26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या श्री माल्यवंत रघुनाथ मंदिर में आज भी भगवान राम और लक्ष्मण के प्रमाण हैं?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या श्री माल्यवंत रघुनाथ मंदिर में आज भी भगवान राम और लक्ष्मण के प्रमाण हैं?

सारांश

भगवान राम और रामायण से जुड़े धार्मिक स्थलों की यात्रा करें। जानें कैसे कर्नाटक के श्री माल्यवंत रघुनाथ मंदिर में भगवान राम के जीवन के अनूठे प्रमाण मौजूद हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

श्री माल्यवंत रघुनाथ मंदिर भगवान राम और लक्ष्मण के प्रमाण रखता है।
यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है और इसका निर्माण शिला को काटकर किया गया है।
भगवान राम ने यहां एक तीर चलाकर अपनी सेना के लिए सुरक्षित स्थान बनाया था।
मंदिर की मूर्तियों में भगवान राम ध्यान की मुद्रा में हैं।
इस मंदिर का निर्माण कृष्णदेवराय के शासनकाल में हुआ था।

नई दिल्ली, 21 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भगवान राम और रामायण से जुड़े धार्मिक स्थल भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं। चित्रकूट में आज भी भगवान राम के पदचिन्हों का प्रमाण मिलता है।

कर्नाटक के हम्पी में स्थित श्री माल्यवंत रघुनाथ मंदिर एक ऐसा स्थान है, जो भगवान राम के जीवन प्रसंगों का प्रतीक है। यहां आज भी भगवान राम और लक्ष्मण के होने के प्रमाण मिलते हैं।

यह मंदिर कर्नाटक के हम्पी के वेंकटपुरा के समीप पहाड़ी पर स्थित है, जिसे शिला को काटकर बनाया गया है। बड़ी शिला में कई दरारें आज भी विद्यमान हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान राम ने यहां अपने निवास स्थान के लिए पहले तीर चलाया था। तीर चलाने के कारण शिला में दरारें पड़ीं, जो अब तक बनी हुई हैं।

मान्यता है कि मां सीता का अपहरण होने के बाद भगवान राम और लक्ष्मण बहुत चिंतित थे। मानसून के कारण वे अपनी सेना के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं खोज पा रहे थे, तब भगवान राम ने एक विशाल चट्टान पर तीर चलाया और एक गुफा जैसी संरचना का निर्माण हुआ। इसी स्थान पर उन्होंने अपनी सेना के साथ बारिश से बचने के लिए विश्राम किया था।

यही नहीं, इसी स्थान पर भगवान हनुमान ने मां सीता के कुशल होने की सूचना प्रभु श्रीराम को दी थी। इसीलिए इस मंदिर को भगवान राम के सुख-दुख दोनों से जोड़ा जाता है।

हालांकि, मूल मंदिर के निर्माण का सटीक प्रमाण नहीं है, किंतु ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर 600 वर्ष पहले कृष्णदेवराय के शासनकाल में स्थापित हुआ था। मंदिर की दीवारों पर भगवान शिव, भगवान राम, मां सीता और हनुमान की प्रतिमाएं देखी जा सकती हैं।

विशेष बात यह है कि मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम की एक ऐसी मूर्ति है, जो ध्यान की मुद्रा में है। गर्भगृह में भगवान राम आसन पर बैठे हैं, उनके साथ कमल पर मां सीता और बगल में भगवान लक्ष्मण भी उपस्थित हैं। यह भारत की पहली भगवान राम की मूर्ति है, जिनके हाथों में कोई अस्त्र नहीं है। सामान्यतः भगवान राम के साथ धनुष और बाण का चित्रण होता है।

मंदिर का अधिकांश हिस्सा अब जर्जर हो चुका है, और यह भी इसलिए है क्योंकि मुगल काल में इस मंदिर को नष्ट करने का प्रयास किया गया था। मंदिर के सामने आज भी एक विशाल शिला स्थित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय इतिहास और लोककथाओं का एक ज्वलंत प्रतीक भी है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री माल्यवंत रघुनाथ मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर कर्नाटक के हम्पी के वेंकटपुरा के पास स्थित है।
इस मंदिर का निर्माण कब हुआ था?
मंदिर का निर्माण लगभग 600 वर्ष पूर्व कृष्णदेवराय के शासनकाल में हुआ था।
क्या इस मंदिर में भगवान राम और लक्ष्मण के प्रमाण हैं?
हां, इस मंदिर में भगवान राम और लक्ष्मण के होने के प्रमाण आज भी मौजूद हैं।
मंदिर की विशेषता क्या है?
इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भगवान राम की एक ऐसी मूर्ति है, जिनके हाथों में कोई अस्त्र नहीं है।
क्या मंदिर का कोई ऐतिहासिक महत्व है?
हां, यह मंदिर भारतीय संस्कृति और इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले