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त्रियुगीनारायण मंदिर: शिव-पार्वती विवाहस्थली को CM धामी ने बताया देवभूमि की अद्वितीय आध्यात्मिक धरोहर

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त्रियुगीनारायण मंदिर: शिव-पार्वती विवाहस्थली को CM धामी ने बताया देवभूमि की अद्वितीय आध्यात्मिक धरोहर

सारांश

रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण मंदिर को CM पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर देवभूमि की आध्यात्मिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक बताया। पौराणिक मान्यता है कि यहीं भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था — और अखंड धूनी उसकी साक्षी है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 5 जुलाई 2026 को एक्स पर पोस्ट कर त्रियुगीनारायण मंदिर का महत्व साझा किया।
पौराणिक मान्यता के अनुसार यह मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह की पुण्यभूमि है।
मंदिर में स्थित अखंड धूनी को शिव-पार्वती विवाह का साक्षी माना जाता है।
मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में हिमालय की गोद में स्थित है और प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु व दंपती यहाँ आते हैं।
धामी ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से रुद्रप्रयाग आगमन पर इस तीर्थस्थल के दर्शन की अपील की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 5 जुलाई 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए रुद्रप्रयाग जिले में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर को देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक बताया। उन्होंने इस पवित्र तीर्थस्थल का महत्व रेखांकित करते हुए श्रद्धालुओं और पर्यटकों से रुद्रप्रयाग आगमन पर यहाँ दर्शन करने की अपील की।

मुख्यमंत्री का संदेश

धामी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर अत्यंत पवित्र और दिव्य तीर्थस्थल है। पौराणिक मान्यता है कि यही वह पुण्यभूमि है जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। रुद्रप्रयाग जनपद आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।'

पौराणिक और धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रियुगीनारायण मंदिर वह पवित्र भूमि है जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। मंदिर परिसर में स्थित अखंड धूनी को इस दिव्य विवाह का साक्षी माना जाता है और मान्यता है कि यह अग्नि तब से अनवरत प्रज्वलित है। इस कारण यह स्थान हिंदू धर्म में असाधारण आस्था का केंद्र बना हुआ है।

गौरतलब है कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत दस्तावेज़ है। हिमालय की गोद में बसे इस तीर्थ का शांत और दिव्य वातावरण श्रद्धालुओं को एक विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

पर्यटन और आस्था का संगम

देवभूमि उत्तराखंड अपनी आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्वभर में पहचानी जाती है। त्रियुगीनारायण मंदिर इस पहचान को और सुदृढ़ करता है। यहाँ प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इसके अतिरिक्त, अनेक दंपती इस स्थान को विवाह के लिए भी चुनते हैं — शिव-पार्वती के विवाहस्थल पर विवाह करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

आगे की संभावनाएँ

मुख्यमंत्री धामी की इस पोस्ट को उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक सक्रिय कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार चारधाम यात्रा सहित समूचे उत्तराखंड में तीर्थाटन को प्रोत्साहित करने पर ज़ोर दे रही है। त्रियुगीनारायण जैसे अपेक्षाकृत कम-चर्चित किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों को मुख्यधारा में लाने से राज्य के पर्यटन राजस्व और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इन स्थलों तक बुनियादी ढाँचे और पहुँच-मार्गों की स्थिति पर सरकार की सक्रियता उतनी दृश्यमान नहीं है जितनी सोशल मीडिया प्रचार में है — यही वह अंतर है जिसे पाटे बिना पर्यटन की वास्तविक वृद्धि सीमित रहेगी।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रियुगीनारायण मंदिर कहाँ स्थित है और इसका क्या महत्व है?
त्रियुगीनारायण मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हिमालय की गोद में स्थित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह वह पुण्यभूमि है जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था, जो इसे हिंदू धर्म में विशेष आस्था का केंद्र बनाता है।
मंदिर की अखंड धूनी क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?
मंदिर परिसर में स्थित अखंड धूनी को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का साक्षी माना जाता है। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि उसी विवाह-अग्नि के समय से अनवरत प्रज्वलित है, जो इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और पूजनीय बनाती है।
CM पुष्कर सिंह धामी ने त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री धामी ने 5 जुलाई 2026 को एक्स पर पोस्ट कर इस मंदिर को 'देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक' बताया। उन्होंने रुद्रप्रयाग आने वाले सभी श्रद्धालुओं और पर्यटकों से यहाँ दर्शन करने की अपील की।
क्या त्रियुगीनारायण मंदिर में विवाह संस्कार भी होते हैं?
हाँ, शिव-पार्वती की विवाहस्थली होने की मान्यता के कारण अनेक दंपती यहाँ विवाह संस्कार के लिए आते हैं। इस स्थान पर विवाह करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
त्रियुगीनारायण मंदिर उत्तराखंड के पर्यटन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मंदिर उत्तराखंड के उन तीर्थस्थलों में से है जो चारधाम से परे राज्य की आध्यात्मिक विविधता को दर्शाते हैं। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन इसे धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनाता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलता है।
राष्ट्र प्रेस
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