देवप्रयाग का श्री रघुनाथ मंदिर: जहाँ राम ने की थी तपस्या, CM धामी ने बताया आध्यात्मिक महत्व
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर देवप्रयाग स्थित श्री रघुनाथ मंदिर का भव्य वीडियो साझा करते हुए इस प्राचीन तीर्थस्थल के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। टिहरी गढ़वाल जिले में अलकनंदा और भागीरथी नदियों के पावन संगम पर स्थित यह मंदिर भगवान श्रीराम को समर्पित देश के सर्वाधिक पूजनीय तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है।
मुख्यमंत्री धामी का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर का वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'टिहरी गढ़वाल जिले के देवप्रयाग में, जहाँ पवित्र अलकनंदा और भागीरथी नदियों का संगम होता है, वहाँ स्थित है प्राचीन श्री रघुनाथ मंदिर। यह भगवान श्रीराम को समर्पित एक ऐतिहासिक और पवित्र मंदिर है। यह मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, भक्ति और विश्वास का प्रमुख केंद्र रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर यह पावन धाम भक्तों को शांति, सुकून और दिव्य अनुभूति का अनोखा अनुभव कराता है।
पौराणिक महत्व और मान्यताएँ
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण वध के पश्चात ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। इस मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण के केदार खंड में मिलता है, जो इसकी प्राचीनता और धार्मिक प्रामाणिकता को प्रमाणित करता है। गौरतलब है कि यह मंदिर भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशम में से एक है — एक ऐसी श्रेणी जिसमें भारत के सर्वाधिक पवित्र वैष्णव तीर्थस्थल सम्मिलित हैं।
स्थापत्य कला और ऐतिहासिक पुनर्निर्माण
यह मंदिर उत्तर भारतीय 'देउला' वास्तुकला शैली में निर्मित है, जो अपनी शिखर-प्रधान संरचना के लिए विख्यात है। मंदिर का मूल जीर्णोद्धार 8वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा कराया गया माना जाता है। वर्तमान भव्य संरचना का निर्माण जम्मू-कश्मीर के महाराजा गुलाब सिंह ने आरंभ कराया था और इसे 1860 में महाराजा रणबीर सिंह ने पूर्ण करवाया। यह ऐतिहासिक तथ्य इस मंदिर को केवल आस्था का नहीं, बल्कि भारत की स्थापत्य विरासत का भी जीवंत प्रमाण बनाता है।
पर्यटन और तीर्थाटन का केंद्र
देवभूमि उत्तराखंड में स्थित यह मंदिर धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। देवप्रयाग वैसे भी पंचप्रयाग में से एक होने के कारण हिंदू श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है — यह वही स्थान है जहाँ से गंगा नदी अपना नाम और स्वरूप ग्रहण करती है। मुख्यमंत्री धामी ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि टिहरी गढ़वाल की यात्रा के दौरान इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें। आने वाले समय में इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन के और विस्तार की संभावना है।