मां कुंजापुरी देवी: 51 शक्तिपीठों में प्रमुख, जहां मिलती है अद्भुत आध्यात्मिक शांति
सारांश
Key Takeaways
- मां कुंजापुरी देवी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।
- यहां की आध्यात्मिक शांति अद्वितीय है।
- मंदिर से स्वर्गारोहिणी और अन्य पहाड़ों का दृश्य मिलता है।
- नवरात्रि के दौरान यहां विशेष रौनक होती है।
- यह स्थल श्रद्धालुओं को विशेष अनुभव प्रदान करता है।
देहरादून, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देवभूमि उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित 'मां कुंजापुरी देवी' आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। हिमालय की पहाड़ियों के बीच बसा यह मंदिर केवल पूजा का एक जागृत स्थल नहीं है, बल्कि यह उन ५१ शक्तिपीठों में से एक है, जहां सती के अंग गिरे थे।
यहां की ताज़ी हवा में घुली आध्यात्मिक शांति और चारों ओर फैला हिमालय का वैभव, हर किसी के मन को असीम सुकून से भर देता है। मंदिर की महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है। माता रानी के दर्शन करने और मंदिर के पौराणिक इतिहास को जानने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। इसके साथ उन्होंने लिखा, "जनपद टिहरी गढ़वाल में स्थित 'मां कुंजापुरी धाम' अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और दिव्य आभा के लिए विख्यात एक पौराणिक सिद्ध पीठ है। यहां का वातावरण श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा रहता है, जो हर श्रद्धालु को विशेष अनुभव प्रदान करता है।"
उन्होंने सभी लोगों को मंदिर में आने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने लिखा, "आप भी जनपद टिहरी गढ़वाल आगमन पर मां कुंजापुरी के दर्शन अवश्य करें।"
यह मंदिर ५२ शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव सती के पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विलाप कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के हिस्से किए थे। माना जाता है कि यहां माता सती का 'कुंज' (ऊपरी भाग या धड़) गिरा था, जिसके कारण इस स्थान का नाम 'कुंजापुरी' पड़ा।
मंदिर की भव्यता और प्राकृतिक सौंदर्य अद्वितीय है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह स्थल आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा रहता है। यहां से स्वर्गारोहिणी, गंगोत्री, बंदरपूंछ, चौखंबा, और दून घाटी का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। साथ ही, यह मंदिर सूर्योदय देखने के लिए एक बेहतरीन स्थान माना जाता है, जहां सुबह-सुबह श्रद्धालु मां के दर्शन और हिमालय का नजारा लेने आते हैं। हालाँकि, पूरे साल मंदिर के दर्शन के लिए आ सकते हैं, लेकिन नवरात्रि के समय यहां विशेष रौनक होती है।