11 अगस्त 2026
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सशक्त पंचायत नेत्री अभियान: महिला जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल लॉन्च

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सशक्त पंचायत नेत्री अभियान: महिला जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल लॉन्च

सारांश

पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने लोकसभा में बताया कि 'सशक्त पंचायत नेत्री अभियान' के तहत महिला जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शुरू हुआ है। घरेलू जिम्मेदारियाँ, सामाजिक झिझक और पुरुषों का वर्चस्व — एनआईआरडीपीआर की रिपोर्ट में इन्हें ग्राम सभाओं में महिलाओं की कम भागीदारी का कारण बताया गया है।

मुख्य बातें

पंचायती राज मंत्रालय ने 'सशक्त पंचायत नेत्री अभियान' के तहत महिला जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल लॉन्च किया।
मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 11 अगस्त 2026 को लोकसभा में यह जानकारी दी।
एनआईआरडीपीआर की राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट में घरेलू जिम्मेदारियाँ, जागरूकता की कमी और पारदर्शिता का अभाव प्रमुख बाधाओं के रूप में चिह्नित।
ग्राम सभा से पहले वार्ड सभा और महिला सभा आयोजित करने का प्रावधान किया गया।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी; ग्राम सभा की स्थायी उप-समितियों के गठन पर जोर।

पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 11 अगस्त 2026 को लोकसभा में बताया कि सरकार ने 'सशक्त पंचायत नेत्री अभियान' के तहत महिला जनप्रतिनिधियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शुरू किया है, जिसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों में महिलाओं की सक्रिय और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ग्राम सभाओं में महिलाओं की उपस्थिति और निर्णय-प्रक्रिया में हिस्सेदारी अपेक्षाकृत सीमित बनी हुई है।

अभियान में क्या शामिल है

मंत्री राजीव रंजन सिंह के अनुसार, 'सशक्त पंचायत नेत्री अभियान' का लक्ष्य महिला जनप्रतिनिधियों को ग्रामीण शासन के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी और कौशल प्रदान करना है। इससे वे अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकेंगी और महिलाओं के नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था को बल मिलेगा।

उन्होंने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायतों में महिलाओं की सीमित भागीदारी के पीछे घरेलू जिम्मेदारियाँ, सामाजिक झिझक और बैठकों में पुरुषों का वर्चस्व प्रमुख कारण हैं।

राष्ट्रीय अध्ययन के निष्कर्ष

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर तैयार राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट में कई बाधाओं की पहचान की गई है। इनमें आजीविका और रोजगार से जुड़ी बाधाएँ, जागरूकता की कमी, कमजोर संचार व्यवस्था, शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई न होना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी शामिल हैं।

रिपोर्ट में संबंधित विभागों के अधिकारियों की अनुपस्थिति और बैठकों में उठाए गए मुद्दों पर उचित फॉलो-अप के अभाव को भी महत्वपूर्ण कारण बताया गया है।

सरकार के उठाए कदम

पंचायती राज मंत्रालय ने ग्राम सभा को अधिक सहभागी और जवाबदेह बनाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन उपायों में ग्राम सभा बैठकों में सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा करना, ग्राम सभाओं की संख्या बढ़ाना, राज्य पंचायती राज अधिनियम के अनुसार न्यूनतम कोरम सुनिश्चित करना और नियमित एजेंडा तैयार करना शामिल है।

इसके अतिरिक्त, ग्राम सभा से पहले अलग वार्ड सभा और महिला सभा आयोजित करने तथा स्थायी उप-समितियों के गठन और उनके सुचारु संचालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि भारत में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है, और कई राज्यों में यह 50% तक है। बावजूद इसके, निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों का वास्तविक निर्णय-प्रक्रिया में सहभाग अक्सर सीमित रहता है। यह अभियान उस खाई को पाटने की दिशा में एक व्यावहारिक प्रयास माना जा रहा है।

आगे क्या

एनआईआरडीपीआर के माध्यम से यह प्रशिक्षण मॉड्यूल सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। मंत्रालय का लक्ष्य है कि ग्राम सभाएँ न केवल संख्या में बढ़ें, बल्कि उनमें महिलाओं की भागीदारी गुणात्मक रूप से भी मजबूत हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी दशकों बाद एक विशेष 'प्रशिक्षण अभियान' की जरूरत पड़ रही है — यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। असली चुनौती यह नहीं कि महिलाएँ प्रशिक्षित नहीं हैं, बल्कि यह है कि सामाजिक ढाँचा और प्रशासनिक संस्कृति उन्हें बोलने की जगह नहीं देती। जब तक ग्राम सभाओं में 'प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व' की जड़ें नहीं उखड़तीं और पुरुष परिजनों द्वारा निर्वाचित महिलाओं की जगह फैसले लेने की प्रवृत्ति नहीं रुकती, तब तक प्रशिक्षण मॉड्यूल सिर्फ कागजी कवायद बनकर रह सकते हैं। मंत्रालय को जवाबदेही के मापने योग्य पैमाने तय करने होंगे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सशक्त पंचायत नेत्री अभियान क्या है?
यह पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य महिला जनप्रतिनिधियों को ग्रामीण शासन के व्यावहारिक कौशल और जानकारी से लैस करना है। इसे एनआईआरडीपीआर के माध्यम से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।
ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी कम क्यों है?
एनआईआरडीपीआर की राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू जिम्मेदारियाँ, सामाजिक झिझक, पुरुषों का वर्चस्व, जागरूकता की कमी और प्रशासनिक पारदर्शिता का अभाव प्रमुख कारण हैं। आजीविका से जुड़ी बाधाएँ और शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई न होना भी इसमें शामिल हैं।
इस अभियान से महिला प्रतिनिधियों को कैसे फायदा होगा?
प्रशिक्षण मॉड्यूल महिला जनप्रतिनिधियों को सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और ग्राम सभा संचालन की व्यावहारिक जानकारी देगा। इससे वे अपनी जिम्मेदारियाँ प्रभावी ढंग से निभा सकेंगी और नेतृत्व क्षमता विकसित होगी।
ग्राम सभाओं को अधिक सहभागी बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
पंचायती राज मंत्रालय ने राज्यों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें ग्राम सभा से पहले वार्ड सभा और महिला सभा आयोजित करना, न्यूनतम कोरम सुनिश्चित करना, नियमित एजेंडा तैयार करना और स्थायी उप-समितियों का गठन करना शामिल है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा कब और कहाँ हुई?
पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 11 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में इस अभियान की जानकारी दी। यह कार्यक्रम एनआईआरडीपीआर के माध्यम से पूरे देश में लागू किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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