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क्या भारत को 'हिंदू राष्ट्र' नहीं, 'सनातन राष्ट्र' घोषित किया जाना चाहिए?

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क्या भारत को 'हिंदू राष्ट्र' नहीं, 'सनातन राष्ट्र' घोषित किया जाना चाहिए?

सारांश

करौली सरकार ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की निंदा की और भारत को 'सनातन राष्ट्र' घोषित करने की मांग की। यह बयान बांग्लादेश में धार्मिक संवाद की आवश्यकता को भी दर्शाता है।

मुख्य बातें

करौली सरकार ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को नकारात्मक बताया।
उन्होंने 'सनातन राष्ट्र' की अवधारणा को प्रस्तुत किया।
धार्मिक संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया।
राजनीति में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों का विरोध किया।
सभी धर्मों का समावेशी दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया।

हरिद्वार, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर करौली सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। करौली शंकर महादेव (जिन्हें करौली सरकार के नाम से भी जाना जाता है) ने कहा कि बांग्लादेश में जो घटनाएँ घटित हो रही हैं, वे बेहद भयावह और पूर्णतः निंदनीय हैं।

उन्होंने न्यूज एजेंसी राष्ट्र प्रेस से कहा कि इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत और बांग्लादेश के धार्मिक नेताओं, आध्यात्मिक गुरुओं और आस्था के संरक्षकों को आपस में संवाद प्रारंभ करना चाहिए। करौली सरकार के अनुसार, धार्मिक संवाद के माध्यम से ही इस प्रकार की हिंसा और अत्याचार को समाप्त करने की दिशा में सार्थक प्रयास किए जा सकते हैं।

इसी दौरान उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में हुई नारेबाजी पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि देश में इस तरह की कथित राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के कारण बार-बार भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग उठती है। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर एक अलग और स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

करौली सरकार महाराज ने कहा, "जब हिंदू राष्ट्र की बात होती है, तो यह समझना आवश्यक है कि यह एक विशेष संस्कृति और सोच का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में दूसरी संस्कृतियों का स्थान कहां होगा?"

उन्होंने आगे कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के बजाय 'सनातन राष्ट्र' घोषित किया जाना चाहिए।

उनके अनुसार, सनातन केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है, और इसके अंतर्गत सभी धर्म समाहित हैं। सनातन की भावना समावेशी है और यही भारत की मूल पहचान है।

अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा, “जो लोग ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ नहीं कह सकते, उनसे मताधिकार छीन लिया जाना चाहिए। ऐसे ही जो लोग सनातन राष्ट्र के नियमों का पालन नहीं करें, उनके मताधिकार को हमेशा के लिए समाप्त कर देना चाहिए। साथ ही, राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।"

दिल्ली में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने पर करौली सरकार ने कहा, "जहां भी लोग धार्मिक अशांति फैलाने, जिसे 'लैंड जिहाद' कहा जा रहा है, उसे बढ़ावा देने के लिए अवैध रूप से जमीन पर कब्जा कर रहे हैं, वह बिल्कुल गलत है। ऐसे मामलों में सरकार जो भी कार्रवाई कर रही है, उसे पूरे संत समाज का समर्थन प्राप्त है। कोई भी सच्चा सनातनी ऐसी धर्म विरोधी गतिविधियों का विरोध करेगा, चाहे वह व्यक्ति सत्ता में हो या सिस्टम से बाहर हो।"

राहुल गांधी की भगवान राम से तुलना करने वाले बयान पर करौली सरकार ने कहा, "हम शुभकामनाएं देते हैं कि उनमें भगवान राम का आचरण भी आ जाए।"

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करौली सरकार का 'सनातन राष्ट्र' का विचार क्या है?
करौली सरकार का मानना है कि 'सनातन' केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है जिसमें सभी धर्म समाहित हैं।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बारे में करौली सरकार का क्या कहना है?
करौली सरकार ने बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों को भयावह और निंदनीय बताया और धार्मिक संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
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