है कि यह परियोजना भारत की सबसे सफल सॉफ्ट पावर रणनीति है जो 1500 KM सड़कों के ज़रिए भूटानी जनमानस में भारत की छवि गढ़ती है।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

प्रोजेक्ट दंतक क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?
प्रोजेक्ट दंतक भारत के सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की एक विशेष परियोजना है जिसकी स्थापना 24 अप्रैल 1961 को हुई थी। यह परियोजना भूटान में सड़कों, पुलों, हवाई अड्डों और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए जिम्मेदार है।
प्रोजेक्ट दंतक ने भूटान में कितनी सड़कें बनाई हैं?
प्रोजेक्ट दंतक ने भूटान में 1500 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया है। इनमें पूर्व-पश्चिम राजमार्ग, फुएंत्शोलिंग-थिम्पू हाईवे और समद्रुप जोंगखार-त्राशिगांग हाईवे जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।
66वां स्थापना दिवस कहां और कैसे मनाया गया?
66वां स्थापना दिवस 24 अप्रैल 2025 को भूटान की राजधानी थिम्पू में मनाया गया। इस अवसर पर उत्कृष्ट कर्मियों को सम्मानित किया गया, शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और अंतर-विद्यालयीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
प्रोजेक्ट दंतक का भारत-भूटान संबंधों में क्या महत्व है?
प्रोजेक्ट दंतक भारत-भूटान मित्रता का सबसे ठोस प्रतीक है और भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का सफल उदाहरण है। यह परियोजना भूटान के विकास में बिना शर्त सहयोग देकर दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और सद्भावना को मज़बूत करती है।
प्रोजेक्ट दंतक की भविष्य की योजनाएं क्या हैं?
वर्तमान में प्रोजेक्ट दंतक भूटान में सड़क विस्तार, पुल निर्माण और वैकल्पिक मार्गों के विकास पर काम कर रही है। इसका लक्ष्य हर मौसम में सुचारू यातायात सुनिश्चित करना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए भूटान की कनेक्टिविटी को और मजबूत करना है।
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